आरोप है कि साध्वी को अस्थमा की बीमारी थी और कंपाउंडर ने डेक्सेना और डाइक्लोफेनिक जैसे ‘शेड्यूल-एच’श्रेणी के इंजेक्शन लगाए थे, जिसका रिएक्शन घातक होता है। बताया जाता है कि इंजेक्शन लगाने के बाद ही साध्वी की मौत हो गई…।
केडी इसरानी. स्वतंत्र पत्रकार. जोधपुर
प्रसिद्ध कथावाचक और साध्वी प्रेम बाईसा की मौत मामले में एसआईटी की जांच कंपाउंडर देवी सिंह के ईदगिर्द घूम रही है। बताया जा रहा है कि कंपाउंडर की कभी भी गिरफ्तारी हो सकती है।
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के मामले की गुत्थी अभी सुलझी नहीं है। लेकिन एसआईटी की जांच अब कंपाउंडर देवी सिंह के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। साध्वी के पिता अन्न-जल त्याग चुके हैं। कल रात उनकी तबीयत बिगड़ गई तो एमडीएम हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। वहीं साध्वी को दो इंजेक्शन लगाए गए थे। जिसके तुरंत बाद प्रेम बाईसा की मौत हो गई। जांच के अनुसार कंपाउंडर ने ऐसी गलतियां की हैं जिस पर उसको बीएनएस की धाराओं के तहत सजा मिल सकती है।
पुलिस और एसआईटी सूत्रों के अनुसार जोधपुर की प्रसिद्ध कथा वाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में अब बड़ा एक्शन हुआ है। मौत के करीब 20 दिन बाद जोधपुर की बोरानाडा पुलिस ने आरोपी कंपाउंडर देवी सिंह के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज की है। एसआईटी (SIT) की जांच में सामने आया है कि कंपाउंडर ने चिकित्सा नियमों की घोर अवहेलना करते हुए साध्वी को वे इंजेक्शन लगाए थे, जिन्हें देने का अधिकार केवल एक रजिस्टर्ड डॉक्टर के पास होता है। विशेषज्ञों के अनुसार डेक्सेना और डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन एक साथ नहीं लगाए जा सकते। ऐसे में कंपाउंडर अब जांच के घेरे में आ गया है।
साध्वी के लिए लापरवाही बनी जानलेवा !:
जोधपुर में 28 जनवरी को बोरानाडा स्थित आश्रम में साध्वी की तबीयत खराब हुई थी। आरोप है कि उस दौरान कंपाउंडर देवी सिंह ने उन्हें डेक्सेना और डाइक्लोफेनिक जैसे ‘शेड्यूल-एच’श्रेणी के इंजेक्शन लगाए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद ही साध्वी की स्थिति बिगड़ गई और उनकी जान चली गई। एसआईटी ने जब मेडिकल बोर्ड से राय मांगी, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। बोर्ड ने बताया कि अस्थमा के मरीजों के लिए ये इंजेक्शन जोखिम भरे हो सकते हैं और इनका रिएक्शन घातक हो सकता है।
कंपाउंडर ने क्यों की लापरवाही?
साध्वी की मौत मामले में पुलिस और एसआईटी की जांच में कंपाउंडर देवी सिंह की कई बड़ी लापरवाहियां उजागर हुई हैं। देवी सिंह ने बिना डॉक्टर के परामर्श के ये इंजेक्शन लगाए। कंपाउंडर कोई रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर नहीं था, फिर भी उसने डॉक्टर के स्तर का निर्णय लिया। नर्सिंग कोर्स करने के बावजूद उसने अपनी तय सीमाओं का उल्लंघन किया।
BNS की इन धाराओं में हो सकती है सजा
एसआईटी ने पिछले 20 दिनों में साध्वी के पिता, स्टाफ, रसोइए और हॉस्पिटल कर्मियों से लंबी पूछताछ की है। यदि लापरवाही के आरोप अदालत में साबित होते हैं तो आरोपी देवी सिंह को BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 105 या 106 के तहत कड़ी सजा भुगतनी पड़ सकती है। फिलहाल, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है।



