Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 3:25 am

Thursday, July 9, 2026, 3:25 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

आचार्य प्रतिष्ठा का आह्वान : “10 मिनट खुद को दीजिए, जिंदगी बदलती नजर आएगी”

योग और ध्यान के जरिए मानसिक शांति का संदेश दे रहीं आचार्य प्रतिष्ठा, कहती हैं— “जब दृष्टि बदलती है तो सृष्टि भी बदलने लगती है”

कौन है आचार्य प्रतिष्ठा :आचार्य प्रतिष्ठा योग, ध्यान और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़ी वक्ता एवं प्रशिक्षक हैं। वे मोक्ष तन योगाश्रम से जुड़कर लोगों को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, ध्यान साधना और योग के प्रति जागरूक करती हैं। सोशल मीडिया और यूट्यूब के माध्यम से वे तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश देती हैं।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर 

9783414079 diliprakhai@gmail.com

आज की भागदौड़, तनाव और डिजिटल जीवनशैली के बीच मानसिक शांति लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। लगातार बढ़ते तनाव, अनिद्रा, चिंता और मानसिक थकान के दौर में योग और ध्यान को एक प्रभावी उपाय के रूप में देखा जा रहा है। योग साधना और आध्यात्मिक जागरूकता से जुड़े अपने संदेशों में आचार्य प्रतिष्ठा देशवासियों को नियमित ध्यान और आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती नजर आती हैं।

आचार्य प्रतिष्ठा कहती हैं कि यदि व्यक्ति रोज सिर्फ 10 मिनट खुद को दे दे, तो उसकी सोच, मनःस्थिति और जीवन की दिशा बदल सकती है। उनके अनुसार ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठना नहीं, बल्कि स्वयं से जुड़ने की प्रक्रिया है।

वे लोगों को समझाती हैं कि ध्यान के लिए सबसे पहले शांत वातावरण जरूरी है। ऐसा स्थान जहां शोर, व्यवधान और मानसिक विचलन कम हो। उनका कहना है कि यदि व्यक्ति पूरी चेतना को बाहरी संसार से हटाकर अपने भीतर केंद्रित कर ले, तो मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है।

“अपने शरीर को ढीला छोड़िए, मन खुद शांत होने लगेगा”

बतौर आचार्य प्रतिष्ठा, ध्यान की शुरुआत शरीर को पूरी तरह शिथिल करने से होती है। वे योगाभ्यास करने वालों को जमीन पर योगा मैट बिछाकर लेटने और शरीर के हर हिस्से को धीरे-धीरे रिलैक्स करने की सलाह देती हैं। उनके अनुसार पैरों की उंगलियों से लेकर सिर तक शरीर के प्रत्येक अंग पर ध्यान केंद्रित करने से तनाव कम होने लगता है। वे कहती हैं कि इंसान पूरा दिन शरीर से लगातार काम लेता है, लेकिन उसे आराम देना भूल जाता है। आचार्य प्रतिष्ठा के मुताबिक जब शरीर शिथिल होता है तो मन भी धीरे-धीरे नियंत्रण में आने लगता है।

ध्यान शुरू करने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

शांत और साफ वातावरण चुनें
मोबाइल और अन्य व्यवधान दूर रखें
योगा मैट या जमीन पर अभ्यास करें
शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ें
जल्दबाजी न करें
सांसों पर ध्यान केंद्रित करें

सांसों को बताती हैं ध्यान का सबसे बड़ा माध्यम

आचार्य प्रतिष्ठा देशवासियों को जागरूक करते हुए बताती हैं कि ध्यान के दौरान सांस सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उनके अनुसार सांस को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि केवल उसे महसूस करना चाहिए। वे कहती हैं कि जब व्यक्ति अपनी आती-जाती सांसों का शांत मन से अवलोकन करता है, तो उसका ध्यान वर्तमान क्षण में टिकने लगता है। इससे मन की बेचैनी कम हो सकती है। उनके मुताबिक आधुनिक जीवन में लोग शरीर की आवाज सुनना भूल गए हैं। ध्यान और श्वास अभ्यास व्यक्ति को फिर से स्वयं से जोड़ने का माध्यम बन सकता है।

शरीर के हर अंग को देती हैं विश्राम का संदेश

आचार्य प्रतिष्ठा के ध्यान अभ्यास में शरीर के हर हिस्से को अलग-अलग रिलैक्स करने पर विशेष जोर दिया जाता है। वे पंजों, एड़ियों, घुटनों, जांघों, रीढ़, कंधों, गर्दन और चेहरे तक हर हिस्से को मानसिक रूप से ढीला छोड़ने की बात कहती हैं। उनके अनुसार शरीर में जमा तनाव केवल मानसिक नहीं होता, बल्कि मांसपेशियों में भी जमा होने लगता है। लगातार बैठकर काम करने, मोबाइल और कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने से गर्दन, पीठ और कंधों में जकड़न बढ़ सकती है। वे बताती हैं कि जब व्यक्ति अपने शरीर को सचेत रूप से रिलैक्स करता है तो भीतर ऊर्जा का नया प्रवाह महसूस होने लगता है।

किन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है ध्यान?

  • लगातार तनाव में रहने वाले लोग
  • छात्र और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा
  • ऑफिस में लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारी
  • अनिद्रा या चिंता से जूझ रहे लोग
  • मानसिक शांति की तलाश करने वाले व्यक्ति

“चेहरे की शांति मन की स्थिति बताती है”

आचार्य प्रतिष्ठा कहती हैं कि ध्यान केवल शरीर को नहीं, चेहरे को भी शांत बनाता है। उनके अनुसार जब मन तनावमुक्त होता है तो चेहरे पर स्वाभाविक शांति और सकारात्मक ऊर्जा दिखाई देने लगती है। वे लोगों को आंखों, चेहरे और माथे को भी पूरी तरह रिलैक्स करने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि व्यक्ति के चेहरे पर तनाव की रेखाएं उसके भीतर की बेचैनी को दर्शाती हैं। उनके मुताबिक ध्यान का नियमित अभ्यास व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता को मजबूत कर सकता है।

“मन को नियंत्रित करना ही सबसे बड़ी साधना”

बतौर आचार्य प्रतिष्ठा, ध्यान का सबसे बड़ा उद्देश्य मन को नियंत्रित करना है। वे कहती हैं कि अधिकतर लोग बाहरी परिस्थितियों से परेशान रहते हैं, जबकि वास्तविक समस्या मन के असंतुलन में होती है। उनके अनुसार जब व्यक्ति अपने भीतर स्थिरता महसूस करने लगता है तो नकारात्मक विचारों का प्रभाव कम होने लगता है। वे सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को ध्यान का महत्वपूर्ण परिणाम मानती हैं। आचार्य प्रतिष्ठा कहती हैं कि व्यक्ति को यह महसूस करना चाहिए कि उसके भीतर अपार ऊर्जा और क्षमता मौजूद है।

ध्यान से क्या-क्या लाभ हो सकते हैं?

मानसिक तनाव कम हो सकता है
नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है
एकाग्रता बढ़ सकती है
शरीर को रिलैक्स महसूस हो सकता है
सकारात्मक सोच विकसित हो सकती है
आत्मविश्वास बढ़ सकता है

ओम उच्चारण को बताती हैं ऊर्जा का माध्यम

आचार्य प्रतिष्ठा अपने ध्यान अभ्यास में “ॐ” के उच्चारण को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके अनुसार प्रणव यानी “ॐ” का उच्चारण मन और शरीर दोनों को शांत करने में सहायक हो सकता है। वे लोगों को गहरी सांस लेकर धीमे स्वर में तीन बार “ॐ” का उच्चारण करने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि इससे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार महसूस किया जा सकता है।

“योग केवल व्यायाम नहीं, जीवनशैली है”

आचार्य प्रतिष्ठा के अनुसार योग और ध्यान केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित बनाने का माध्यम हैं। वे कहती हैं कि यदि व्यक्ति रोज कुछ मिनट अपने लिए निकाल ले, तो वह मानसिक रूप से अधिक मजबूत और शांत महसूस कर सकता है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नियमित योग और ध्यान मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकते हैं। हालांकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या में विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

ध्यान करते समय किन गलतियों से बचें?

जल्दी परिणाम पाने की उम्मीद
अभ्यास के दौरान मोबाइल देखना
शरीर को जबरदस्ती रोकना
बहुत शोर वाले स्थान पर ध्यान करना
अनियमित अभ्यास करना

युवाओं को भी जोड़ने की कोशिश

आचार्य प्रतिष्ठा विशेष रूप से युवाओं को योग और ध्यान से जोड़ने का प्रयास करती नजर आती हैं। उनका कहना है कि आज की पीढ़ी डिजिटल दुनिया में सबसे ज्यादा मानसिक दबाव झेल रही है। ऐसे में ध्यान उन्हें मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति की ओर ले जा सकता है। वे कहती हैं कि “जब व्यक्ति खुद को समझने लगता है, तभी जीवन को सही दिशा मिलती है।”

10 मिनट की शांति, पूरे दिन की ऊर्जा

योग और ध्यान की बढ़ती लोकप्रियता के बीच आचार्य प्रतिष्ठा का संदेश लोगों को खुद से जुड़ने की प्रेरणा देता दिखाई देता है। उनका मानना है कि यदि इंसान रोज कुछ मिनट अपने मन और शरीर को शांत करने में लगाए, तो जीवन की कई समस्याओं का सामना अधिक सहजता से किया जा सकता है।वे लोगों को जागरूक करते हुए कहती हैं कि “दृष्टि बदलते ही सृष्टि बदलने लगती है।”

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor