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छूना है आसमां : अक्षय गौड़ का माउंट किलिमंजारों पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का सपना, केंद्रीय मंत्री शेखावत ने सौंपा राष्ट्रीय ध्वज

केंद्रीय मंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज सौंपना केवल औपचारिक सम्मान नहीं होता, बल्कि यह राष्ट्र की ओर से दिया गया विश्वास, प्रेरणा और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। जब कोई खिलाड़ी, पर्वतारोही या अन्वेषक तिरंगे के साथ किसी वैश्विक मंच पर जाता है, तो वह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा के लिए प्रयास करता है। इस दृष्टि से अक्षय गौड़ को राष्ट्रीय ध्वज सौंपना इस बात का संकेत है कि उनका अभियान भारत के गौरव से जुड़ा हुआ है।

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

9783414079 diliprakhai@gmail.com

पेशे से बिजनेसमैन और समाजसेवी अक्षय गौड़ अब एक नई ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने की तैयारी में हैं। युवा पर्वतारोही अक्षय गौड़ अगले महीने अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर बिना सप्लीमेंट ऑक्सीजन के दौड़ते हुए चढ़ाई (रनिंग समिट) कर विश्व रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेंगे। इस साहसिक अभियान से पहले केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर उन्हें राष्ट्रीय ध्वज सम्मानपूर्वक भेंट किया, जिसे अक्षय गौड़ किलिमंजारो की चोटी पर फहराने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

राष्ट्रीय ध्वज सौंपने का महत्व

किसी पर्वतारोही या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति को केंद्रीय मंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज सौंपना केवल औपचारिक सम्मान नहीं होता, बल्कि यह राष्ट्र की ओर से दिया गया विश्वास, प्रेरणा और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। जब कोई खिलाड़ी, पर्वतारोही या अन्वेषक तिरंगे के साथ किसी वैश्विक मंच पर जाता है, तो वह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश की प्रतिष्ठा के लिए प्रयास करता है। इस दृष्टि से अक्षय गौड़ को राष्ट्रीय ध्वज सौंपना इस बात का संकेत है कि उनका अभियान भारत के गौरव से जुड़ा हुआ है।

राष्ट्रीय ध्वज उस भावना का प्रतीक है जो देशवासियों को एक सूत्र में बांधती है। पर्वत की ऊंचाइयों पर तिरंगा फहराना यह संदेश देता है कि भारतीय युवाओं में साहस, संकल्प और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने की क्षमता है। इसलिए मंत्री द्वारा ध्वज सौंपना एक तरह से राष्ट्र की शुभकामनाओं और समर्थन का सार्वजनिक संदेश भी माना जाता है।

बिना ऑक्सीजन चढ़ाई का विशेष महत्व

माउंट किलिमंजारो समुद्र तल से लगभग 5,895 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से काफी कम हो जाता है। अधिकांश पर्वतारोही इस ऊंचाई पर अतिरिक्त ऑक्सीजन का सहारा लेते हैं, लेकिन अक्षय गौड़ बिना सप्लीमेंट ऑक्सीजन के दौड़ते हुए चढ़ाई कर रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। यह प्रयास शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता और लंबी तैयारी का भी प्रमाण है।

विशेषज्ञों के अनुसार बिना ऑक्सीजन इतनी ऊंचाई पर तेज गति से चढ़ाई करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि शरीर को कम ऑक्सीजन में संतुलन बनाए रखना पड़ता है। ऐसे में यह अभियान केवल व्यक्तिगत साहस का उदाहरण नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं की साहसिक क्षमता का वैश्विक प्रदर्शन भी है।

प्रेरणा का संदेश

अक्षय गौड़ का यह अभियान केवल रिकॉर्ड बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि युवाओं को साहसिक खेलों और फिटनेस के प्रति प्रेरित करने का संदेश भी है। समाजसेवा से जुड़े होने के कारण वे अपने अभियानों को हमेशा सामाजिक संदेशों से जोड़ते रहे हैं। किलिमंजारो अभियान के माध्यम से भी वे युवाओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और तैयारी मजबूत हो, तो कठिन से कठिन चुनौतियां भी पार की जा सकती हैं।

केंद्रीय मंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज सौंपने का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे देश के युवाओं को यह प्रेरणा मिलती है कि सरकार और समाज उन लोगों के साथ खड़ा है जो देश का नाम ऊंचा करने के लिए प्रयासरत हैं। यह सम्मान युवा पीढ़ी को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

राष्ट्र गौरव का प्रतीक

जब किसी अंतरराष्ट्रीय अभियान में तिरंगा किसी पर्वत की चोटी पर फहराया जाता है, तो वह केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि पूरे देश की उपलब्धि बन जाता है। अक्षय गौड़ का सपना भी यही है कि जब वे किलिमंजारो की चोटी पर पहुंचें, तो वहां तिरंगा लहराकर भारत का गौरव विश्व मंच पर प्रदर्शित करें। यह क्षण न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन का ऐतिहासिक पल होगा, बल्कि देश के लिए भी गर्व का विषय बनेगा।

तैयारी और संकल्प

अक्षय गौड़ पिछले कई वर्षों से विभिन्न साहसिक अभियानों में भाग लेते रहे हैं और कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इस अभियान के लिए भी उन्होंने विशेष शारीरिक और मानसिक तैयारी की है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय ध्वज प्राप्त करना उनके लिए सम्मान के साथ-साथ जिम्मेदारी भी है, जो उन्हें अपने लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने की प्रेरणा देता है।

नई ऊंचाइयों की ओर भारत का कदम

आज भारत के युवा खेल, विज्ञान, साहसिक गतिविधियों और नवाचार के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। अक्षय गौड़ का यह अभियान भी उसी कड़ी का हिस्सा है, जो यह दर्शाता है कि भारतीय युवा अब वैश्विक मंच पर अपनी क्षमता का दमदार प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।

राष्ट्रीय ध्वज के साथ माउंट किलिमंजारो की चोटी तक पहुंचने का उनका संकल्प न केवल एक विश्व रिकॉर्ड की दिशा में उठाया गया कदम है, बल्कि यह देशभक्ति, साहस और आत्मविश्वास का भी सशक्त उदाहरण है। देशवासियों को उम्मीद है कि अक्षय गौड़ अपने इस ऐतिहासिक अभियान में सफलता प्राप्त कर तिरंगे को विश्व की एक और ऊंचाई पर गर्व से लहराएंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor