Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 7:26 am

Thursday, July 9, 2026, 7:26 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

सहयोग टाइम बैंक : “समय बना सहारा, सेवा बनी संस्कार”

सहयोग टाइम बैंक के कार्यक्रम में एक घंटे की सेवा से अपनापन का आह्वान, संवेदनशील समाज पर जोर 

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

9783414079 diliprakhai@gmail.com

समाज में बढ़ते एकाकीपन, विशेषकर बुज़ुर्गों के जीवन में संवेदना और सहारे की आवश्यकता को केंद्र में रखते हुए सहयोग टाइम बैंक द्वारा आयोजित भावनाओं से भरा अदभुत आयोजन शनिवार सायं 4 बजे सरदारपुरा स्थित मोटर मर्चेंट एसोसिएशन हॉल परिसर में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ।

“हम शोर नहीं करते… सेवा करते हैं” के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल उपस्थित जनसमूह को भावनात्मक रूप से झकझोरा, बल्कि समाज सेवा की एक नई दिशा का भी संदेश दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दानवीर, समाजरत्न श्याम एस. कुम्भट ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के दौर में जब रिश्ते औपचारिक होते जा रहे हैं और परिवारों के बीच दूरी बढ़ती जा रही है, ऐसे समय में “सहयोग टाइम बैंक” जैसी पहल किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह केवल सेवा का मंच नहीं, बल्कि टूटते सामाजिक ताने-बाने को जोड़ने का माध्यम है।

इस अवसर पर पर आगंतुक सभी विशिष्ट अतिथियों का परंपरागत तरीके से साफा और माल्यार्पण से बहुमान किया गया। अपने उद्बोधन में आशा केयर सोसायटी के प्रणेता एवं एसएन मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि आज समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों की नहीं, बल्कि संवेदनाओं की है। माथुर ने बताया कि हमारे पास सब कुछ है, लेकिन समय देने की भावना कहीं पीछे छूटती जा रही है। सहयोग टाइम बैंक इस खोई हुई संवेदना को पुनर्जीवित करने का सशक्त माध्यम है।

इस अवसर पर दिव्यांग़ता के क्षेत्र में कार्यरत सक्षम संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री चन्द्रशेखर ने कहा कि जब कोई बुज़ुर्ग जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुँचता है, तब उसे सबसे अधिक आवश्यकता होती है-साथ की, संवाद की और सम्मान की। करीब दो घंटे चले इस अदभुत कार्यक्रम में शहर के नामचीन समाज सेवी सुरेश राठी ने कहा कि यहां दिया गया एक-एक घंटा केवल समय नहीं, बल्कि किसी के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और अपनत्व का संचार करता है। इस मौके समारोह के मुख्य अतिथि श्याम एस कुम्भट के व्यक्तित्व एवं उनके कृतित्व पर अनबुझे पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए अनुबंध वृद्धजन की संस्थापिका श्रीमती अनुराधा आडवाणी ने बताया कि सहयोग टाइम बैंक के चलाए जा रहे प्रकल्प को एक संस्था न समझें, बल्कि इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। इसके साथ ही श्रीमती आडवानी ने कहा कि जब हम किसी के पास बैठते हैं, उसकी बातें सुनते हैं, तो हम केवल सेवा नहीं करते-हम मानवता को जीवित रखते हैं। श्रोता की ओर से पूछे गए सवाल के प्रत्युत्तर में श्रीमती आडवानी ने कहा कि आने वाले समय में यह पहल एक सामाजिक क्रांति का रूप ले सकती है। उनके इन विचारों पर सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। सहयोग टाइम बैंक के संस्थापक रवि सुराणा ने सहयोग टाइम बैंक की कार्यप्रणाली, उद्देश्य एवं सेवाओं का विस्तृत एवं सरल वर्णन किया। सुराणा ने बताया कि यह एक अनूठी व्यवस्था है, जहां धन का नहीं बल्कि “समय” का आदान-प्रदान होता है।

जिसमें प्रत्येक सदस्य का एक व्यक्तिगत “टाइम अकाउंट” होता है, जिसमें सेवा के घंटे जमा होते हैं और आवश्यकता पड़ने पर वही सदस्य इन घंटों का उपयोग सेवा प्राप्त करने में कर सकता है। यह व्यवस्था पूर्णतः पारदर्शी, सम्मानजनक और विश्वास पर आधारित है, जिसमें हर सदस्य समान है और हर एक घंटे का मूल्य बराबर है।

इस दौरान संस्था द्वारा बुज़ुर्गों के लिए दी जाने वाली सेवाओं-जैसे घर पर साथ देना, अस्पताल या डॉक्टर के पास ले जाना, भावनात्मक संबल प्रदान करना तथा दैनिक आवश्यकताओं में सहयोग-के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम के संचालन के दौरान समाजसेवी एवं निर्यातक मनीष मेहता ने कहा कि इन सेवाओं का उद्देश्य केवल सहायता करना नहीं, बल्कि बुज़ुर्गों के जीवन में आत्मसम्मान और अपनत्व को पुनः स्थापित करना है। इस मौके पर आशा केयर सोसायटी एवं सहयोग टाइम बैंक के कॉलोब्रेशन में एक पोस्टर जारी किया जिसका विमोचन समारोह के मुख्य अतिथि श्याम एस कुम्भट ने किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सदस्यों ने जिज्ञासावश कई प्रश्न भी पूछे, जिनका समाधान सहज और स्पष्ट तरीके से संस्थापक रवि सुराणा ने दिया। कार्यक्रम में शिरकत करने वाले समाजसेवी संदीप मेहता, नरेश सुराणा और श्रीमती शोभा आंचलिया ने सफल रहे आयोजन को लेकर कहा कि लोग इस नई अवधारणा को समझने और उससे जुड़ने के लिए उत्साहित हैं।

इस अवसर पर समाजसेवी, बिल्डर नरेश सुराणा, अमित भंडारी, नरेंद्र कच्छवाह, अनिल पुरोहित, डॉ. हरीश अग्रवाल, विजय अग्रवाल, सिद्धार्थ मेहता, महेन्द्र सोनी, श्रीमती कंचन सर्राफ, युवा समाजसेवी राजेश सिंघवी, विशाल हिंदुस्तानी, धीरेन्द्र सिंघवी, राजेंद्र मोहनोत सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के अंत में श्रीमती शोभा आंचलिया ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह पहल केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक आंदोलन है, जो समाज में सेवा, संवेदना और सहयोग की नई संस्कृति स्थापित करेगा। इस अवसर पर पिछले माह शहर के विभिन्न बुजुर्गों को समय की सेवा देने वाले पंद्रह सेवादारों को प्रमाण पत्र देकर उनका बहुमान किया गया। कार्यक्रम समाप्ति पश्चात् मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान शहर के भामाशाह एवं मुख्य अतिथि श्याम एस कुम्भट ने कहा कि सहयोग टाइम बैंक केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक ऐसी संवेदनशील पहल है जो ‘समय’ को ‘सेवा’ में बदलकर समाज को जोड़ने का कार्य कर रही है-और यदि यह कारवां इसी भावना से आगे बढ़ता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब कोई भी बुज़ुर्ग अपने आप को अकेला महसूस नहीं करेगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor