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छूना है आसमां, दिखानी है राह…महिलाएं बोलीं- हम किसी से कम नहीं

नारी सब पर भारी…अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को लेकर देश की विभिन्न महिलाओं के विचार

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इसको लेकर राइजिंग भास्कर ने देश भर की महिलाओं से विभिन्न विषयों पर विचार आमंत्रित किए थे। कुछ चुनिंदा महिलाओं के विचार यहां प्रकाशित किए जा रहे हैं। ये विचार महिला सशक्तिकरण, राजनीतिक उड़ान, बिजनेस, शिक्षा, साहित्य-संस्कृति-कला और महिलाओं के विभिन्न पक्षों को एक दिशा देने का मार्ग प्रशस्त करेंगे, ऐसा हमारा मानना है। राइजिंग भास्कर भविष्य में भी ऐसे स्वस्थ विचारों को अपने पोर्टल में स्थान देगा। यह हमारा वादा है।

1. आधुनिक भारत में महिला सशक्तिकरण: उपलब्धियां और चुनौतियां

पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं ने शिक्षा, प्रशासन, सेना, विज्ञान और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके बावजूद लैंगिक भेदभाव, घरेलू हिंसा, रोजगार में असमान अवसर और वेतन अंतर जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब सामाजिक सोच में बदलाव आए, शिक्षा और रोजगार के अवसर समान रूप से उपलब्ध हों तथा महिलाओं को निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिले।

-शोभा जायसवाल, इंदौर

2. डिजिटल युग में महिलाओं की सुरक्षा और साइबर क्राइम से बचाव

इंटरनेट और सोशल मीडिया ने महिलाओं को अभिव्यक्ति का नया मंच दिया है, लेकिन साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन ट्रोलिंग और डिजिटल धोखाधड़ी जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता, मजबूत साइबर कानूनों का पालन और तकनीकी प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। परिवार, संस्थान और सरकार को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना होगा जिसमें महिलाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग सुरक्षित तरीके से कर सकें।

-अनिता जांगिड़, जोधपुर 

3. महिला उद्यमिता: स्टार्टअप और आत्मनिर्भरता की नई राह

आज महिलाएं स्टार्टअप, ई-कॉमर्स और छोटे व्यवसायों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। सरकारी योजनाओं, बैंक लोन और डिजिटल मार्केटिंग ने उनके लिए नए अवसर खोले हैं। फिर भी पूंजी की कमी, सामाजिक दबाव और प्रशिक्षण के अभाव जैसी बाधाएं सामने आती हैं। यदि प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन की बेहतर व्यवस्था हो, तो महिला उद्यमिता देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकती है।

-नीलम व्यास ‘स्वयंसिद्धा’

4. राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: प्रभाव और संभावनाएं

स्थानीय निकायों से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है, जिससे नीति निर्माण में सामाजिक संवेदनशीलता आई है। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलती है। भविष्य में यदि राजनीतिक दल महिलाओं को अधिक टिकट दें और नेतृत्व के अवसर प्रदान करें, तो लोकतंत्र और अधिक मजबूत और संतुलित बन सकता है।

-आशा व्यास, बीकानेर 

5. ग्रामीण भारत की महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह, लघु उद्योग और कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। इससे परिवार की आय बढ़ती है और सामाजिक सम्मान भी मिलता है। हालांकि बाजार तक पहुंच, प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों की कमी अभी भी बड़ी चुनौती है। यदि इन क्षेत्रों में समर्थन बढ़ाया जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका और अधिक प्रभावी हो सकती है।

-ममता वासु, जोधपुर 

6. शिक्षा और करियर में बेटियों के लिए बदलता सामाजिक नजरिया

आज समाज में बेटियों की शिक्षा के प्रति जागरूकता पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। परिवार अब बेटियों को उच्च शिक्षा और करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। फिर भी कुछ क्षेत्रों में बाल विवाह, स्कूल छोड़ने की समस्या और संसाधनों की कमी बाधा बनती है। लगातार जागरूकता अभियान और शिक्षा में निवेश से यह बदलाव और तेज हो सकता है।

-अनुभूति जैन, जोधपुर 

7. कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और वेतन असमानता का मुद्दा

कई क्षेत्रों में महिलाओं को समान कार्य के लिए पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है। नेतृत्व पदों पर भी महिलाओं की संख्या कम है। कार्यस्थल पर समान अवसर, पारदर्शी वेतन प्रणाली और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना जरूरी है। कंपनियों और संस्थानों को लैंगिक समानता को केवल नीति नहीं, बल्कि व्यवहारिक संस्कृति बनाना होगा।

-कौशल्या अग्रवाल, जोधपुर 

8. स्वास्थ्य जागरूकता: महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की प्राथमिकताएं

महिलाएं अक्सर परिवार की जिम्मेदारियों में अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं। पोषण की कमी, मानसिक तनाव और नियमित स्वास्थ्य जांच का अभाव गंभीर समस्याओं को जन्म देता है। स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, सस्ती चिकित्सा सेवाएं और मानसिक स्वास्थ्य पर खुली चर्चा से महिलाओं का समग्र स्वास्थ्य बेहतर किया जा सकता है।

-वरुणा व्यास, जैसलमेर

9. खेल जगत में भारतीय महिलाओं की सफलता और भविष्य

भारतीय महिला खिलाड़ियों ने ओलंपिक, विश्व कप और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। इससे समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ है। यदि ग्रामीण स्तर पर खेल सुविधाएं, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता बढ़ाई जाए, तो आने वाले वर्षों में और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आ सकती हैं।

-विजयलक्ष्मी व्यास, जैसलमेर 

10. सोशल मीडिया का महिलाओं की पहचान और अभिव्यक्ति पर प्रभाव

सोशल मीडिया महिलाओं को अपनी प्रतिभा, विचार और व्यवसाय को प्रस्तुत करने का प्रभावी मंच देता है। इसके माध्यम से कई महिलाएं उद्यमी और प्रभावशाली व्यक्तित्व बन चुकी हैं। हालांकि नकारात्मक टिप्पणियां और ट्रोलिंग मानसिक दबाव पैदा करती हैं। सकारात्मक उपयोग और डिजिटल साक्षरता से सोशल मीडिया महिलाओं के सशक्तिकरण का मजबूत साधन बन सकता है।

-आशा व्यास, जैसलमेर 

11. महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध: समाधान और सामाजिक जिम्मेदारी

महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। कानूनों की सख्ती के साथ-साथ समाज में जागरूकता, त्वरित न्याय और पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता आवश्यक है। परिवार और शिक्षण संस्थानों में सम्मान और समानता के मूल्य सिखाने से दीर्घकालिक समाधान संभव हो सकता है।

-ज्योति पुरोहित, हैदराबाद

12. परिवार और करियर के संतुलन में आधुनिक महिला की भूमिका

आज की महिला घर और करियर दोनों जिम्मेदारियां निभा रही है, जिससे उस पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ता है। परिवार का सहयोग, कार्यस्थल पर लचीली नीतियां और डे-केयर जैसी सुविधाएं इस संतुलन को आसान बना सकती हैं। साझा जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित करना समय की जरूरत है।

-मेनका व्यास, जैसलमेर 

13. नेतृत्व में महिलाएं: कॉर्पोरेट से प्रशासन तक बदलती तस्वीर

कॉर्पोरेट, प्रशासन और शिक्षा संस्थानों में महिला नेतृत्व धीरे-धीरे बढ़ रहा है। महिला नेतृत्व से निर्णय प्रक्रिया में संवेदनशीलता और विविध दृष्टिकोण शामिल होते हैं। यदि नेतृत्व प्रशिक्षण और अवसरों का विस्तार किया जाए, तो महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तन की प्रभावी वाहक बन सकती हैं।

-नीलू थानवी, नागपुर

14. महिला शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका

शिक्षित महिला न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाती है बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रगतिशील दिशा देती है। शिक्षा से स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जागरूकता में सुधार होता है। इसलिए महिला शिक्षा में निवेश राष्ट्र निर्माण की सबसे प्रभावी रणनीति मानी जाती है।

-कुंजलता पुरोहित, नागपुर

15. आर्थिक निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी: परिवार से समाज तक

जब महिलाएं आर्थिक निर्णयों में भाग लेती हैं, तो परिवार की वित्तीय स्थिति अधिक संतुलित और योजनाबद्ध होती है। बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान और वित्तीय साक्षरता से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि समाज में आर्थिक समानता स्थापित हो सके।

-निशा गोपा, जैसलमेर 

16. नई पीढ़ी की सोच: बेटियों के प्रति बदलती मानसिकता

नई पीढ़ी में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो रही है। शिक्षा, खेल और करियर में उन्हें समान अवसर देने की प्रवृत्ति बढ़ी है। यह बदलाव समाज को अधिक प्रगतिशील बना रहा है, लेकिन इसे ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचाना अभी भी आवश्यक है।

-शालिनी जोशी, मुंबई

17. महिलाओं के लिए सरकारी योजनाएं: प्रभाव और वास्तविक स्थिति

सरकार ने महिला शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्यमिता के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन कई बार जानकारी और क्रियान्वयन की कमी से उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। योजनाओं की पारदर्शिता, जागरूकता और नियमित मॉनिटरिंग से इनका प्रभाव और बढ़ाया जा सकता है।

-योगिता गोपा, जोधपुर 

18. महिला स्वयं सहायता समूह: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़

स्वयं सहायता समूहों ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सामूहिक बचत, छोटे ऋण और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। सरकारी और बैंकिंग सहयोग से इन समूहों की क्षमता और बढ़ाई जा सकती है।

-अंजुलता पुरोहित, नागपुर

19. महिला सुरक्षा कानून: जागरूकता और प्रभावशीलता

महिला सुरक्षा के लिए कई कानून मौजूद हैं, लेकिन उनकी जानकारी का अभाव बड़ा कारण है कि पीड़ित महिलाएं न्याय तक नहीं पहुंच पातीं। कानूनी जागरूकता अभियान, त्वरित न्याय प्रक्रिया और पुलिस संवेदनशीलता कानूनों की प्रभावशीलता बढ़ा सकती है।

-आयुषि बिस्सा, जैसलमेर 

20. 2030 का भारत और महिलाओं की भूमिका: संभावनाएं और लक्ष्य

2030 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महिलाओं की भूमिका निर्णायक होगी। शिक्षा, तकनीक, नेतृत्व और उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से आर्थिक विकास तेज होगा। समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और कौशल विकास के माध्यम से यह लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।

-काजल पुरोहित, जैसलमेर 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor