निर्दोष लोगों के नाम पर चल रहे फर्जी कारोबार से बढ़ी परेशानी; केंद्र सरकार और GST विभाग बना रहे विशेष मैकेनिज्म, हेल्पडेस्क और त्वरित कार्रवाई की तैयारी।
पिछले 5 वर्षों में देश में लगभग 90 हजार से अधिक जीएसटी धोखाधड़ी/टैक्स चोरी के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कुल टैक्स चोरी/फर्जीवाड़े की राशि करीब 7 लाख करोड़ से अधिक आंकी गई है। इनमें से बड़ी संख्या फर्जी इनवॉइस और फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन (आईटीसी फ्रॉड) से जुड़ी रही है।
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
9783414079 diliprakhai@gmail.com
देशभर में एक चिंताजनक प्रवृत्ति तेजी से सामने आ रही है, जिसमें असामाजिक तत्व किसी व्यक्ति के पैन कार्ड और व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग कर उसके नाम से फर्जी जीएसटी (GST) रजिस्ट्रेशन करवा लेते हैं। इसके बाद अपराधी उस व्यक्ति के नाम से व्यापारिक गतिविधियां दिखाते हुए नियमित रूप से जीएसटी रिटर्न भी दाखिल करते रहते हैं। जब विभागीय जांच या नोटिस जारी होते हैं, तब असली पैन धारक को इस पूरे फर्जीवाड़े का पता चलता है—और तब तक वह अनजाने में कानूनी जाल में फंस चुका होता है।
इस प्रकार के मामलों में निर्दोष व्यक्ति को न केवल कानूनी बल्कि आर्थिक और मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और Goods and Services Tax Network (GSTN) अब ऐसे पीड़ितों के लिए एक स्पष्ट, सरल और निशुल्क समाधान तंत्र (मेकैनिज्म) तैयार करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
कैसे होता है फर्जी GST रजिस्ट्रेशन का खेल
जानकारी के अनुसार, ठग सबसे पहले किसी व्यक्ति के पैन कार्ड, आधार या अन्य पहचान दस्तावेजों की जानकारी हासिल करते हैं। यह जानकारी कई बार डेटा लीक, साइबर फ्रॉड या दस्तावेजों की लापरवाही से उपलब्ध हो जाती है। इसके बाद अपराधी जीएसटी पोर्टल पर जाकर उस व्यक्ति के नाम से फर्जी रजिस्ट्रेशन कर लेते हैं।
रजिस्ट्रेशन के बाद:
- फर्जी फर्म के नाम से बिलिंग शुरू कर दी जाती है
- इनवॉइस के जरिए कागजी लेन-देन दिखाया जाता है
- इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दुरुपयोग किया जाता है
- नियमित रूप से जीएसटी रिटर्न फाइल किए जाते हैं
इस पूरे खेल में असली पैन धारक को कुछ भी पता नहीं होता।
नोटिस आने पर खुलती है सच्चाई
जब विभाग को किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है या रिटर्न में गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित पैन नंबर पर नोटिस जारी किया जाता है। यहीं से असली समस्या शुरू होती है।
पीड़ित व्यक्ति को:
- विभागीय नोटिस का जवाब देना पड़ता है
- यह साबित करना पड़ता है कि उसका इस फर्म से कोई संबंध नहीं है
- कई बार पूछताछ और जांच का सामना करना पड़ता है
इस प्रक्रिया में समय, पैसा और मानसिक तनाव—तीनों का भारी नुकसान होता है।
तकनीकी जानकारी के अभाव में बढ़ती है परेशानी
अधिकांश पीड़ितों को जीएसटी कानून, पोर्टल या प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती। ऐसे में उन्हें:
- चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA)
- टैक्स कंसल्टेंट
- या अन्य तकनीकी विशेषज्ञों
की मदद लेनी पड़ती है। इन सेवाओं के लिए उन्हें अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है, जबकि वे स्वयं इस धोखाधड़ी के शिकार होते हैं। यह स्थिति पीड़ित के लिए और अधिक पीड़ादायक बन जाती है।
सरकार बना रही है विशेष समाधान तंत्र
इस बढ़ती समस्या को देखते हुए भारत सरकार और जीएसटी विभाग अब एक व्यापक और पीड़ित-केंद्रित समाधान प्रणाली तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
1. सरल और निशुल्क शिकायत प्रक्रिया
सरकार ऐसी व्यवस्था लाने पर विचार कर रही है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति बिना किसी शुल्क के अपनी शिकायत दर्ज कर सके। इसके लिए:
- ऑनलाइन पोर्टल पर विशेष विकल्प दिया जाएगा
- शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया सरल बनाई जाएगी
- न्यूनतम दस्तावेजों के साथ आवेदन संभव होगा
2. GST पोर्टल पर विशेष हेल्पडेस्क
Goods and Services Tax Network पर एक समर्पित हेल्पडेस्क स्थापित करने की योजना है, जहां:
- पीड़ित सीधे अपनी समस्या दर्ज कर सकेगा
- शिकायत की ट्रैकिंग की सुविधा मिलेगी
- समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा
3. स्वतः जांच और त्वरित कार्रवाई
ऐसे मामलों में जहां यह स्पष्ट हो जाए कि पैन का दुरुपयोग हुआ है:
- विभाग स्वयं जांच शुरू करेगा
- असली पैन धारक को राहत दी जाएगी
- दोषी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी
4. फर्जी रजिस्ट्रेशन का त्वरित निरस्तीकरण
सरकार ऐसी प्रक्रिया पर भी काम कर रही है, जिससे:
- फर्जी जीएसटी नंबर को तुरंत रद्द किया जा सके
- पीड़ित के नाम से चल रही गतिविधियों को रोका जा सके
पीड़ितों के लिए प्रस्तावित सुरक्षा उपाय
सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे मैकेनिज्म में पीड़ितों को राहत देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं:
- नोटिस मिलने पर तुरंत “फ्रॉड अलर्ट” दर्ज करने की सुविधा
- जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की पेनल्टी से छूट
- डिजिटल वेरिफिकेशन के जरिए पहचान की पुष्टि
- एक बार क्लीन चिट मिलने के बाद भविष्य में सुरक्षा
डिजिटल वेरिफिकेशन को बनाया जाएगा मजबूत
फर्जी रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए सरकार KYC प्रक्रिया को और सख्त बनाने पर विचार कर रही है। इसमें:
- आधार आधारित OTP वेरिफिकेशन
- लाइव फोटो कैप्चर
- जियो-टैगिंग
- बैंक अकाउंट वेरिफिकेशन
जैसे उपाय शामिल किए जा सकते हैं।
साइबर फ्रॉड पर भी कसेगा शिकंजा
यह समस्या केवल टैक्स फ्रॉड तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर अपराध का भी हिस्सा है। इसलिए:
- साइबर क्राइम एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा
- डेटा लीक के मामलों की जांच तेज होगी
- दोषियों पर आईटी एक्ट और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी
विशेषज्ञों की राय: जागरूकता भी जरूरी
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ पंकज भाटिया का मानना है कि सरकार के कदम सराहनीय हैं, लेकिन आम लोगों को भी सतर्क रहना होगा। लोगों को चाहिए कि:
- अपने पैन और आधार की जानकारी सुरक्षित रखें
- अनजान वेबसाइट्स या एजेंट्स को दस्तावेज न दें
- समय-समय पर अपना GST स्टेटस चेक करते रहें
क्या करें यदि आप भी शिकार बन जाएं?
अगर किसी व्यक्ति को संदेह हो कि उसके नाम से फर्जी GST रजिस्ट्रेशन हुआ है, तो उसे तुरंत:
- GST पोर्टल पर लॉगिन कर जानकारी जांचनी चाहिए
- विभाग को लिखित शिकायत देनी चाहिए
- नजदीकी GST कार्यालय से संपर्क करना चाहिए
- साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करनी चाहिए
सरकार का उद्देश्य: पीड़ित को राहत, दोषी को सजा
सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि:
- निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक परेशान न होना पड़े
- दोषियों को कड़ी सजा मिले
- सिस्टम पारदर्शी और सुरक्षित बने
- पैन कार्ड के दुरुपयोग से फर्जी GST रजिस्ट्रेशन का यह नया ट्रेंड आम नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार और जीएसटी विभाग द्वारा इस दिशा में उठाए जा रहे कदम उम्मीद जगाते हैं कि आने वाले समय में पीड़ितों को राहत मिलेगी और इस तरह के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
यह आवश्यक है कि जहां एक ओर सरकार मजबूत तंत्र विकसित करे, वहीं दूसरी ओर आम नागरिक भी जागरूक और सतर्क रहें। तभी इस प्रकार के संगठित वित्तीय अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सकेगा।
पिछले 5 वर्षों में GST ठगी/फर्जीवाड़े के मामले (अनुमानित स्थिति)
भारत सरकार के विभिन्न जवाबों और रिपोर्ट्स के आधार पर:
- पिछले 5 वर्षों (2020–2025) में देशभर में लगभग 90,000 से अधिक GST धोखाधड़ी/टैक्स चोरी के मामले सामने आए हैं
- इन मामलों में कुल टैक्स चोरी/फर्जीवाड़े की राशि करीब ₹7 लाख करोड़ से अधिक आंकी गई है
- इनमें से बड़ी संख्या फर्जी इनवॉइस और फर्जी GST रजिस्ट्रेशन (ITC Fraud) से जुड़ी रही है
हाल के सालों में बढ़ोतरी
- केवल 2025-26 (एक वर्ष के भीतर) ही 24,000 से अधिक फर्जी GST इनवॉइस/रजिस्ट्रेशन केस पकड़े गए
- 2024-25 में 25,000 से ज्यादा फर्जी फर्में सामने आईं
- कुछ मामलों में नकली PAN और आधार से हजारों फर्जी GST नंबर बनाए गए
राहत (Relief) कितने मामलों में मिली?
सटीक “पीड़ितों को राहत” का आधिकारिक आंकड़ा अलग से उपलब्ध नहीं है, लेकिन उपलब्ध डेटा के आधार पर अनुमान:
- कुल मामलों में से लगभग 15%–25% मामलों में प्रारंभिक स्तर पर राहत (जैसे नोटिस रोकना, रजिस्ट्रेशन रद्द करना) मिल जाती है
- कई मामलों में जांच के बाद फर्जी रजिस्ट्रेशन रद्द (Cancellation) कर दिए जाते हैं (जैसे अलग-अलग राज्यों में सैकड़ों फर्जी GST नंबर निरस्त किए गए)
- सरकार द्वारा वसूली/रिकवरी के रूप में लगभग ₹1.2–1.4 लाख करोड़ तक राशि वापस जमा करवाई गई
महत्वपूर्ण वास्तविकता
लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में निर्दोष पैन धारकों को खुद ही लड़ाई लड़नी पड़ती है। राहत मिलने में समय लगता है। और हर केस में तुरंत समाधान नहीं मिलता। देश में जीएसटी से जुड़ी ठगी और फर्जी रजिस्ट्रेशन के मामलों का दायरा तेजी से बढ़ा है। पिछले पांच वर्षों में करीब 90 हजार से अधिक मामले सामने आना इस बात का संकेत है कि यह समस्या अब संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले चुकी है। हालांकि सरकार द्वारा सख्ती और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से हजारों फर्जी फर्मों को पकड़ा गया है और कई मामलों में राहत भी मिली है, लेकिन अभी भी पीड़ितों को आसान और त्वरित न्याय दिलाने के लिए एक मजबूत मैकेनिज्म की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ पंकज भाटिया बोले- उन्होंने भी सरकार और जीएसटी विभाग को सुझाव भेजे थे
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ पंकज भाटिया ने बताया कि जीएसटी से जुड़ी ठगी के मामलों में केंद्र सरकार और जीएसटी विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदम एक बेहद सार्थक और समयानुकूल पहल हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में पैन कार्ड के दुरुपयोग कर फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिससे आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई है। ऐसे में सरकार का इस दिशा में सक्रिय होना न केवल आवश्यक था, बल्कि इससे लाखों संभावित पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद भी जगी है।भाटिया ने बताया कि उन्होंने स्वयं भी इस गंभीर समस्या को लेकर पहले भारत सरकार और संबंधित विभागों को कई सुझाव प्रेषित किए थे। उनके सुझावों में विशेष रूप से यह बात शामिल थी कि निर्दोष व्यक्तियों को जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से बचाने के लिए एक सरल, पारदर्शी और निशुल्क समाधान प्रणाली विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि जीएसटी पोर्टल पर एक समर्पित हेल्पडेस्क या शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए, ताकि पीड़ित व्यक्ति बिना किसी तकनीकी बाधा के सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सके। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अब इन सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाना एक सकारात्मक संकेत है। इससे न केवल पीड़ितों को समय और धन की बचत होगी, बल्कि न्याय प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और तेज हो सकेगी। भाटिया ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा दोषी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अंत में उन्होंने कहा कि यह पहल नागरिकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे जीएसटी प्रणाली में विश्वास भी मजबूत होगा।




