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बढ़ता स्क्रीन टाइम, घंटों बैठकर काम करने की आदत, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों में कमी आज ह‌ड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण बने : डॉ. विक्रम शाह

“शेल्बी से पूछा?” जोधपुर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम 2026 में 400+ लोगों ने जाना स्वस्थ जोड़ों और आधुनिक उपचार का सही तरीका | शैल्बी हॉस्पिटल्स द्वारा 5000+ सफल रोबोटिक सर्जरी

पंकज जांगिड़. जोधपुर

बढ़ता स्क्रीन टाइम, घंटों बैठकर काम करने की आदत, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों में कमी आज ह‌ड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। पहले जहां घुटनों, रीढ़ और कूल्हों की समस्याएं मुख्यतः बुजुर्गों में देखी जाती थीं, वहीं अब 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में भी ये समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

इसी गंभीर विषय को केंद्र में रखते हुए शैल्बी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल्स द्वारा 30 मई 2026 को जोधपुर के नोवोटेल होटल में “जोधपुर ऑर्थोपेडिक सिम्पोजियम 2026” का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य लोगों को आधुनिक ऑपिटिक उपचार, रोकथाम और समय पर जांच के महत्व के प्रति जागरूक करना था।

इस सिम्पोजियम में देश के प्रतिष्ठित ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जोधपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से 400 से अधिक लोगों ने असाहपूर्वक सहभागिता की और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी स्वास्थ्य संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

घुटनों, कूल्हों, रीढ़ और कंधों की समस्याओं पर चर्चा

संगोष्ठी में घुटनों, कूल्हों, रीढ़ और कंधों से संबंधित समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई। शैल्बी हॉस्पिटल के संस्थापक एवं भारत में घुटना रिप्लेसमेंट सर्जरी के अग्रणी विशेषज्ञ डॉ. विक्रम शाह ने आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न हो रही ऑथॉपेडिक चुनौतियों पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग, गलत पॉवर तथा अनियमित दिनचर्या युवाओं को भी कम उम्र में कमर दर्द, गर्दन दर्द और घुटनों की समस्याओं की ओर धकेल रही है।

नई संभावनाओं के खुले द्वार 

उन्होंने कहा कि आधुनिक ऑर्थोपेडिक उपचार पद्धतियों ने चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। आज अत्याधुनिक तकनीकों और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के माध्यम से मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव और पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज रिकवरी मिल रही है।

सही पाचन, नियमित व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या जरूरी

विशेषज्ञों ने सही पाचन, नियमित व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या को स्वस्थ जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि सगय पर जांच ओर शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर उपचार अधिक प्रभावी और सरल हो जाता है। उन्होंने बताया कि गठिया (आर्थराइटिस) के कारण घुटनों और कूल्हों में दर्द एवं चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों में घुटना एवं कूल्हा रिप्लेसमेंट जैसी आधुनिक सर्जरी मरीजों को फिर से सामान्य और सक्रिय जीवन जीने में मदद कर रही हैं। डॉ. विक्रम शाह ने कहा कि लोग अक्सर शुरुआती नोड़ों या कमर दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले लेती है और उपचार अधिक जटिल हो जाता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं से बचाव के लिए बेहद आवश्यक है। कार्यक्रम में आधुनिक ऑथोपेडिक उपचार पद्धतियों, जॉइंट रिप्लेसमेंट, स्पाइन केयर, खेल संबंधी चोटों तथा मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में आई नई तकनीकों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट तकनीक पर भी विशेष चर्चा की गईी विशेषज्ञों ने बताया कि रोबोटिक तकनीक सर्जरी के दौरान अधिक सटीकता सुनिश्चित करती है, जिससे इम्प्लांट की सही पोजिशनिंग और बेहतर परिणाम मिलते हैं। आधुनिक मिनिमली इनवेसिव एवं रोबोटिक तकनीकों के कारण अब मरीजों को कम दर्द, कम रक्तसाव और पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज रिकवरी मिल रही है। कई मरीज सर्जरी के कुछ ही दिनों में चलने-फिरने लगते हैं और जल्द अपनी दैनिक गतिविधियों में वापस लोट पाते हैं। शैल्बी हॉस्पिटल्स द्वारा अब तक 5000 से अधिक रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं, जो आधुनिक ऑर्थोपेडिक उपचार और रोबोटिक तकनीक के क्षेत्र में संस्थान की विशेषज्ञता और अनुभव को दर्शाती हैं।

युवाओं में बढ़ती स्पाइन समस्या चिंताजनक

विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ती स्पाइन समस्याओं और स्पोर्ट्स इंजरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठना, गलत पौचर, निष्क्रिय जीवनशैली तथा फिटनेस के दौरान गलत तकनीकों का उपयोग स्लिप डिस्क एवं रीढ़ संबंधी समस्याओं के मामलों को तेजी से बढ़ा रहा है। उन्होंने नियमित स्ट्रेचिंग, सही बैठने की आदतें और रोजाना शारीरिक गतिविधियां अपनाने की सलाह दी। फिजियोथेरेपी एवं रिहेबिलिटेशन की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी ऑपिडिक उपचार के बाद सही रिहेबिलिटेशन शरीर की ताकत, लचीलापन और गतिशीलता को पुनः विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शैल्बी हॉस्पिटल्स के ग्लोबल ओपीडी डायरेक्टर डॉ. भरत गज्जर ने रोकथाम आधारित स्वास्थ्य देखभाल और आधुनिक उपचार पद्धतियों के महत्व पर विशेष संवाद करते हुए बताया कि सही जीवनशैली, नियमित व्यायाम और समय पर जांच के माध्यम से कई ऑर्थोपेडिक सगस्याओं से बचाव संभव है। उन्होंने कहा कि लोगों में जागरूकता बढ़ाना और सगय रहते विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान संवादात्मक सत्र भी आयोजित किए गए, जहां उपस्थित लोगों ने विशेषज्ञों से सीधे चर्चा कर अपनी समस्याओं के समाधान प्राप्त किए।

शेल्बी हॉस्पिटल तीन दशक से चिकित्सा का रॉल मॉडल

शेल्बी हॉस्पिटल्स पिछले तीन दशकों से ऑचंपिडिक एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। “शैल्बी से पूछा?” अभियान के माध्यम से लोगों को विशेषज्ञ सलाह और अत्याधुनिक उपचार सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह कार्यक्रम लोगों में ह‌ड्डियों एवं जोड़ों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ आधुनिक उपचार विकल्पों के प्रति विश्वास मजबूत करने में सफल रहा।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: 7069001001

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor