सुनील वर्मा. जोधपुर
राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर दमयंती कच्छवाह, पूर्व प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव आकाशवाणी जयपुर /जोधपुर ने अपनी भावनाएं व्यक्त की है। उनकी भावनाएं हूबहू प्रकाशित की जा रही है।
अपांरे देस रो सबसूं बड़ो न्यायालय सुप्रीम कोर्ट 12 मई सन 2026 ने एक ऐतिहासिक फैसले में राजस्थान सरकार ने निर्देश दियो है, के राजस्थानी भाषा ने राज्य रे सगळे सरकारी अर निजू स्कूलां में एक विषय रे रूप में पढावण रो बन्दोबस्त करे !
सुप्रीम कोर्ट कनी सुं राजस्थानी भाषा ने मिल्यो संवैधानिक मान सूं. प्रदेस रे वासियां ने धणो गमेज है। जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी जोधपुर
रे तहत राजस्थानी भासा में एम. ए, महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी बीकानेर अर राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर में भी राजस्थानी पाठ्यक्रम संचालित है।
राजस्थानी माणक मासिक पत्रिका रा मुख्य सम्पादक पदम मेहता अर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय रा पूर्व प्रो. डा. कल्याणसिंह शेखावत रे लगोलग प्रयासां रे कारणे आज सोने रो सूरज ऊगियो है। शिक्षा रे छेत्र अर प्रदेस रे जन-जन रे हिवड़े में मायड़ भासा ने मिलिये मान रे कारणे धणो उमाव है। राजस्थानी भासा रो इतिहास घणो पुराणो है। जे अपे निजर घालां तो गद्य अर पद्य रूप में अपांरी मायड़ भासा घणी समृद्ध नींगे आवे । घणे रुतबे वाळी आ मायड़ भासा जिणरे बाबत नैना अर मोटा अठारे वासियां अर. दूजां ने भी मायड़ भासा री जाणकारी मिलेला। अपां सगळां ने अंतस सूं अंजस सूं मायड़ भाषा ने अंगीकार करने ज्ञान रा भागी बणन में पूरे प्रदेश री भलाई है।



