दूध को लेकर महत्वपूर्ण बातें…
1-धर्मजीत सिंह के शब्दों में : मां का दूध उसके बच्चे के लिए आइडियल है। गाय का दूध उसके बछड़े के लिए, भैंस का दूध उसके बछड़े के लिए और बकरी का दूध उसके बच्चे के लिए आइडियल है। कोई भी जानवर दूसरे जानवर का दूध नहीं पीते, केवल मनुष्य ही ऐसा है जो एनिमल का दूध पीता है।
2-प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. मुस्कान सक्सेना के अनुसार : पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार, कृत्रिम गर्भधान, हार्मोनल इंजेक्शन ऑक्सीटोसिन आदि तथा दवाओं का अत्यधिक उपयोग किया जाता है। इससे न केवल पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि इन हार्मोनों और रसायनों के अवशेष दूध के माध्यम से मानव शरीर में भी प्रवेश कर सकते हैं।
3-डॉ. खादर वली के शब्दों में : दूध एनिमल प्रोटीन है। जब इंसान इसे पीता है तो इंसान की बॉडी उसे ऑब्जर्व नहीं कर पाती। इससे ऑटो इम्युन डिजिज और हार्मोन इनबेलेंस हो जाता है। इससे कई तरह की बीमारियां हो जाती है। वे साफ तौर पर कहते हैं कि लोग अगर दूध पीना छोड़ दे तो दुनिया में 50 प्रतिशत अस्पताल ही बंद हो जाए।
4-थैली बंद दूध- सामयिक रिपोर्ट के मुताबिक : थैली बंद दूध चार-पांच दिन पहले तैयार किया जाता है। उसे सुरक्षित रखने के लिए उसमें कैमिकल डाला जाता है। कई विशेषज्ञों के अनुसार थैली बंद दूध स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
5-मीडिया रिपोर्ट के अनुसार : फॉर्म हाउस में गाय-भैंसों को कैद में रखा जाता है। उसे तीन-तीन फुट की रस्सी से बांधकर रखा जाता है। बछड़े को जबरदस्ती मां से अलग कर दूध निकाला जाता है। गाय-भैंस के ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाकर दूध निकाला जाता है ताकि अधिक उत्पादन हो। गाय-भैंस को गंदे स्थान पर रखा जाता है। उसे जो चारा खिलाया जाता है जो केमिकल युक्त होता है। यही नहीं दूध अधिक प्राप्त करने के लिए गाय-भैंस को दवाइयां खिलाई जाती है।
6-शास्त्र-संस्कृति-समर्थक के अनुसार : देसी गाय का दूध पी सकते हैं : शास्त्र, संस्कृति और समर्थकों के अनुसार और कुछ रिपोर्ट के अनुसार देसी गाय का दूध पिया जा सकता है। जब हमारे घर में देसी गाय का हम पालन करते हैं और परंपरागत रूप से उसका पोषण करते हैं तो उस गाय के दूध को हम पी सकते हैं। केवल विदेशी गाय जिसे जर्सी गाय भी कहते हैं का दूध अक्सर स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायी हो सकता है। इस पर भी हम चर्चा करेंगे।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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कभी घर की बुजुर्ग महिलाएं अपनी बहुओं का आशीर्वाद दिया करतीं थी दूधो नहाओ, पूतो फलो…। लेकिन बदलते समय में क्या यह धारणा बदल रही है? अब बेटा-बेटी दोनो को समान महत्व दिया जाने लगा है और जहां तक दूधो नहाओ की बात है तो यह रिपोर्ट एक प्रयास है सच और धारणा का मूल्यांकन करने का…।
दूध परंपरागत रूप से हमारे जीवन का हिस्सा रहा है। दूध को संपूर्ण आहार माना जाता रहा है। यह भी माना जाता रहा है कि दूध पीने से व्यक्ति स्ट्रॉन्ग होता है। दूध में कई तरह के पौष्टिक तत्व होते हैं- यह बात कही जाती रही है। लेकिन आज हम उस सच्चाई पर चर्चा करेंगे जो आज के दौर में उभर कर सामने आई है। कई विशेषज्ञ तो यहां तक कहते हैं कि दूध सफेद जहर है?…आखिर क्यों? ऐसा क्या है कि दूध पीने के लिए मना किया जाता है?
एक्सपर्ट धर्मजीत सिंह कहते हैं कि दूध आइडियल लाइफ माना जाता रहा है, लेकिन देखना होगा दूध आइडियल किसके लिए हैं। मां का दूध उसके बच्चे के लिए आइडियल है। गाय का दूध उसके बछड़े के लिए, भैंस का दूध उसके बछड़े के लिए और बकरी का दूध उसके बच्चे के लिए आइडियल है। लेकिन गाय-भैंस और बकरी का दूध इंसान के लिए आइडियल नहीं है। दुनिया में कोई भी जानवर ऐसा नहीं है जो बड़ा होकर दूध पीता हो। लेकिन मनुष्य ही ऐसा जीव है जो बड़ा होकर भी गाय-भैंस-बकरी और अन्य एनिमल का दूध पीता है। कोई भी पशु दूसरे पशु का दूध नहीं पीता है। सभी पशुओं के बच्चे अपने पशु मां का दूध पीते हैं। मनुष्य ही ऐसा जीव है जो गाय-भैंस और बकरी आदि पशुओं का दूध पीता है।
अगर दूध छोड़ दें तो दुनिया में 50 प्रतिशत अस्पताल बंद हो जाए : डॉ. खादर वली
एक इंटरव्यू में डॉ. खादर वली कहते हैं कि गाय का दूध आपके या आपके बच्चों के लिए नहीं हैं। वो आपके कॉफी पीने के लिए नहीं है। गाय का दूध गाय के बच्चों के लिए हैं। डॉ. खादर वली कहते हैं कि दूध प्रकृति में इंसानों के लिए नहीं है। दूध एनिमल प्रोटीन है। जब इंसान इसे पीता है तो इंसान की बॉडी उसे ऑब्जर्व नहीं कर पाती। इससे ऑटो इम्युन डिजिज और हार्मोन इनबेलेंस हो जाता है। इससे कई तरह की बीमारियां हो जाती है। वे साफ तौर पर कहते हैं कि लोग अगर दूध पीना छोड़ दें तो दुनिया में 50 प्रतिशत अस्पताल ही बंद हो जाएं।
दूध और दूध उत्पाद को लेकर डॉ. मुस्कान सक्सेना के विचार :
प्रकृति ही चिकित्सक पुस्तक में डॉ. मुस्कान सक्सेना लिखतीं हैं- वर्तमान समय में डेयरी उद्योग में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उद्देश्य से पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार, कृत्रिम गर्भधान, हार्मोनल इंजेक्शन ऑक्सीटोसिन आदि तथा दवाओं का अत्यधिक उपयोग किया जाता है। इससे न केवल पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि इन हार्मोनों और रसायनों के अवशेष के दूध के माध्यम से मानव शरीर में भी प्रवेश कर सकते हैं।
डॉ. मुस्कान सक्सेना कहतीं हैं कि जन्म के तुरंत बाद मां से अलग कर देना, सीमित स्थानों में बांधकर रखना, प्राकृतिक घास से वंचित रखना तथा दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए हार्मोनल इंजेक्शन देना- ये सभी परिस्थितियां पशु के स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करती है। इससे पशुओं में संक्रमण, थनैला (मास्टाटिस), कमजोरी और समय से पूर्व मृत्यु जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। डॉ. मुस्कान सक्सेना कहतीं हैं कि इसके अतिरिक्त दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट (जैसे कृत्रिम वसा, डिटर्जेंट कास्टिक सोडा, यूरिया और अन्य रासायनिक पदार्थ) भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है। यह पाचन तंत्र, गुर्दे और यकृत पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। मनुष्य केवल एक ऐसा जीव है जो बड़ृा होने पर भी दूध पीता है। दुनिया में कोई भी ऐसा जानवर नहीं है जो बड़ा होने पर दूध पीता है।
डेयरी उत्पादों का स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव : डॉ. मुस्कान सक्सेना कहतीं हैं कि डेयरी उत्पादों में दूध, दही, मक्खन, घी, पनीर और पनीर से बने विभिन्न खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। ये उत्पाद प्रोटीन, कैल्शियम और कुछ आवश्यक विटामिन का स्रोत माने जाते हैं किंतु इनका प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति के शरीर पर समान नहीं होता। मानव शरीर की पाचन क्षमता, उम्र, जीवनशैली और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डेयरी उत्पादों का प्रभाव सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है। प्रकृति ही चिकित्सक पुस्तक में डॉ. मुस्कान सक्सेना कहतीं हैं कि कई व्यक्तियों में दूध और उससे बने पदार्थों को पचाने में कठिनाई होती है, जिसे लैक्टोज असहिष्णुता (Lactose Intolerance) कहा जाता है। ऐसी स्थिति में डेयरी उत्पादों का सेवन करने से पेट दर्द, गैस, दस्त, सूजन और अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। इसके अतिरिक्त डेयरी उत्पादों की भारी प्रकृति के कारण नियमित और अधिक मात्रा में सेवन करने पर पाचन क्रिया मंद हो सकती है, जिससे कब्ज और पेट में भारीपन की शिकायत बढ़ जाती है। डेयरी उत्पादों का अत्यधिक सेवन शरीर में वसा संचय को बढ़ा सकता है, जिससे मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रोल और हृदय संबंधी रोगों का खतरा बढ़ता है। वसायुक्त डेयरी पदार्थों में संतृप्त वसा अधिक मात्रा में पाई जाती है, जो रक्त वाहिकाओं में अवरोध उत्पन्न कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप रक्तचाप असंतुलन और हृदय रोगों की संभावना बढ़ सकती है।
तीन महीने दूध छोड़कर देखें बीमारियां दूर हो जाएंगी : मिस्टर राम वर्मा
अपने अनुभव के आधार पर एक्सपर्ट मिस्टर राम वर्मा लोगों को सलाह देते हैं कि तीन महीने दूध छोड़ कर देखें तो बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। उनका कहना है कि जिन लोगों को मोटापा, साइनस, डायबिटीज, एलर्जी आदि बीमारियां है। वे अगर तीन महीने दूध छोड़ दें तो वे दावा करते हैं कि बीमारियों से छुटकारा मिल जाए। वे एक इंटरव्यू में कहते हैं कि पहले वे खूब दूध पीते थे, लेकिन 2000 के बाद उन्होंने दूध पीना छोड़ दिया और अब वे सबको दूध छोड़ने की सलाह देते हैं।
मांस, दूध, शहद और अंडा, ये चार महा चोरी का धंधा : डॉ. एनके शर्मा
एक्सपर्ट डॉ. एनके शर्मा तो दूध को खतरनाक आहार मानते हैं। उनका कहना है कि वे 40 साल से दूध पर काम कर रहे हैं और दूध को हानिकारक मानते हैं। वे अपनी एक कविता के माध्यम से कहते हैं-
मांस, दूध, शहद और अंडा,
ये चार महा चोरी का धंधा,
जो कोई खाता, इसे बेचता,
है वो वह पशु से बदतर बनता,
कोई न प्राणी किसी की खातिर,
कोई आहार जुटाता है,
मेहनत कर दिन रात बेचारा,
अपने लिए कमाता है,
ये क्रूर बेदर्दी अत्याचारी,
मानव इसे चुराता है,
धिक्कार इसके जीवन पर,
औरों की कमाई जो खाता है,
क्या इन पर अधिकार तुम्हारा,
किस हक से चुराते हो…।
कुछ मीडिया रिपोर्ट : दूध सफेद जहर इसलिए भी हैं
अक्सर दूध के विज्ञापनों में हरे-भरे मैदान और खूबसूरत गायें दिखाई जाती है। लेकिन हकीकत में फार्म हाउस में गंदगी होती है। गायों को आस-पास बांधकर रखा जाता है। तीन फीट की रस्सी में गाय-भैंस की सुबह-शाम-रात गुजर जाती है। उन्हें बड़े ही कठोर तरीके से रखा जाता है। इतना ही नहीं गाय-भैंस को गंदगी में रखा जाता है। जिससे 45 प्रतिशत गाय मस्डाइसस की शिकार हो जाती है। ऐसे में इस प्रकार की गाय का दूध आदमी के लिए घातक होता है। गाय-भैंस का दूध अधिक उत्पादन के लिए उन्हें ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाया जाता है। इससे गाय-भैंस जबरन हीट में आ जाती है और दूध का उत्पादन बढ़ जाता है। ऐसा दूध इंसान के स्वास्थ्य के लिए घातक होता है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तरह से दूध उत्पादन के तरीके अपनाए जाते हैं उससे निकलने वाला दूध एक स्टेडियम को भर सकता है। इंडिया इसलिए भी लार्जेस्ट दूध उत्पादन वाला देश है क्योंकि यहां फार्म हाउस में जिस तरह से पशुओं को रखा जाता है और दूध निकालने के लिए जिस तरह के कृत्रिम तरीके अपनाए जाते हैं, उससे दूध सफेद जहर से अधिक कुछ नहीं है। कई बार गाय-भैंस का बछड़ा मर जाता है तो उसे भ्रम में रखकर दूध निकाला जाता है, इससे भी गाय-भैंस की आत्मा तड़पती है। यह दूध इंसान के लिए घातक होता है।
मत यह भी : थैली बंद दूध कभी ना पिएं :
एक मत यह भी है कि थैली बंद दूध कभी भी नहीं पीना चाहिए। क्योंकि यह दूध दूध चार-पांच दिन पहले तैयार होता है। इसे सुरक्षित रखने के लिए इसमें कैमिकल डाला जाता है। पैकिंग में रखा दूध जहर के समान होता है। कई विशेषज्ञ थैली बंद दूध के धुर विरोधी हैं।
शास्त्र, संस्कृति और समर्थकों के तर्क : देसी गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
इस बीच शास्त्रों, संस्कृति और समर्थकों की बात करें तो देसी गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इसलिए देसी गाय का दूध पी सकते हैं।
- देसी गाय के प्रकार
- गिर (Gir)
- साहीवाल (Sahiwal)
- थारपारकर (Tharparkar)
- राठी (Rathi)
- कांकरेज (Kankrej)
- हरियाणा (Hariana)
- ओंगोल (Ongole)
- देवनी (Deoni)
- लाल सिंधी (Red Sindhi)
- मालवी (Malvi)
देसी गाय के दूध की विशेषताएं
- A2 प्रकार का दूध (बहुत महत्वपूर्ण)
- पचाने में आसान
- इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक
- दिल और दिमाग के लिए बेहतर माना जाता है
- घी और औषधीय उपयोग में श्रेष्ठ
- हल्का पीला रंग (बीटा-कैरोटीन की वजह से)
इसलिए देसी गाय का दूध “औषधीय गुणों वाला” माना जाता है।
- विदेशी गाय के प्रकार
- होल्सटीन फ्रिज़ियन (Holstein Friesian – HF)
- जर्सी (Jersey)
- ब्राउन स्विस (Brown Swiss)
- गुएर्नसे (Guernsey)
- एयरशायर (Ayrshire)
विदेशी गाय के दूध की विशेषताएँ
- A1 प्रकार का दूध
- दूध की मात्रा ज्यादा होती है
- फैट प्रतिशत अक्सर कम या मध्यम
- रंग सफेद होता है
- जल्दी पचने में कुछ लोगों को समस्या हो सकती है
- स्वास्थ्य की दृष्टि से इस प्रकार की गाय का दूध कम उपयोगी माना जाता है।
- भारत में इस प्रकार के दूध का लोग उपयोग अधिक करने लगे हैं। विशेषज्ञ इससे बचने की सलाह देते हैं।
व्यावसायिक डेयरी में इनका उपयोग ज्यादा होता है क्योंकि ये अधिक दूध देती हैं।
क्या करें और क्या ना करें : यह रिपोर्ट सचेत करती है, डराती नहीं
ऊपर इतनी बातें कही गई है। सारी बातें विशेषज्ञों के मुताबिक कही गई है। हम पाठकों को किसी प्रकार के भ्रम में नहीं रखते और ना ही डरा रहे हैं। आखिर क्या करें और क्या ना करें। उचित तो यही होगा कि जहां तक हो दूध से बचा जाए। फिर भी देसी गाय का दूध पिया जा सकता है। आमतौर पर लोग घरों में देसी गाय का पालन करते हैं। इस प्रकार की घरों में जो देसी गाय का पालन और पोषण परंपरागत रूप से किया जाता है, उसका दूध पिया जा सकता है। हमारे शास्त्र, संस्कृति और कई समर्थक देसी गाय के दूध का उपयोग करने की सलाह देते हैं। विदेशी गाय का दूध का उपयोग करने से बचने की सलाह दी गई है।









