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रास्ते मुश्क़िल हैं, अनजाने हैं, पर मुझे पंख कमाने हैं : पूजा अग्रवाल

प्रसिद्ध शब्द चित्र लेखिका डॉ. पद्मजा शर्मा ने अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद के तत्वावधान में उदित कवयित्री पूजा अग्रवाल के काव्य संग्रह “यादों का मौसम” के लोकार्पण के अवसर पर कहा-  “यादों का मौसम” में एक टूटा सा प्यार बोलता है, एक तन्हा सी खामोशी डोलती है। यहां एक उदास मुस्कान है तो लंबा सा इंतज़ार है और चुप्पी में प्यार की पुकार है। ये साहित्य दर्शन का वह चरम शिखर है जो अपने विविध अंगों से अनेक विचार प्रवाहों को जनम देता है। इसमें एक शांत नदी है जो सदैव अपनी सहजता, सादगी और मर्यादा में बहती हुई सुंदर समाज के निर्माण की बात करती है।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

“यादों का मौसम” में एक टूटा सा प्यार बोलता है, एक तन्हा सी खामोशी डोलती है। यहां एक उदास मुस्कान है तो लंबा सा इंतज़ार है और चुप्पी में प्यार की पुकार है। ये साहित्य दर्शन का वह चरम शिखर है जो अपने विविध अंगों से अनेक विचार प्रवाहों को जनम देता है। इसमें एक शांत नदी है जो सदैव अपनी सहजता, सादगी और मर्यादा में बहती हुई सुंदर समाज के निर्माण की बात करती है। ये उद्गार प्रसिद्ध शब्द चित्र लेखिका डॉ. पद्मजा शर्मा ने अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद के तत्वावधान में उदित कवयित्री पूजा अग्रवाल के काव्य संग्रह “यादों का मौसम” के लोकार्पण के अवसर पर पेश किए। उन्होंने रविवार को चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित लव कुश सभागार में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में बोलते हुए पूजा अग्रवाल की कविता को सामाजिक रिश्तों की गहरी भावनाओं, कोमल संवेदनाओं और विचारों की ऊंचाई वाली कविता बताया। उन्होंने बताया कि इनके काव्य संग्रह को पढ़ कर लगता नहीं है कि ये इनका पहला काव्य संग्रह है।

इस अवसर पर वरिष्ठ कवयित्री डॉ. नीना छिब्बर ने बतौर मुख्य अतिथि पूजा अग्रवाल के भाव बोध और शब्द शैली पर बोलते हुए कहा कि मानवीय मूल्यों को तराशने वाली इनकी कविताओं में इनका अपना शिल्प, अपनी ज़मीन अपना अलंकार और अपना मुहावरा है जो कि बहुत ही असरदार है। विशिष्ट अथिति डॉ. तृप्ति गोस्वामी “काव्यांशी” ने “यादों का मौसम” लोकार्पित काव्य संग्रह की कविताओं को पारिवारिक संदर्भों को छूते हुए विराट संसार में ले जाने वाली कविता बताया। इस अवसर पर उदित कवयित्री पूजा अग्रवाल ने जब अपनी सृजन यात्रा पर बात करते हुए – ” हर इक चेहरे को गौर से निहारती हूँ मैं” रचना तरन्नुम में सुनाई तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने “रास्ते मुश्क़िल हैं, अनजाने हैं पर मुझे पंख कमाने है, महफ़िल में ऐसा कोई शख़्स नहीं जिसका कोई राज़ नहीं, ख़ुद से मिलने की आस में हूं, एकांतवास में हूं, तेरे शिकवे शिकायतें उलाहने सब जायज़ है, काश कोई मेरा बचपन लौटा दे, स्त्री बाहर पैसा कमाने नहीं जाती, वो मेरा देव मेरा हमसफर आदि सामाजिक सरोकारों की रचनाएं सुनाकर भरपूर दाद बटोरी।

परिषद की अध्यक्ष डॉ. गीता भट्टाचार्य ने बताया कि लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरिदास व्यास, सत्येंद्र छिब्बर, गीतकार दिनेश सिंदल, वरिष्ठ कवि नरसिंह सोलंकी, एन डी निम्बावत, प्रमोद वैष्णव, बसंती पंवार, डॉ. मनीषा डागा, डॉ. रेणुका व्यास, आशा पाराशर, चांद कौर जोशी, रजनी अग्रवाल आदि साहित्यकार तथा राधेश्याम गोयल,जगदीश गोयल,मानमल गर्ग,दिव्या चौधरी,ऊषा माथुर तथा देवेंद्र अग्रवाल, चिराग़ महिपाल, आदित्य अग्रवाल आदि गणमान्य नागरिकों , अनेक विद्यार्थियों व शिक्षाविदों ने शिरकत की। शायर मनशाह “नायक” ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया जबकि युवा कवयित्री अमिता भंडारी ने अपने अनोखे अंदाज़ में कार्यक्रम का संचालन किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor