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Sunday, August 23, 2026, 7:39 am

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जुगां-जुगां सूं परपंरा अंवेरती/जस गाथा लिखती बीकाणा सौरम थारी…..

बीकानेर के 539वें स्थापना दिवस उछब थरपणा में बीकानेर पर केन्द्रित काव्य रंगत आयोजित 

दिलीप कुमार पुरोहित. बीकानेर
राजस्थानी साफा-पाग पगड़ी, कला संस्थान एवं थार विरासत की ओर से 539वें नगर स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित छह दिवसीय ‘उछब थरपणा’ के पांचवे दिन लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन-सदन में बीकानेर को केन्द्र में रखकर एक नवाचार के तहत हिन्दी, उर्दू और राजस्थानी की नई रचना के साथ काव्य रंगत का आयोजन हुआ।
काव्य रंगत के मुख्य अतिथि शायर क़ासिम बीकानेरी ने कहा कि उछब थरपणा समारोह के तहत होने वाले विभिन्न आयोजन बीकानेर के वैभव, विरासत, धरोहर, परंपरा आदि को केन्द्र में रखकर हो रहे है वह अपने आप में महत्वपूर्ण है। जिसके लिए दोनों आयोजन संस्था साधुवाद की पात्र है। काव्य रंगत में शायर कासिम बीकानेरी ने-मेरे नगर की सबसे बड़ी शान देखो/होली भी है निराली यहां पर/निराली है यहां ईद …. ताजा गजल पेशकर बीकानेर की आन-बान-शान पेश की। इसी क्रम मे कवि कमल रंगा ने अपनी नई राजस्थानी कविता-जुगां-जुगां सूं परपंरा अंवेरती/जस गाथा लिखती बीकाणा सौरम थारी…..के माध्यम से बीकानेर की परपंरा और उसके वैभव को रेखांकित किया। कवि प्रमोद शर्मा ने बीकानेर के आलीजापन को-यह शहर है या कविता की किताब/जिसमें दुनियाभर का है हिसाब…. शब्द चित्रों के माध्यम से उकेरा तो शायर वली मोहम्मद गौरी ने अपनी ताजा नज्म़-सुबह हंसी है और हंसी इसकी शाम है/क्या शहर बीकानेर भी प्यारा सा नाम है पेशकर बीकानेर की शान को प्रस्तुत किया।
शायर जाकिर अदीब ने अपनी ताजा ग़ज़ल बीकानेर को समर्पित करते हुए-अमनो अमा के गीत जहां गाए जाते है/बनारस से सुंदर सुबह है तो अवध से सुंदर शाम है…..पेशकर बीकानेर के सौन्दर्य को सामने रखा। इसी क्रम में कवि डॉ. नरसिंह बिन्नाणी ने अपनी ताजा हाइकू-आपरी संस्कृति नैं नीं भूले….पेश कर बीकानेर की सांस्कृतिक वैभव को रेखांकित किया तो लोक कवि मदन गोपाल व्यास ‘जैरी’ ने अपनी लोक कविताओं के माध्यम से बीकानेर की स्थापना से जुडे़ कई प्रसंग को अपने गीत के माध्यम से साझा किए। कवि जुगल किशोर पुरोहित ने राजस्थानी गीत-म्हारौ बीकाणौ मतवालो-है सगळां सूं न्यारौ…. पेश कर बीकानेर की आलीजापन को प्रस्तुत किया।
कवि कैलाश टाक ने बीकानेर की साझा संस्कृति को अपने गीत में इस तरह प्रस्तुत किया- राम रमे रमजान/रहीम खेले फाग…. इसी क्रम में कवि गिरिराज पारीक ने बीकानेर शहर पर केन्द्रित अपनी कविता-हमारा शहर बीकाणा/अलमस्त सबसे न्यारां….। प्रारंभ में सभी का स्वागत करते हुए उछब थरपणा समारोह संयोजक राजेश रंगा ने पांच दिनों के विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि कल 14 अप्रैल को हजारों पुरानी माचिस की डिब्बियों की बीकानेर में पहली बार प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा। कार्यक्रम का संचालन कवि गिरिराज पारीक ने किया एवं सभी का आभार समारोह समन्वयक कृष्णचंद पुरोहित ने ज्ञापित किया।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor