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Thursday, July 9, 2026, 4:58 am

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सड़क सुरक्षा : दिलीप कुमार पुरोहित के तीन क्रांतिकारी सुझाव, पीएम मोदी ने कार्रवाई का दिया आश्वासन

2023 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1,73,000 लोग जान गंवा बैठेयह संख्या भारत के मोटर वाहन विभाग और मंत्रालय ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे (MoRTH) की रिपोर्ट पर आधारित है। रिपोर्ट में बताया गया कि 480,000 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें इन मौतों और लगभग 4.6 लाख से अधिक लोग घायल हुए। दुर्घटनाओं की अधिकता को देखते हुए राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुछ आइडिया दिए थे, जिन पर पीएम मोदी ने विचार करने का आश्वासन दिया है। अगर इन आइडिया को लागू किया जाता है देश में नई क्रांतिकारी पहल होगी वहीं कई अन्य देश भी इससे प्रेरणा ले सकते हैं। 

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

9783414079 diliprakhai@gmail.com

देश में हर वर्ष लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल होते हैं और असमय मृत्यु हो जाती है। दुपहिया से लेकर बस और कार दुर्घटनाओं तक, सड़क हादसे आज एक बड़ी राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुके हैं। ऐसे समय में राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए महत्वपूर्ण सुझावों ने सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इन सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का आश्वासन दिए जाने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

वाहन खरीद पर अनिवार्य एक्सीडेंटल बीमा का प्रस्ताव

दिलीप कुमार पुरोहित ने अपने सुझाव में कहा है कि जब कोई व्यक्ति नया वाहन खरीदे — चाहे वह दुपहिया हो, तिपहिया हो या चौपहिया — तो वाहन निर्माता कंपनियों को बाध्य किया जाए कि वे उस वाहन के साथ एक निश्चित राशि का एक्सीडेंटल बीमा कवर अनिवार्य रूप से दें।

प्रस्तावित सुझाव इस प्रकार है:

  • दुपहिया वाहन – ₹2 लाख का एक्सीडेंटल बीमा

  • तिपहिया वाहन – ₹3 लाख का एक्सीडेंटल बीमा

  • चौपहिया वाहन – ₹5 लाख का एक्सीडेंटल बीमा

पुरोहित का तर्क है कि आज वाहन खरीदते समय थर्ड पार्टी बीमा तो अनिवार्य होता है, लेकिन व्यक्तिगत दुर्घटना की स्थिति में परिवार को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती। अक्सर देखा गया है कि दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवार को तत्काल चिकित्सा खर्च, पुनर्वास और आय के नुकसान जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।

यदि वाहन खरीद के साथ ही यह बीमा कवर जुड़ जाए तो दुर्घटना की स्थिति में परिवार को तत्काल आर्थिक राहत मिल सकेगी।

बस यात्रियों के लिए दूरी आधारित बीमा कवर

सुझाव का दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु सार्वजनिक परिवहन, विशेषकर रोडवेज बस यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है। पुरोहित ने प्रस्ताव दिया है कि जो यात्री लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, उन्हें यात्रा की दूरी के आधार पर एक्सीडेंटल बीमा कवर अनिवार्य रूप से दिया जाए।

प्रस्तावित संरचना इस प्रकार है:

  • 300 किलोमीटर से अधिक यात्रा – ₹1 लाख का बीमा

  • 500 किलोमीटर से अधिक यात्रा – ₹2 लाख का बीमा

  • 1000 किलोमीटर से अधिक यात्रा – ₹5 लाख का बीमा

पुरोहित का कहना है कि बस दुर्घटनाओं में कई बार यात्रियों को गंभीर चोटें आती हैं या जान तक चली जाती है। वर्तमान में मुआवजा प्रक्रिया लंबी और जटिल होती है। यदि टिकट के साथ ही बीमा कवर जुड़ा हो तो दुर्घटना की स्थिति में क्लेम प्रक्रिया सरल और त्वरित हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था डिजिटल टिकटिंग प्रणाली से आसानी से जोड़ी जा सकती है, जिससे यात्रियों को अलग से कोई औपचारिकता नहीं करनी पड़ेगी।

चालान राशि में एक्सीडेंटल कवर जोड़ने का सुझाव

तीसरा सुझाव ट्रैफिक पुलिस की चालान प्रणाली से जुड़ा है।

पुरोहित ने प्रस्ताव रखा है कि जब भी ट्रैफिक पुलिस किसी वाहन चालक का चालान काटे, तो उस चालान की राशि के साथ ₹1 लाख का एक्सीडेंटल बीमा कवर स्वतः प्रदान किया जाए।

इस सुझाव के पीछे उनका तर्क है कि चालान केवल दंडात्मक कार्रवाई न होकर सुधारात्मक और सुरक्षात्मक भी होना चाहिए। यदि चालक जुर्माना भरता है और उसके साथ उसे एक वर्ष का एक्सीडेंटल कवर मिल जाए, तो वह आर्थिक रूप से सुरक्षित रहेगा और नियमों के प्रति भी अधिक जागरूक होगा। यह मॉडल सड़क सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा का एक संयोजन बन सकता है।

सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता

भारत में हर वर्ष बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष लाखों दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मौतें और गंभीर चोटें शामिल हैं। दुपहिया वाहन चालकों की दुर्घटनाओं का प्रतिशत विशेष रूप से अधिक है। हेलमेट न पहनना, ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना और सड़क संरचना की कमी प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

ऐसे में यदि हर वाहन के साथ पर्याप्त एक्सीडेंटल बीमा अनिवार्य हो जाए, तो दुर्घटना पीड़ित परिवारों को त्वरित राहत मिल सकती है।

आर्थिक दृष्टि से संभावित प्रभाव

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो वाहन कंपनियों और बीमा कंपनियों के बीच समन्वय बढ़ेगा। वाहन की कुल कीमत में बीमा प्रीमियम का एक हिस्सा जोड़ा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में पॉलिसियां जारी होने से प्रीमियम की दरें कम रखी जा सकती हैं, जिससे ग्राहक पर अतिरिक्त बोझ भी अधिक नहीं पड़ेगा। साथ ही, डिजिटल इंडिया अभियान के तहत क्लेम प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जा सकता है।

सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पहले भी कई सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू की हैं, जिनमें दुर्घटना बीमा और जीवन बीमा योजनाएं शामिल हैं। दिलीप कुमार पुरोहित का यह सुझाव उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है, जिसमें सड़क सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ जोड़ा गया है। यदि सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो यह देश में सड़क सुरक्षा सुधार की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित हो सकती है।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

बीमा और परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्ताव व्यावहारिक है, बशर्ते इसके लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा और पारदर्शी कार्यान्वयन प्रणाली तैयार की जाए।

  • वाहन निर्माताओं को बीमा कंपनियों के साथ दीर्घकालिक अनुबंध करना होगा।

  • टिकटिंग प्रणाली में बीमा प्रीमियम का सूक्ष्म समावेश करना होगा।

  • क्लेम सेटलमेंट की समय सीमा तय करनी होगी।

यदि इन पहलुओं को सुव्यवस्थित किया जाए तो यह मॉडल अन्य देशों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

आम जनता की उम्मीदें

सड़क दुर्घटनाओं में अपनों को खो चुके परिवारों का मानना है कि यदि ऐसी व्यवस्था पहले से होती तो उन्हें आर्थिक संकट का सामना कम करना पड़ता। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया है और इसे “मानवीय दृष्टिकोण से दूरदर्शी पहल” बताया है।

दिलीप कुमार पुरोहित के आइडिया आर्थिक सुरक्षा को लेकर दूरगामी सोच का प्रतीक

राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए ये सुझाव सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक व्यापक सोच को दर्शाते हैं। दुपहिया, तिपहिया और चौपहिया वाहन खरीद पर अनिवार्य एक्सीडेंटल बीमा, लंबी दूरी के बस यात्रियों के लिए दूरी आधारित बीमा कवर और ट्रैफिक चालान के साथ बीमा कवर जोड़ने जैसे प्रस्ताव न केवल व्यावहारिक हैं बल्कि सामाजिक सुरक्षा के दायरे को भी मजबूत कर सकते हैं।

अब देश की निगाहें केंद्र सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। यदि इन सुझावों को नीतिगत रूप दिया जाता है, तो यह पहल भारत में सड़क सुरक्षा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor