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Thursday, July 9, 2026, 1:53 am

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एटीएम लूट की बढ़ती घटनाएं: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, क्या जीपीएस ट्रैकिंग बनेगी स्थायी समाधान?

एटीएम लूट की बढ़ती घटनाएं केवल बैंकिंग तंत्र की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन और नागरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय हैं। जैसलमेर के पंकज भाटिया का जीपीएस ट्रैकिंग का सुझाव तकनीकी रूप से उपयोगी और व्यवहारिक दिशा में एक सकारात्मक पहल है। हालांकि इसे लागू करने से पहले तकनीकी खामियों और लागत का मूल्यांकन आवश्यक है।

दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर

देशभर में एटीएम मशीनों को उखाड़कर ले जाने और तोड़फोड़ कर नकदी लूटने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। खासकर सुनसान इलाकों, हाईवे किनारे या छोटे शहरों में स्थित एटीएम अपराधियों के आसान निशाने बनते जा रहे हैं। हाल ही में राजस्थान के जैसलमेर में जागरूक नागरिक पंकज भाटिया ने इस समस्या के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उनका कहना है कि प्रत्येक एटीएम मशीन के अंदर जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) या जीपीआरएस आधारित ट्रैकिंग चिप लगाई जानी चाहिए, ताकि एटीएम में किसी भी असामान्य मूवमेंट की स्थिति में तुरंत अलर्ट संबंधित बैंक, कंट्रोल रूम या निकटतम पुलिस थाने को मिल सके।

यह सुझाव ऐसे समय में आया है जब एटीएम लूट की घटनाएं बैंकों के लिए ही नहीं बल्कि आम जनता के लिए भी चिंता का विषय बन चुकी हैं। एक एटीएम में सामान्यतः 25 से 30 लाख रुपये तक की नकदी रहती है। ऐसे में यदि एक मशीन चोरी हो जाती है तो यह सीधे-सीधे सार्वजनिक धन की हानि है।

एटीएम लूट की बढ़ती प्रवृत्ति

पिछले कुछ वर्षों में अपराधियों ने एटीएम लूटने के नए-नए तरीके अपनाए हैं। पहले जहां एटीएम के कार्ड क्लोनिंग या स्किमिंग जैसे साइबर अपराध अधिक होते थे, वहीं अब सीधे मशीन उखाड़कर ले जाने की घटनाएं बढ़ी हैं। अपराधी गैस कटर, जेसीबी या भारी वाहन का इस्तेमाल कर पूरी मशीन उखाड़कर ले जाते हैं। कई बार मशीन को सुनसान जगह पर ले जाकर तोड़ा जाता है और नकदी निकाल ली जाती है।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत कमजोर होती है। कई एटीएम बिना गार्ड के चलते हैं। सीसीटीवी कैमरे तो लगे होते हैं, लेकिन वे केवल रिकॉर्डिंग करते हैं, तत्काल रोकथाम में उनकी भूमिका सीमित रहती है। कई मामलों में अपराधी कैमरे भी तोड़ देते हैं या चेहरा ढंककर वारदात करते हैं।

वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था की सीमाएं

एटीएम में आमतौर पर निम्न सुरक्षा उपाय होते हैं—

  1. सीसीटीवी कैमरा

  2. अलार्म सिस्टम

  3. सुरक्षा गार्ड (कुछ स्थानों पर)

  4. बैंक का रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम

लेकिन इन उपायों में कई खामियां हैं। सीसीटीवी फुटेज वारदात के बाद जांच में मदद करता है, परंतु अपराध को रोक नहीं पाता। अलार्म सिस्टम अक्सर स्थानीय स्तर तक सीमित रहता है। कई बार तकनीकी खराबी के कारण अलार्म सक्रिय नहीं होता। वहीं गार्ड की नियुक्ति हर एटीएम पर संभव नहीं है, विशेषकर दूरदराज क्षेत्रों में।

पंकज भाटिया का सुझाव: जीपीएस ट्रैकिंग

जैसलमेर के पंकज भाटिया ने सुझाव दिया है कि एटीएम मशीन के अंदर एक जीपीएस/जीपीआरएस ट्रैकिंग चिप लगाई जाए, जो लगातार उसकी लोकेशन कंट्रोल यूनिट को भेजती रहे। यदि मशीन में अचानक तेज मूवमेंट हो या उसे निर्धारित स्थान से हटाया जाए, तो तुरंत अलर्ट निकटतम पुलिस स्टेशन और बैंक को भेजा जाए। साथ ही सायरन बजने लगे, ताकि आसपास के लोग सतर्क हो सकें।

उनका तर्क है कि जब 5 हजार रुपये के मोबाइल फोन में जीपीएस चिप लग सकती है, तो करोड़ों रुपये के लेन-देन से जुड़े एटीएम में यह व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती? यह तकनीक विमान या बड़े वाहनों की तरह लोकेशन ट्रैकिंग में सहायक हो सकती है।

सुझाव की उपयोगिता

पंकज भाटिया का सुझाव तकनीकी दृष्टि से व्यावहारिक और उपयोगी प्रतीत होता है। इसके कुछ संभावित लाभ निम्न हो सकते हैं—

  1. तत्काल अलर्ट: यदि एटीएम को उखाड़ा जाता है, तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना मिल सकती है।

  2. लाइव लोकेशन ट्रैकिंग: मशीन को जहां भी ले जाया जाए, उसकी लोकेशन ट्रेस की जा सकेगी।

  3. अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव: यदि यह प्रचारित हो जाए कि सभी एटीएम ट्रैकिंग सिस्टम से लैस हैं, तो अपराधी वारदात से पहले सोचेंगे।

  4. सार्वजनिक धन की सुरक्षा: समय पर कार्रवाई से नकदी की बरामदगी संभव हो सकती है।

संभावित खामियां और चुनौतियां

हालांकि यह सुझाव आकर्षक है, लेकिन इसमें कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं—

  1. सिग्नल जैमर का खतरा: अपराधी जीपीएस या मोबाइल सिग्नल जैमर का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में ट्रैकिंग बाधित हो सकती है।

  2. तकनीकी रखरखाव: हजारों एटीएम में ट्रैकिंग चिप लगाना और उनका नियमित मेंटेनेंस करना आसान नहीं होगा।

  3. झूठे अलर्ट: कई बार सामान्य कंपन या तकनीकी कारणों से फॉल्स अलर्ट उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे पुलिस और बैंकिंग सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

  4. लागत का मुद्दा: प्रत्येक एटीएम में ट्रैकिंग सिस्टम, डेटा कनेक्टिविटी और कंट्रोल रूम इंटीग्रेशन की लागत काफी अधिक हो सकती है।

स्थायी समाधान की दिशा में व्यापक दृष्टिकोण

एटीएम लूट की समस्या का स्थायी समाधान केवल एक तकनीक से संभव नहीं है। इसके लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था अपनानी होगी—

1. एटीएम एंकरिंग और सुदृढ़ निर्माण

एटीएम मशीन को जमीन या दीवार से मजबूत स्टील बोल्ट और कंक्रीट बेस से स्थायी रूप से जोड़ा जाए। मशीन को उखाड़ना अत्यंत कठिन हो।

2. इंक-डाई सिस्टम

नकदी में विशेष इंक डाई पैक लगाए जाएं, जो मशीन से जबरन छेड़छाड़ पर फट जाएं और नोटों को बेकार कर दें।

3. रियल-टाइम मॉनिटरिंग सेंटर

हर बैंक के पास 24×7 सक्रिय कंट्रोल रूम हो, जहां सभी एटीएम की गतिविधियों की लाइव निगरानी हो।

4. पुलिस-बैंक समन्वय

स्थानीय पुलिस और बैंकों के बीच त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र (Quick Response Team) बनाया जाए।

5. बायोमेट्रिक और स्मार्ट सेंसर

मशीन में शॉक सेंसर, टिल्ट सेंसर और मोशन सेंसर लगाए जाएं जो असामान्य गतिविधि पर स्वतः सायरन और अलर्ट सक्रिय करें।

6. सीसीटीवी का क्लाउड बैकअप

रिकॉर्डिंग केवल स्थानीय हार्ड डिस्क में न हो, बल्कि क्लाउड सर्वर पर भी लाइव अपलोड हो।

आरबीआई की भूमिका

देश में बैंकिंग प्रणाली का नियामक संस्थान भारतीय रिजर्व बैंक है। एटीएम संचालन और सुरक्षा से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार इसी के पास है। यदि आरबीआई एटीएम सुरक्षा के लिए अनिवार्य ट्रैकिंग, उन्नत सेंसर और मानक संचालन प्रक्रिया लागू कर दे, तो स्थिति में व्यापक सुधार संभव है।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरण

कई विकसित देशों में एटीएम में जीपीएस ट्रैकिंग, कैश न्यूट्रलाइजेशन सिस्टम और रिमोट लॉकिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। भारत में भी डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई के विस्तार के साथ तकनीकी अवसंरचना मजबूत हुई है। ऐसे में एटीएम सुरक्षा में भी आधुनिक तकनीक का समावेश समय की मांग है।

पंकज भाटिया का सुझाव उपयोगी व व्यवहारिक दिशा में सकारात्मक पहल

एटीएम लूट की बढ़ती घटनाएं केवल बैंकिंग तंत्र की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन और नागरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय हैं। पंकज भाटिया का जीपीएस ट्रैकिंग का सुझाव तकनीकी रूप से उपयोगी और व्यवहारिक दिशा में एक सकारात्मक पहल है। हालांकि इसे लागू करने से पहले तकनीकी खामियों और लागत का मूल्यांकन आवश्यक है।

स्थायी समाधान के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, पुलिस-बैंक समन्वय और कड़े नियामक निर्देशों का संयोजन जरूरी है। यदि एटीएम मशीनें मजबूत एंकरिंग, सेंसर-आधारित अलर्ट, लाइव ट्रैकिंग और इंक-डाई सिस्टम से लैस हों, तो अपराधियों के लिए वारदात को अंजाम देना अत्यंत कठिन हो जाएगा।

अंततः यह सार्वजनिक धन की सुरक्षा का प्रश्न है। तकनीक उपलब्ध है, आवश्यकता है उसे प्रभावी नीति और इच्छाशक्ति के साथ लागू करने की। यदि समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं, तो एटीएम लूट की घटनाओं पर निश्चित रूप से अंकुश लगाया जा सकता है और बैंकिंग व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor