मुख्यमंत्री को राजस्थानी में पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को शीघ्र लागू करने का किया अनुरोध
अब समय आ गया है वर्षों की राजस्थानी भाषा की मान्यता की मांग पर केंद्र सरकार शीघ्र निर्णय लें : गज सिंह
राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करें
सुनील वर्मा. जोधपुर
पूर्व नरेश गज सिंह ने हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार पदम मेहता व जेएनवीयू राजस्थानी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कल्याण सिंह शेखावत द्वारा राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इस फैसले से एक बार फिर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता व राजस्थान की राजभाषा बनने की उम्मीदे बढ़ गई हैं।
पूर्व नरेश गजसिंह ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को राजस्थानी में पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रदेश के राजस्थान वासियों के हित में शीघ्र लागू करने का अनुरोध किया है। उन्होंने लिखा कि आपके शीघ्र लागू करने से मायड़ भाषा राजस्थानी को सम्मान मिलेगा। उन्होंने लिखा कि आपके इन सार्थक प्रयासों से राजस्थान वासियों, विशेषकर शहर व गांव के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल होगा।
उन्होंने लिखा कि मायड़ भाषा को आठवीं अनुसूची में जोड़ने का मार्ग इस फैसले से सरल हो गया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि यह कार्य आपके हाथों से जल्दी से जल्दी हो जावें तो सभी करोड़ों राजस्थानवासियों की मांग पूरी हो जायेगी व आपको इसका श्रेय मिलेगा।
पूर्व नरेश गज सिंह ने कहा कि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की राजस्थानवासियों द्वारा वर्षों से मांग प्रमुखता से की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के करोड़ों लोगों की राजस्थानी भाषा है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार करोड़ों लोग राजस्थानी भाषा बोलते हैं। वर्षों से हर स्तर पर लगातार यह मांग की जा रही है कि राजस्थानी भाषा को मान्यता मिले, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करें, परंतु अभी तक ऐसा नहीं हो सका है।
उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता प्रदेशवासियों का हक है, राजस्थानी भाषा की मान्यता से प्रदेशवासियों का सम्मान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है केंद्र सरकार राजस्थानी भाषा को मान्यता दें, राज्य सरकार इसके लिए पुरजोर व सार्थक प्रयास करें ताकि राजस्थानी भाषा की मान्यता में आने वाली रुकावटें दूर हो सकें, इसका मार्ग प्रशस्त हो सकें। उन्होंने कहा कि हर प्रदेशवासी का यह अधिकार है जो उसे मिलना चाहिए।
राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को शीघ्र लागू करें
पूर्व नरेश गज सिंह ने कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले में राजस्थानी भाषा को बढ़ावा देने के लिए दिए निर्देशों की पूरी तरह समयबद्धता सेे पालना करें व इसे लागू करें। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के यह निर्देश कि राजस्थान सरकार राजस्थानी भाषा को राज्य की सभी सरकारी व निजी स्कूलों में एक विषय के रूप में पढ़ाने की व्यवस्था करें। इसके बाद उच्च शिक्षा में भी राजस्थानी भाषा विषय के रूप में पढ़ाने की व्यवस्था करें। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के जेएनवीयू जोधपुर, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय व राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी विषय एम.ए. स्तर पर पहले ही पढ़ाया जा रहा है जो इसकी और मजबूती व राजस्थानी भाषा को विद्यालयों व कॉलेजों के स्तर पर भी पढ़ाई जाना न्यायोचित है व सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी इसके लिए स्पष्ट निर्देश दे रहा है
1992 में बोट क्लब पर दिया धरना
पूर्व नरेश गज सिंह वर्षों से लगातार विभिन्न समारोह, विभिन्न मंचों, राज्यसभा सदस्य के दौरान वह अन्य अवसरों पर केंद्र व राज्य सरकार स्तर पर लगातार राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर प्रयास करते रहे हैं। लगातार यह मांग कर रहे हैं कि राजस्थानवासियों की भाषा राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता मिले। 1992 में पूर्व नरेश गज सिंह के नेतृत्व में नई दिल्ली के बोट क्लब पर प्रदेश के पक्ष-विपक्ष के जनप्रतिनिधियों, इतिहासकारों, साहित्यकारों, लेखकों, कवियों व विभिन्न संगठनों के लोगों ने धरना दिया था।




