रिफाइंड ऑयल, मैदा, शुगर और केमिकल्स पर बड़ा खुलासा, विशेषज्ञों ने कहा—“खाने से पहले पैकेट पलटकर जरूर पढ़ें”
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079. diliprakhai@gmail.com
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैकेज्ड फूड हमारे घरों का स्थायी हिस्सा बन चुका है। सुबह की चाय के साथ बिस्किट, शाम को नमकीन, बच्चों के लिए चिप्स और इंस्टेंट स्नैक्स—यह सब आधुनिक जीवनशैली की सामान्य तस्वीर बन चुके हैं। लेकिन क्या कभी किसी ने यह जानने की कोशिश की कि इन चमकदार पैकेटों के भीतर आखिर क्या छिपा है?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री को लेकर कई चौंकाने वाले सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि बाजार में बिकने वाले कई लोकप्रिय नमकीन, बिस्किट और स्नैक्स ऐसे तत्वों से भरे हुए हैं, जो धीरे-धीरे लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वीडियो में सबसे बड़ा जोर इस बात पर दिया गया कि उपभोक्ता अक्सर पैकेट के सामने लिखे आकर्षक दावों को देखते हैं, लेकिन पीछे लिखी “Ingredients List” यानी सामग्री सूची को पढ़ना जरूरी नहीं समझते।
“पैकेट पलटिए और सच्चाई जानिए”
वीडियो की शुरुआत एक परिवार के साथ होती है, जिसमें एक लोकप्रिय नमकीन के पैकेट को लेकर प्रयोग किया जाता है। परिवार के सदस्यों से पूछा जाता है कि एक किलो नमकीन में कितना तेल हो सकता है। अधिकांश लोगों का अनुमान 5 से 10 प्रतिशत के बीच था, लेकिन जब पैकेट के पीछे लिखी सामग्री सूची के आधार पर गणना की गई, तो पता चला कि लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा तेल का हो सकता है।
वीडियो में बताया गया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के अनुसार हर कंपनी को पैकेट के पीछे सामग्री सूची देना अनिवार्य है। इसमें सामग्री उसी क्रम में लिखी जाती है, जिस अनुपात में वह उत्पाद में मौजूद होती है। यानी जो सामग्री सबसे ज्यादा है, उसका नाम सबसे पहले लिखा जाता है।
नमकीन में तेल का खेल
वीडियो में दिखाया गया कि नमकीन के एक पैकेट में लगभग 1.8 कप तेल हो सकता है। यह सुनकर परिवार के सदस्य भी चौंक जाते हैं। वीडियो में दावा किया गया कि बाजार में मिलने वाले अधिकांश स्नैक्स रिफाइंड ऑयल में बनाए जाते हैं, जो लंबे समय तक सेवन करने पर शरीर में ट्रांस फैट और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकते हैं।
हकीकत जानिए : रिफाइंड ऑयल कैसे बनता है?
- बीजों और मेवों से तेल निकालने के लिए हेक्सेन जैसे रसायनों का उपयोग
- अत्यधिक तापमान पर प्रोसेसिंग
- पोषक तत्वों का नष्ट होना
- ट्रांस फैट का निर्माण
- रंग साफ करने के लिए ब्लीचिंग एजेंट
- दुर्गंध हटाने के लिए डियोडोराइजेशन प्रक्रिया
वीडियो में यह भी दावा किया गया कि रिफाइंड ऑयल के अत्यधिक सेवन से धमनियों में प्लाक जम सकता है, जिससे हृदय रोग और ब्लॉकेज का खतरा बढ़ सकता है।
“सिर्फ 20 रुपए का स्नैक नहीं, स्वास्थ्य पर भारी कीमत”
वीडियो में एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन 100 ग्राम नमकीन खाता है, तो वह लगभग 3 चम्मच तेल का सेवन कर सकता है। यह मात्रा महीने और साल भर में कई लीटर तेल के बराबर हो सकती है।
इसके बाद वीडियो में मोटापा, पेट निकलना, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग जैसे जोखिमों का उल्लेख किया गया। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, जीवनशैली और कुल आहार का असर अलग-अलग होता है, लेकिन अत्यधिक प्रोसेस्ड और तले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है।
बिस्किट भी नहीं हैं “निर्दोष”
नमकीन के बाद वीडियो में तथाकथित “हाई फाइबर” और “होल व्हीट” बिस्किटों की जांच की जाती है। पैकेट पर “Digestive” और “Packed with the power of whole wheat” जैसे दावे लिखे होते हैं, लेकिन जब सामग्री सूची पढ़ी जाती है तो सबसे पहला नाम “Refined Wheat Flour” यानी मैदा का निकलता है।
वीडियो के अनुसार:
- लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा मैदा का था
- केवल 15 प्रतिशत होल व्हीट फ्लोर
- 68 ग्राम तक शुगर
- कई प्रकार के प्रिजर्वेटिव और रेजिंग एजेंट
मैदा को बताया गया “गट ग्लू”
वीडियो में दावा किया गया कि मैदा बनाने की प्रक्रिया में गेहूं की बाहरी परत यानी ब्रान को हटा दिया जाता है, जिसमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं। फाइबर हटने के कारण पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
वीडियो में मैदा को “Glue for the Gut” यानी “आंतों का गोंद” तक कहा गया। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञ इस तरह की शब्दावली को अतिशयोक्ति मान सकते हैं, लेकिन यह जरूर सच है कि अधिक फाइबर वाला भोजन पाचन के लिए बेहतर माना जाता है।
सावधान! : पैकेट पर क्या देखें?
Ingredients List
Added Sugar
Refined Oil
Trans Fat
Sodium की मात्रा
Whole Wheat प्रतिशत
Artificial Preservatives
शुगर का छिपा खतरा
वीडियो में बिस्किट के भीतर मौजूद चीनी को चीनी के क्यूब्स के जरिए दिखाया गया। एक छोटे पैकेट में करीब 20 शुगर क्यूब्स के बराबर चीनी होने का दावा किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि अत्यधिक चीनी का सेवन:
- मोटापा
- डायबिटीज
- फैटी लिवर
- दांतों की समस्या
- मेटाबॉलिक डिसऑर्डर
जैसी परेशानियों को बढ़ा सकता है।
“हेल्दी” दावों पर उठे सवाल
वीडियो में खाद्य कंपनियों पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि:
- चिप्स पैकेट बाहर से आकर्षक लेकिन अंदर तेल से भरपूर
- चॉकलेट स्प्रेड में हेज़लनट से ज्यादा शुगर
- एनर्जी ड्रिंक में ऊर्जा से ज्यादा केमिकल
- इंस्टेंट नूडल्स में मैदा और प्रिजर्वेटिव
वीडियो ने यह सवाल उठाया कि क्या कंपनियां “हेल्दी”, “डाइजेस्टिव”, “होल व्हीट” और “एनर्जी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल मार्केटिंग के लिए कर रही हैं?
“सबसे भरोसेमंद ब्रांड—मदर नेचर”
वीडियो के अंत में दर्शकों को यह जानने की उत्सुकता रहती है कि आखिर दुनिया का सबसे हेल्दी फूड ब्रांड कौन-सा है। अंत में जवाब दिया जाता है—“Mother Nature” यानी प्रकृति।
वीडियो में कहा गया कि:
- फल
- सब्जियां
- अनाज
- मेवे
- बीज
प्रकृति के सबसे शुद्ध उत्पाद हैं। इनमें प्लास्टिक पैकेजिंग नहीं होती और ये सीधे प्रकृति से आते हैं।
सुझाव : क्या करें, क्या नहीं?
क्या करें:
ताजा भोजन खाएं
फल-सब्जियां बढ़ाएं
पैकेट पढ़ने की आदत डालें
कम प्रोसेस्ड भोजन चुनें
क्या न करें:
रोजाना तले स्नैक्स
अत्यधिक मीठे बिस्किट
केवल विज्ञापन देखकर खरीदारी
“हेल्दी” शब्द पर आंख बंद कर भरोसा
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार वीडियो में कई बातें जागरूकता बढ़ाने वाली हैं, लेकिन हर दावे को वैज्ञानिक संतुलन के साथ समझना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है:
- सभी पैकेज्ड फूड पूरी तरह खराब नहीं होते
- मात्रा और आवृत्ति सबसे महत्वपूर्ण है
- संतुलित आहार जरूरी है
- लेबल पढ़ना अच्छी आदत है
- कम ट्रांस फैट और कम शुगर वाले विकल्प चुने जा सकते हैं
बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
आज के दौर में पैकेज्ड स्नैक्स का सबसे बड़ा बाजार बच्चे हैं। रंग-बिरंगे पैकेट, कार्टून कैरेक्टर और विज्ञापन बच्चों को आकर्षित करते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि बचपन से ही बच्चों को अत्यधिक नमक, शुगर और फैट वाले खाद्य पदार्थों की आदत लग जाए, तो भविष्य में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
बाजार, मुनाफा और उपभोक्ता
वीडियो ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया—क्या कंपनियां सस्ते कच्चे माल का उपयोग करके अधिक मुनाफा कमाने की कोशिश करती हैं? रिफाइंड ऑयल, मैदा और शुगर अपेक्षाकृत सस्ते तत्व माने जाते हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली कंपनियां इनका इस्तेमाल ज्यादा करती हैं। हालांकि उद्योग जगत का तर्क है कि सभी उत्पाद निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार बनाए जाते हैं।
उपभोक्ता जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
वीडियो का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही था कि लोग आंख बंद करके किसी भी पैकेट पर लिखे “हेल्दी” दावों पर भरोसा न करें। बल्कि:
- सामग्री सूची पढ़ें
- पोषण तालिका देखें
- ट्रांस फैट और शुगर की मात्रा समझें
- बच्चों के स्नैक्स पर विशेष ध्यान दें
बदलती जीवनशैली में बड़ा सवाल
आज जब हर घर में पैकेज्ड फूड पहुंच चुका है, तब यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण हो गया है कि सुविधा और स्वास्थ्य के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आधुनिक जीवनशैली में पूरी तरह पैकेज्ड फूड छोड़ना शायद हर किसी के लिए संभव न हो, लेकिन जागरूक उपभोक्ता बनना जरूर संभव है।
वीडियो का संदेश स्पष्ट था—“खरीदने से पहले पैकेट पलटिए और सच्चाई जानिए।” और शायद यही संदेश आज के दौर में सबसे ज्यादा जरूरी भी है।




