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Sunday, August 23, 2026, 11:27 am

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संगोष्ठी : ‘दुनिया में चल रहे युद्धों के कारण पर्यावरण एवं मानव जाति को खतरा’

संगोष्ठी को घनश्याम डेमोक्रेट, जयनारायण मेघ‌वाल, महेन्द्र कुमार बोस, सी.आर.देपन, एम.आर. परमार, निसार खाँ, जाकिर हुसैन, डॉ. पुखराज गोयल, अब्दुल रहीम सांखला, लालाराम जेलिया, मोहनलाल पारखी और आखिर में आर. के. मेघवाल ने संबोधित किया।

पंकज जांगिड़. जोधपुर 

रेजीडेंसी रोड स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान केन्द्र के गांधी भवन में “दुनिया में चल रहे युद्धों के कारण पर्यावरण एवं मानव जाति पर प्रभाव” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ।

संगोष्ठी को घनश्याम डेमोक्रेट, जयनारायण मेघ‌वाल, महेन्द्र कुमार बोस, सी.आर.देपन, एम.आर. परमार, निसार खाँ, जाकिर हुसैन, डॉ. पुखराज गोयल, अब्दुल रहीम सांखला, लालाराम जेलिया, मोहनलाल पारखी और आखिर में आर. के. मेघवाल ने संबोधित किया। संगोष्टी के अध्यक्ष मंडल में प्रकृति-मानव केन्द्रित जन आन्दोलन के जोधपुर के अध्यक्ष एम.आर. परमार एंव सचिव सांवलाराम ने शिरकत की। संगोष्ठी का संचालन लक्ष्मण लालगुरु ने किया। कविता पाठ शांति चौहान और अशफाक अहमद फौजदार ने किया।

संगोष्ठी में सभी वक्ताओं ने महाशक्तियों खासकर अमेरिका की नीतियों को प्राकृतिक संसाधनों और मानवीय संसाधनों के खिलाफ बताया। युद्धों के खिलाफ जनमत बने और देशों के बीच तनाव समाप्त करने के लिए बातचीत समझोतों एव शांतिपूर्ण तरीकों से विवादों का निपटारा हो ताकि युद्ध गतिविधियों और हथियारों की होड़ रुके।

वर्तमान के युद्ध न केवल पर्यावरण को ज्यादा तेजी से खराब कर रहे है बल्कि पूरी मानव जाति समेत समस्त जीव-जगत के लिए विनाशकारी हालात पैदा कर रहे हैं। आज का युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं हो सकते है। अब युद्ध दो देशों, दो गुटों का ही नहीं बनिक पूरे संसार को तबाही में धकेल सकते हैं, परमाणु युद्ध का खतरा हो सकता है।

महाशक्तियों खासकर अमेरिका, रूस, चीन द्वारा महाशक्तिवाद, प्रभुत्ववाद के लिए युद्धो के जरिए नरसंहार करके मानवीय संकट पैदा किए जा रहे है। पांचों वीटो पॉवर शक्तियों द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेंबली (युएनजीए) को नकारा करार दिया जा रहा है। 24 फरवरी 2022 से रुस द्वारा युक्रेन पर थोपा गया युद्ध, जो अभी भी जारी है तथा इजरायल द्वारा फिलीस्तीनी जनता खासकर गाजापट्टी की तबाही ने पूरी दुनिया की जनता को झकझोर दिया है।

28 फरवरी 2026 को अमेरिका ने इजराईल के साथ सीधे जुड़कर, ईरान पर हमला कर दिया, जिसने 39 दिनों तक तबाही मचाई। फिलहाल सीजफायर है। ईरान पर हमले ने दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं (जो अब एक विश्व कॉरपोरेट व्यवस्था के रूप में क्रियाशील है) को आर्थिक संकट में डाल दिया है। दुनिया के शासकों द्वारा इस संकट का भार दुनिया की जनता पर करों (टेक्सों) का बोझ लादकर और मंहगाई बढ़ाकर किया जा रहा है। युद्धों से दुनिया में विस्थापितों, युद्धों में मरने वाले और भूखे गरीबों की संख्या बढ़ सकती है। युद्धों का दुष्परिणाम दुनिया की जनता भुगत रही है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor