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Thursday, July 9, 2026, 12:48 am

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लघु कथा : गरीब कौन, कहानीकार- नीलम व्यास ‘स्वयंसिद्धा’

लघुकथा :  गरीब कौन?

कथाकार : नीलम व्यास ‘स्वयंसिद्धा’

बेटी को मां ने बुलाया, खूब आवभगत की, उपहार भी दिए, बरसों बाद मायके वालों के व्यवहार में गर्मजोशी देख बेटी अभिभूत हुई। दूसरे दिन मां ने कुछ कागजो पर हस्ताक्षर करने को कहा। रोते रोते बोली तेरे भाई के नाम सारी जायदाद कर रही हूं। तू भी अपने हिस्से को देने का हस्ताक्षर कर दे।अगर नहीं किए तो जिंदगी भर भाई से संबंध टूट जाएंगे, समाज में तू ही बुरी लगेगी।

बेटी ने इस इशारे भरी धमकी को सुन चुपचाप हस्ताक्षर कर दिए। मां, भाई भाभी के चेहरे की रौनक देख बहन मुस्काई। गरीब बेटी ने करोड़ों के पैतृक सम्पत्ति के हिस्से को सहज ही भाई को दे दिया। निस्वार्थ, निश्छल मन से, बदलें में 5, 7 हजार के उपहार लेकर बेटी विदा हुई। भरे मन से, यह सोचती हुई कि वास्तव में गरीब कौन हैं। वह जिसने बिना लोभ अपना हिस्सा दे दिया या वे करोड़पति मायके वाले, जिन्होंने करोड़ों के बदले चंद लाख देने में भी कंजूसी की। मन से गरीब जो थे बेचारे और स्वाभिमान भरी बेटी अपने घर को लौट गई। देने के सुख को महसूस करती हुई।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor