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मेडिसिन ले रहे हैं तो सावधान…पहले उसके साइड इफैक्ट जान लें…जीवन से जा सकते हैं या जीवन भर का दर्द दे सकती है मेडिसिन

अज्ञानता से खतरा— मेडिसिन लेते समय सावधानी जरूरी, डॉक्टर जो दवा लिखते हैं उसके भी हो सकते हैं साइड इफैक्ट, हमेशा डॉक्टर से पूछिए-दवा के साइड इफैक्ट क्या है, डॉक्टर के भरोसे भी ना रहें-पूरी पड़ताल करें क्योंकि मेडिसिन बीमारी को केवल मेंटेंन करती है, ठीक नहीं करती-स्वस्थ रहने के लिए पंचतत्व पर आधारित आहार और दिनचर्या और प्रकृति के सान्निध्य में रहना जरूरी 

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

आज के आधुनिक दौर में दवाएं (Medicines) हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। छोटी-मोटी सिरदर्द से लेकर गंभीर बीमारियों तक, हर समस्या के समाधान के लिए लोग तुरंत दवा लेने की आदत बना चुके हैं। हम यह भी नहीं देखते कि जो हम मेडिसिन ले रहे हैं उसके साइड इफैक्ट कितने घातक हो सकते हैं। बात इतने तक ही नहीं है। एक डॉक्टर जो मेडिसिन लिखता है उसके भी साइड इफैक्ट होते हैं। आमतौर पर 90 प्रतिशत मामलों में दवा के साइड इफैक्ट तो होते ही होते हैं, लेकिन हम इस बात को हल्के में लेते हैं या नासमझ होने की वजह से ध्यान नहीं देते। मेडिसिन के साइड इफैक्ट तो होते ही होते हैं। यह बात 50 साल से अधिक तक एलोपैथी चिकित्सक रहे डॉक्टर अरुण आचार्य अपने लेक्चर में कई बार कह चुके हैं। स्वास्थ्य साधना केंद्र में उन्होंने एक लेक्चर में साफ तौर पर कहा था कि मेडिसिन के साइड इफैक्ट तो होते ही होते हैं। उन्होंने कई दवाओं के उदाहरण देकर स्पष्ट किया था कि कई दवाओं के तो इतने भंयकर साइड इफैक्ट होते हैं कि या तो जीवन से हाथ धो सकते हैं या जीवन भर का दर्द ले सकते हैं।

दवा बीमारी को पूरी तरह ठीक नहीं करती है। मेडिसिन केवल बीमारी को मेंटेन करती है। हम यह मानकर चलते हैं कि मेडिसिन से बीमारी ठीक होती है जबकि मेडिसिन से बीमारी मेंटेन रहती है और मेडिसिन के साइड इफैक्ट से बीमारी दूसरे रूप से उभर कर कई बार सामने आ जाती है। कभी भी बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं होती। और यह भी सच है कि मेडिसिन के साइड इफैक्ट कई बार अत्यंत ही घातक हो सकते हैं। मेडिसिन शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है। यही कारण है कि दवाओं के साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है।

दवाओं के साइड इफेक्ट्स क्या होते हैं?

साइड इफेक्ट्स का मतलब है—दवा के वह प्रभाव जो इलाज के अलावा शरीर पर पड़ते हैं। ये हल्के भी हो सकते हैं और गंभीर भी।

सामान्य साइड इफेक्ट्स:
  • सिरदर्द
  • चक्कर आना
  • उल्टी या मतली
  • नींद आना या बेचैनी
  • पेट दर्द या गैस
गंभीर साइड इफेक्ट्स:
  • एलर्जी (त्वचा पर चकत्ते, सूजन)
  • सांस लेने में कठिनाई
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • किडनी या लिवर पर असर
  • मानसिक भ्रम या व्यवहार में बदलाव

जानिए कैसे हो सकते हैं दवाओं के साइड इफैक्ट : 

1. डॉक्टर लिखता है उस मेडिसिन के भी साइड इफैक्ट हो सकते हैं  

हम डरा नहीं रहे मगर यह उतना ही सत्य है जितना मेडिकिल साइस कहती है। हर मेडिसिन अपने पीछे साइड इफैक्ट छोड़ जाती है। अक्सर हमें लगता है कि मेडिसिन फायदा कर रही है। मगर मेडिसिन का कई रूप में साइड इफैक्ट होता है जो धीरे-धीरे कई बार उभरता है। हमें पता भी नहीं लगता और साइड इफैक्ट इतने गंभीर हो जाते हैं कि हमें संभलने तक का मौका नहीं मिलता। इसलिए हर दवा लेने से पहले हजार बार सोचना चाहिए।

2. पुराने प्रिस्क्रिप्शन का इस्तेमाल

कई लोग पहले की बीमारी के लिए लिखी गई दवाओं को दोबारा लेने लगते हैं, बिना यह समझे कि वर्तमान स्थिति अलग हो सकती है।

3. इंटरनेट या सोशल मीडिया पर भरोसा

आजकल लोग गूगल या सोशल मीडिया पर देखी गई दवाओं को सीधे खरीद लेते हैं, जो खतरनाक हो सकता है।

4. दवा की मात्रा (Dosage) में बदलाव

कुछ लोग जल्दी ठीक होने के लिए दवा की मात्रा बढ़ा देते हैं या ठीक लगने पर बीच में ही बंद कर देते हैं।

5. एक्सपायरी दवाओं का उपयोग

घर में रखी पुरानी दवाएं कई बार एक्सपायर हो चुकी होती हैं, लेकिन लोग उन्हें फिर भी इस्तेमाल कर लेते हैं।

साइड इफेक्ट्स क्यों होते हैं?

1. शरीर की प्रतिक्रिया

हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। एक ही दवा किसी को फायदा देती है तो दूसरे को नुकसान पहुंचा सकती है। जबकि डॉक्टर आमतौर पर लक्षण देखकर मेडिसिन लिखता है। लक्षण भलेही एक जैसे हो मगर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग क्षमता रखता है। ऐसे में जरूरी नहीं कि लक्षण के अनुसार मेडिसिन सभी रोगियों को समान फायदा करें। दूसरा मेडिसिन जिस फार्मूले से बनी होती है, मेडिकल साइंस में गहराई से अध्ययन करें तो पाएंगे कि उस फार्मूले के कोई न कोई तो साइड इफैक्ट होते ही हैं। अक्सर दवा के पाउच पर छोटे-छोटे अक्षरों में दवा के साइड इफैक्ट भी लिखे होते हैं। इंटरनेट पर दवाओं के साइड इफैक्ट भी स्पष्ट तौर पर लिखे होते हैं। डॉक्टर कभी भी मरीज को नहीं बताता कि मेडिसिन के साइड इफैक्ट क्या-क्या हो सकते हैं। मरीज को ही सावधान रहकर मेडिसिन के साइड इफैक्ट का पता करना चाहिए।

2. एलर्जी

कुछ लोगों को खास दवाओं से एलर्जी होती है, जिससे गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं।

3. दवाओं का आपसी प्रभाव (Drug Interaction)

एक साथ कई दवाएं लेने से वे आपस में रिएक्ट कर सकती हैं और साइड इफेक्ट्स बढ़ सकते हैं।

4. गलत डोज

अधिक या कम मात्रा में दवा लेने से भी शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है।

आम उदाहरण जो खतरे को दर्शाते हैं

1. दर्द निवारक दवाएं (Painkillers)

बार-बार पेनकिलर लेने से किडनी और पेट पर असर पड़ सकता है।

2. एंटीबायोटिक्स का गलत उपयोग

एंटीबायोटिक्स को अधूरा छोड़ देने से शरीर में बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं और भविष्य में दवा असर नहीं करती।

3. सर्दी-खांसी की दवाएं

इनमें मौजूद कुछ तत्व नींद, चक्कर और हृदय गति को प्रभावित कर सकते हैं।

दवा लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

1. डॉक्टर जो दवा दे उस पर आंख मूंद कर भरोसा ना करें : 

किसी भी दवा को लेने से पहले हजार बार पड़ताल करें। केवल इस भरोसे ना रहें कि डॉक्टर ने दवा लिखी है। डॉक्टर की लिखी दवा के भी साइड इफैक्ट हो सकते हैं।

2. दवा का लेबल पढ़ें

दवा पर लिखी जानकारी जैसे—डोज, समय, साइड इफेक्ट्स आदि जरूर पढ़ें।

3. एलर्जी की जानकारी दें

यदि आपको किसी दवा से एलर्जी है, तो डॉक्टर को पहले ही बता दें।

4. एक्सपायरी डेट जांचें

दवा लेने से पहले उसकी एक्सपायरी जरूर देखें।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

1. बुजुर्ग

उनका शरीर कमजोर होता है और दवाओं का असर जल्दी होता है।

2. बच्चे

बच्चों के लिए दवा की मात्रा अलग होती है।

3. गर्भवती महिलाएं

कुछ दवाएं गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

4. पुरानी बीमारी वाले मरीज

जैसे—डायबिटीज, हृदय रोग, किडनी रोग वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

साइड इफेक्ट्स होने पर क्या करें?

  • तुरंत दवा लेना बंद करें (यदि स्थिति गंभीर हो)
  • डॉक्टर से संपर्क करें
  • लक्षणों को नजरअंदाज न करें
  • अस्पताल जाने में देर न करें

जागरूकता ही बचाव है

दवाओं के साइड इफेक्ट्स से बचने का सबसे अच्छा तरीका है—जागरूकता। यदि लोग सही जानकारी के साथ दवाओं का उपयोग करें, तो कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

जागरूकता के लिए कदम:

  • स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा को बढ़ावा देना
  • दवाओं के बारे में सही जानकारी देना
  • मेडिकल स्टोर्स पर बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा देने पर रोक
  • लोगों को स्वयं दवा लेने से बचने के लिए प्रेरित करना

रिसर्च : दवाएं बीमारी को ठीक नहीं करती, केवल मेंटेंन करती है, कभी-कभी जीवन के लिए खतरा बन सकती है  

एक रिसर्च में सामने आया है कि दवाएं जीवनरक्षक होती हैं, इस बात की कोई गारंटी नहीं होती। क्योंकि मेडिसिन केवल बीमारी को मेंटेंन करती है। पूरी तरह ठीक नहीं करती। कई बार तो मेडिसिन जीवन के लिए खतरा भी बन सकती है। क्योंकि मेडिसिन के खतरे कई बार इतने अधिक होते हैं कि फिर जीवन से जा सकते हैं या जीवन भर दर्द मिल सकता है। दवाएं धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं और कई बार गंभीर बीमारियों का कारण बन जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि हम दवाओं को लेकर सतर्क रहें। उसके साइड इफेक्ट्स के बारे में पूरी जानकारी रखें।

सुरक्षित तरीका : दवा इमरजेंसी के लिए; पंच तत्व आधारित चिकित्सा करें, प्रकृति के करीब रहें  

हमने ऊपर इतनी बातें कही हैं। फिर आम आदमी को क्या करना चाहिए? मेडिसिन केवल इमरजेंसी के लिए होनी चाहिए। आमतौर पर व्यक्ति को प्रकृति के अनुरूप जीवन जीना चाहिए ताकि निरोगी रहें। और अगर बीमार हो भी जाएं तो पंच तत्व यानी आकाश, वायु, जल, अग्नि और धरती पर आधारित आहार-विहार करना चाहिए। कई बार कई बीमारियों का इलाज तो उपवास रखने मात्र से हो जाता है। व्यक्ति जल उपवास भी कर सकता है और एयर फास्टिंग भी कर सकता है। भोजन में सलाद का अधिक उपयोग करना चाहिए। ग्रीन जूस पर जोर देना चाहिए। साथ ही डेयरी-दूध के उत्पाद पर ब्रेक लगा देना चाहिए। रोज 20-30 मिनट सन बॉथ लेना चाहिए। हम इसलिए भी बीमार होते हैं कि हमने सूर्य से दूरी बना ली है। सूर्य तो हमें देख रहा है, मगर हम सूर्य को नहीं देख रहे। अस्त होते सूर्य के सामने पलकें झपकाना चाहिए। रोज नंगी पीठ के बल सन बॉथ लेनी चाहिए। सन बॉथ लेकर हम कई विटामिन की पूर्ति कर सकते हैं। गार्डन में घूमना और सुबह-सुबह प्रकृति के करीब रहना भी हमें स्वस्थ रखने में मदद करता है। नियमित वॉक, योगा, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम भी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। कुल मिलाकर प्रकृति के करीब रहकर हम ना केवल निरोगी रह सकते हैं, वरन प्रकृति के अनुरूप चिकित्सा अपनाकर हम बिना साइड इफैक्ट के अपनी बीमारियों को बाय-बाय कर सकते हैं। डॉ. मदन मोदी तो यहां तक कहते हैं कि हमारी रसोई में ही कई बीमारियों का हल छुपा है। डॉ. मदन मोदी के शब्दों में हम भोजन में नमक, तेल, घी, शक्कर, मेदा कम कर दें तो बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके साथ ही वे कहते हैं कि हमें किचन में काली मिर्च, लोंग, अचवायन, सोंठ, धनिया, पुदिना आदि जरूर रखना चाहिए। डॉ. मदन मोदी आगे कहते हैं कि डेयरी उत्पादों से बचना चाहिए और जंक फूड बंद कर देने चाहिए। इस तरह हम किचन मैनेजमेंट करके भी कई तरह की बीमारियों से बच भी सकते हैं और बीमारियों का इलाज भी कर सकते हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor