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Thursday, July 9, 2026, 6:38 am

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राइजिंग भास्कर 4th एनिवर्सरी स्टोरी-2 : छितर के इतर का सच…14000 खदाने, लाखों मजदूर, अनियमित आय और बंधुआ मजदूरी को विवश…

सूरसागर की गइराई में उतरें तो मिलेगा कड़वा सच औद्योगिक संस्थानों के नियम कायदे यहां लागू नहीं होते। खान अधिनियम 1952, माइनर मिनरल एक्ट 1955, पेमेंट ऑफ वेजेज ( माइंस रूल्स) एक्ट 1956 एवं राजस्थान माइनर मिनरल एक्ट 1988 के तहत जो अधिकार कानूनन मजदूरों को मिले हैं, उनका लगातार उल्लंघन या उपेक्षा यहां खुले आम देखी जा सकती है। दलित वर्ग के मजदूरों की चिकित्सा एवं उनके बच्चों की शिक्षा आदि का प्रबंध आज भी दूर की कौड़ी है।

मनशाह नायक’. सूरसागर (जोधपुर)

संपर्क :  8890162146

खान मालिकों की चहल कदमी, ट्रकों-ट्रैक्टरों का आवागमन…कटर मशीनों की कर्कश ध्वनियां…धूल-मिट्टी-धुंआ…छैनी-हथौड़ों और संभालों से उलझे मजदूर-लोग…।

ये है जोधपुर का पत्थर उद्योग।
इस बुझे-बुझे से चेहरों वाले ‘पत्थर बाज़ार’ में सूरज की पहली किरण के साथ ही लौट आती है रौनक। मच जाती है चहल पहल…। गूंज उठता है तरह तरह का शोर खदानों में…। खांसियों की आवाज़ों को चीरते हुए…। राजस्थान में लगातार पड़ रहे अकाल के कारण आसपास के गांवों में रहने वाले आदिवासी समुदाय और घुमंतु जातियों के लोग पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े पत्थर उद्योग जोधपुर में रोजगार के लिए आते हैं।

जोधपुर अपनी भाषा, पहनावा तथा खान-पान आदि के साथ अपने विशिष्ट पत्थर के लिए भी जाना जाता है। इसलिए पत्थर उद्योग जोधपुर का एक महत्त्वपूर्ण किन्तु अकुशल श्रमिकों का बड़ा उद्योग है। आधुनिक शब्दावली में आई तकनीक के आधार पर ही इसे उद्योग कहा जा सकता है, लेकिन औद्योगिक संस्थानों के नियम कायदे यहां लागू नहीं होते।

खान अधिनियम 1952, माइनर मिनरल एक्ट 1955, पेमेंट ऑफ वेजेज ( माइंस रूल्स) एक्ट 1956 एवं राजस्थान माइनर मिनरल एक्ट 1988 के तहत जो अधिकार कानूनन मजदूरों को मिले हैं, उनका लगातार उल्लंघन या उपेक्षा यहां खुले आम देखी जा सकती है। दलित वर्ग के मजदूरों की चिकित्सा एवं उनके बच्चों की शिक्षा आदि का प्रबंध आज भी दूर की कौड़ी है। लगभग 14000 खदानों में काम कर रहे लाखों मजदूर ईमानदार संगठनों के अभाव में असुरक्षा के शिकार तो हैं ही साथ ही नियमित आय के अभाव में ठेकेदारों के कर्जदार हो कर बंधुआ मजदूर बनने के लिए भी विवश हैं।

मशीनों की गर्द-कंक्रीट ने मजदूरों के शरीर को छलनी कर दिया, अकाल मौत के हो रहे शिकार…

आश्चर्य है कि जोधपुर नगर के आस पास के क्षेत्रों में रह रहे खान मजदूर नगर के विकास से एकदम अनजान हैं। विकास के नाम पर आई मशीनों की गर्द और कंक्रीट ने इनके शरीर को छलनी ही बनाया है, जिससे वे अकाल मृत्यु के शिकार होते हैं। मजदूरों की इस व्यथा – कथा को उनके बीच जाकर देखा और अनुभव किया जा सकता है।

सवा सौ साल पुराना है पत्थर उद्योग

जोधपुर पत्थर उद्योग का इतिहास सवा सौ साल पुराना है। यह पत्थर उद्योग जिले के सूरसागर स्थित फिदूसर चौपड़, कालीबेरी, जीया बेरी, सोडो की ढाणी, भूरी बेरी, गदिया नाडा, चोखा, अन्नाजी, केरू, 12 मील, बड़ली, पाल, पालड़ी, बालसमंद, मंडोर, बालेसर, शेरगढ़, ठाडिया, जालोडा, कोलूपाबुजी, देचू, लालपुरा, लवा, तिबणा, केतु, भालू, तथा डेरिया-मेरिया आदि क्षेत्रों में दो सौ किलोमीटर के विभिन्न खंडों में फैला हुआ है जो औद्योगिक दृष्टि से सबसे बड़ा उद्योग है।

मजदूरों के बच्चों के भविष्य की अनदेखी 

देखा गया है कि खान मजदूरो में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर कोई चेतना नहीं है। चेतना के अभाव में खान मालिक भी इनका जमकर फायदा उठाते हैं। ये मजदूर सरकारी उपेक्षा के सदैव शिकार रहे हैं। यही वजह है कि खनन क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर आज भी अभिशप्त जीवन जी रहे हैं। जी नहीं रहे हैं वे जीवन काट रहे हैं। जीवन की व्यवस्था जुटाने में ही जीवन खपा रहे हैं।

मजदूरों के नाम पर बने संगठन लूटने का प्लेटफॉर्म बने

मजदूरों के कल्याण के नाम बने दर्जनों संगठन इन्हें ही लूटने और खुद का पोषण करने में ही लगे हैं। ये मजदूर संगठन कल्याण के नाम पर प्रत्येक मजदूर से सलाना सदस्यता के रूप में एक बड़ी रकम वसूल करते ही हैं। इतना ही नहीं, मजदूरों पर जुल्म करने वाले ठेकेदारों से भी साठगांठ करके अपनी तिजोरियों भरने का ही काम करते हैं। यहां काम करने वाले अनेक मजदूर संगठन श्रमिक कल्याण के नाम पर विदेशों से भी बड़ी रकम प्राप्त करते हैं। मजदूर बस्तियों में मजदूर संगठनों के आलीशान ऑफिस और लग्जरी गाड़ियां उनका सारा कच्चा चिट्ठा बयान करते हैं। यहां काम करने वाले मजदूरों में चेतना का भारी अभाव है। यहां अगर किसी मजदूर से पूछा जाए कि अक्ल बड़ी या भैंस…? तो भैंस को भी बड़ा बताया जाता है। उन्हें पेट और प्रजनन के अलावा कुछ ज्ञान नहीं है। बस खाओ पीओ, इंद्रिय तृप्ति करो और अंत में सड़न भरी ज़िंदगी लेकर मर जाओ। यही इनकी ज़िंदगी का गणित है।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor