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Thursday, July 9, 2026, 4:09 am

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आयुर्वेद क्षारकर्म विद्कर्म द्वारा सर्जरी से बचाव संभव – कुलगुरू गोविन्द सहाय शुक्ल

क्षार कर्म एवं विद्कर्म विशेषज्ञों ने 400 से अधिक डॉक्टर्स को दिया सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण

पारस शर्मा. जोधपुर

विश्व आयुर्वेद परिषद, चिकित्सक प्रकोष्ठ राजस्थान के प्रदेश प्रभारी एवं आयोजन अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह शेखावत ने बताया कि 22 मई को दो दिवसीय राष्ट्रीय आयुर्वेद कार्यशाला आयोजित हुई। राजकीय वैध दाऊदयाल जोशी आयुर्वेद महाविद्यालय कोटा के धन्वंतरि सभागार मे आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर गोविन्द सहाय शुक्ला ने भगवान धन्वंतरि प्रतिमा समक्ष दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का भव्य सुप्रारंभ किया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त निदेशक कोटा संभाग डॉ अंजना शर्मा, डॉ मृगेंद्र जोशी पूर्व प्रदेशाध्यक्ष विभागीय चिकित्सक संघ, प्राचार्य डॉ नित्यानंद शर्मा तथा अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार शर्मा ने की।

महासचिव डॉ विनोद गौतम ने बताया कि कार्यशाला में देश भर से आए 400 से अधिक चिकित्सकों ने आयुर्वेद की प्राचीन विद्या क्षारकर्म एवं विद्धकर्म का सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण विषय विशेषज्ञ डॉ अनंत ए पांडिया, डॉ अनमोल उत्तम बनसोडे से लिया।

आयोजन अध्यक्ष डॉ निरंजन गौतम ने बताया कि विषय विशेषज्ञ डॉक्टर्स ने विद्दकर्म एवं क्षारकर्म द्वारा जटिल बीमारियों से पीड़ित रोगियों का लाइव उपचार किया। नेजल पोलिप एवं नाक के बढ़े हुए मांस का बिना सर्जरी क्षार कर्म से उपचार, आयुर्वेद की प्राचीन विद्या विद्दकर्म से माइग्रेन, साइटिका, सर्वाइकल, स्लिप डिस्क, नसों का दबाव, फ्रोजन शॉल्डर, टेनिस एल्बो, साइनुसाइटिस, अस्थमा, इनफर्टिलिटी, पीसीओडी, एलोपेसिया, सेरिब्रल पाल्सी, एवीएन एवं अन्य वात व्याधियों के उपचार का प्रशिक्षण चिकित्सकों को दिया गया।

कार्यशाला में प्रदेशाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला चिकित्सकों के कौशल विकास की दृष्टि से नींव का पत्थर सिद्ध होगी। आयोजन सचिव डॉ संजय नागर ने बताया कि कार्यशाला के मुख्य अतिथि आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुर प्रोफेसर गोविन्द सहाय शुक्ल ने अपने संबोधन में कहा कि विश्व आयुर्वेद परिषद , वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद के उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत है। संगठन कार्यशालाओं के माध्यम से निरंतर चिकित्सकों के कौशल विकास और आयुर्वेद के प्रचार प्रसार के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। कुलगुरु ने कहा क्षार कर्म एवं विद्कर्म प्राचीन आशुकारी आयुर्वेद चिकित्सा विद्या है, इस विद्या के प्रयोग से अधिकांश रोगियों को नेजल पोलिप, नाक के बढ़े मांस, एवं विभिन्न न्यूरोजनित विकारों में शल्य चिकित्सा से बचाव संभव होता है। संगठन की कार्यशालाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त कर अनेकों चिकित्सक देश भर में आज रोगियों को बेहतर सेवा प्रदान कर रहे हैं।

कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर महेश व्यास, विद्यार्थी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी डॉ किशोरी लाल शर्मा, विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रदेश प्रभारी डॉ रामतीर्थ शर्मा, चिकित्सक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सह प्रभारी डॉ. बाबू लाल बराला, विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा, संगठन उपाध्यक्ष डॉ. निरंजन गौतम, प्रदेश महासचिव डॉ. विनोद कुमार गौतम, चिकित्सक प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रभारी डॉ. पवन सिंह शेखावत, जयपुर प्रांत संयोजक डॉ. जगदीश राजावत, चितौड़ प्रांत संयोजक डॉ. संजय नागर, जोधपुर प्रांत संयोजक डॉ. रिड़मल सिंह राठौड़, प्रदेश संपर्क प्रमुख डॉ.महेश इन्द्रा, प्रदेश सचिव डॉ. ऋषि तिवाड़ी सहित कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु आयोजन समिति में चित्तौड़ प्रांत के 50 से अधिक संगठन कार्यकर्ताओं की शसक्त टीम ने कार्यशाला की व्यवस्थाओं में अपना अहम योगदान दिया हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor