जहां किताबें मुस्कुराती हैं, वहां भविष्य खिलखिलाता है
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
बचपन जब शिक्षा का दामन थामता है तब उठती हैं उम्मीदें…तब समाज में बदलाव की नई इबारत लिखी जाती है। जोधपुर की कच्ची और वंचित बस्तियों में ऐसा ही परिवर्तनकारी कार्य कर रही है “श्री माधव सेवा समिति”। वर्ष 2012-13 से समिति द्वारा संचालित निःशुल्क संस्कार केन्द्र और विद्यालय आज केवल पढ़ाई के स्थान नहीं रहे, बल्कि वे शिक्षा, स्वावलंबन, संस्कृति, सेवा, सृजन और संस्कार के जीवंत केंद्र बन चुके हैं।
जहां कभी बच्चों के हाथों में मजदूरी की विवशता थी, वहां आज किताबें हैं। जहां निराशा का अंधेरा था, वहां अब सपनों की रोशनी है। जहां सामाजिक उपेक्षा थी, वहां अब आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का संचार हो रहा है। यही कारण है कि इन संस्कार केन्द्रों को लोग अब “उम्मीद के विद्यालय” और “संस्कारों के दीप” कहने लगे हैं।
समिति के सह सचिव बाली सिंह का मानना है कि “एक संस्कार केन्द्र केवल बच्चों को पढ़ाना नहीं सिखाता, बल्कि जीवन जीना सिखाता है।” यही सोच इन केन्द्रों की आत्मा बन चुकी है।
शिक्षा ही नहीं, जीवन का पाठ पढ़ा रहे हैं संस्कार केन्द्र
श्री माधव सेवा समिति द्वारा संचालित संस्कार केन्द्रों में बच्चों को केवल अक्षर ज्ञान नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें जीवन मूल्यों से भी जोड़ा जाता है। यहां बच्चों को अनुशासन, स्वच्छता, भारतीय संस्कृति, नैतिकता, सेवा भावना और आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
समिति का उद्देश्य केवल परीक्षा में अंक दिलाना नहीं, बल्कि बच्चों को ऐसा नागरिक बनाना है जो समाज के प्रति संवेदनशील हो और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सके। संस्कार केन्द्रों में नियमित रूप से प्रार्थना, योग, राष्ट्रभक्ति गीत, प्रेरक प्रसंग, सांस्कृतिक गतिविधियां और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनमें नेतृत्व क्षमता भी विकसित हो रही है।
इन केन्द्रों में पढ़ने वाले कई बच्चे अब उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं। कुछ ने प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है, तो कई बच्चे अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कौशल आधारित कार्यों की ओर अग्रसर हैं।
“संस्कार केन्द्र” : शिक्षा से स्वाभिमान तक का सफर
आज समाज में सबसे बड़ी आवश्यकता केवल रोजगार नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त शिक्षा की है। श्री माधव सेवा समिति ने इस दिशा में अनूठी पहल की है। इन केन्द्रों में बच्चों को यह सिखाया जाता है कि जीवन केवल स्वयं के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी होता है। यहां “मैं” से “हम” की यात्रा कराई जाती है।
कच्ची बस्तियों में रहने वाले अनेक बच्चों के लिए ये केन्द्र किसी वरदान से कम नहीं हैं। जिन परिवारों के पास निजी विद्यालयों की फीस देने की क्षमता नहीं है, उनके बच्चों को यहां शिक्षा और मार्गदर्शन मिल रहा है। समिति का प्रयास है कि कोई भी बच्चा केवल गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। यही कारण है कि समाज के विभिन्न वर्गों से लोग अब इस मुहिम से जुड़ने लगे हैं।
शिक्षा के साथ संस्कृति का संरक्षण
आज आधुनिकता की दौड़ में संस्कार और संस्कृति कहीं पीछे छूटते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे समय में श्री माधव सेवा समिति के संस्कार केन्द्र भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों को जीवित रखने का कार्य भी कर रहे हैं। बच्चों को भारतीय त्योहारों का महत्व बताया जाता है। उन्हें पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ, बेटी शिक्षा, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव जैसे विषयों पर जागरूक किया जाता है। समिति का मानना है कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसमें संस्कृति और संवेदनशीलता का समावेश हो। यही कारण है कि इन केन्द्रों में “ज्ञान” के साथ “गुण” भी विकसित किए जा रहे हैं।
सेवा से सृजन तक : बदल रही हैं बस्तियों की तस्वीर
कई कच्ची बस्तियों में पहले शिक्षा का वातावरण लगभग नहीं था। बच्चे दिनभर इधर-उधर घूमते थे या छोटे-मोटे कामों में लग जाते थे। लेकिन जब वहां संस्कार केन्द्र शुरू हुए तो धीरे-धीरे वातावरण बदलने लगा। अब बच्चे नियमित पढ़ाई कर रहे हैं। अभिभावकों में भी शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। कई परिवारों ने बाल श्रम छोड़कर बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजना शुरू किया है। इन केन्द्रों ने समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। यह केवल एक शैक्षणिक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की यात्रा बन चुका है।
आर्थिक सहयोग की कमी बनी चुनौती
समिति द्वारा संचालित इन केन्द्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संसाधनों की है। सह सचिव बाली सिंह ने बताया कि कई बार आर्थिक सहयोग के अभाव में कुछ स्थानों पर कार्य रोकना भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों का विस्तार तभी संभव है जब समाज का सहयोग निरंतर मिलता रहे। वर्तमान समय में एक संस्कार केन्द्र के संचालन पर लगभग 4000 रुपए मासिक खर्च आता है, जबकि एक विद्यालय पर औसतन 7000 रुपए प्रतिमाह व्यय होता है। समिति ने समाज के भामाशाहों, उद्योगपतियों, सामाजिक संस्थाओं और सेवा भाव रखने वाले परिवारों से अपील की है कि वे एक संस्कार केन्द्र गोद लेकर बच्चों के भविष्य निर्माण में सहभागी बनें।
“एक केन्द्र गोद लें, अनेक भविष्य संवारें”
समिति की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायी बनती जा रही है। कोई भी संस्था, परिवार या व्यक्ति अपने नाम से एक संस्कार केन्द्र संचालित कराने में सहयोग कर सकता है। इससे न केवल शिक्षा का दीप जलता है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की श्रृंखला भी आगे बढ़ती है। बाली सिंह ने बताया कि सहयोग करने वाले परिवार या संस्था के नाम से संस्कार केन्द्र संचालित किया जाएगा, जिससे समाज सेवा का यह कार्य सम्मान और सहभागिता के साथ आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि “जब समाज शिक्षा के लिए हाथ बढ़ाता है, तब पीढ़ियां संवरती हैं।”
कर मुक्त सहयोग से बढ़ेगा सेवा का दायरा
समिति को दिया गया आर्थिक सहयोग आयकर अधिनियम की धारा 80G के अंतर्गत कर मुक्त है। इससे सेवा कार्यों में सहयोग करने वाले दानदाताओं को भी राहत मिलती है और समाजहित के कार्यों को गति मिलती है। समिति ने अपील की है कि सहयोग राशि जमा करने के पश्चात दानदाता अपना पूरा नाम, पैन नंबर, मोबाइल नंबर और पता उपलब्ध करवाएं ताकि रसीद जारी की जा सके।
संस्कार केन्द्र : जहां सपनों को मिलते हैं पंख
एक छोटे से कमरे में बैठा बच्चा जब पहली बार अपनी कॉपी में “मेरा भारत महान” लिखता है, तब केवल शब्द नहीं लिखे जाते, बल्कि भविष्य की नींव रखी जाती है। संस्कार केन्द्रों की यही सबसे बड़ी उपलब्धि है कि वे बच्चों को केवल पढ़ा नहीं रहे, बल्कि उन्हें सपने देखना भी सिखा रहे हैं। यहां शिक्षा का अर्थ नौकरी तक सीमित नहीं है। यहां शिक्षा का अर्थ है —स्वाभिमान, संस्कार, संवेदना और समाज के प्रति जिम्मेदारी। इन केन्द्रों में पढ़ने वाले बच्चों की आंखों में अब आत्मविश्वास दिखाई देता है। वे डॉक्टर, शिक्षक, सैनिक, कलाकार और अधिकारी बनने के सपने देख रहे हैं।
समाज के सहयोग से ही जलेगा शिक्षा का यह दीप
आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज ऐसे प्रयासों के साथ मजबूती से खड़ा हो। एक छोटी सी सहयोग राशि किसी बच्चे के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। कई बार हम बड़े आयोजनों पर हजारों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन यदि वही राशि किसी संस्कार केन्द्र तक पहुंच जाए तो वह किसी बच्चे के जीवन को अंधेरे से उजाले में ला सकती है। श्री माधव सेवा समिति का यह अभियान बताता है कि सेवा केवल दान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
उम्मीदों का उजाला बनते संस्कार केन्द्र
जोधपुर की कच्ची बस्तियों में संचालित ये संस्कार केन्द्र आज यह संदेश दे रहे हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि शिक्षा और संस्कार का दीप जल जाए तो भविष्य को रोशन होने से कोई नहीं रोक सकता। ये केन्द्र सचमुच “संस्कार से सृजन” और “शिक्षा से परिवर्तन” की जीवंत मिसाल बन चुके हैं। समाज यदि आगे आए, तो यह मुहिम हजारों बच्चों के जीवन में नई सुबह ला सकती है। क्योंकि जहां संस्कार होते हैं, वहां संस्कृति जीवित रहती है; जहां शिक्षा होती है, वहां स्वाभिमान जन्म लेता है; और जहां सेवा होती है, वहां समाज मुस्कुराता है।
सहयोग हेतु बैंक विवरण
Shri Madhav Sewa Samiti
Axis Bank Account : 920010073203038
IFSC : UTIB0003668
Saraswati Nagar Branch, Jodhpur
Shri Madhav Sewa Samiti
AU Bank Account : 2501220875013038
IFSC : AUBL0002208
सहयोग राशि जमा करने के पश्चात पूरा नाम, पैन नंबर, मोबाइल नंबर व पता 9784010900 पर उपलब्ध करवाने का आग्रह किया गया है।
संपर्क :
संजय कुमार
(उपाध्यक्ष, श्री माधव सेवा समिति)
बाली सिंह
(सह सचिव, श्री माधव सेवा समिति)
मोबाइल : 9784010900
Author: Dilip Purohit
Group Editor








