हार्वर्ड रिसर्च और हैप्पीनेस इंडेक्स का हवाला देकर बोले मोटिवेशनल स्पीकर – परिवार और मित्र ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी
दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकांश लोग यह मानते हैं कि पैसा, बड़ा घर, लग्जरी लाइफस्टाइल और भौतिक सुख-सुविधाएं ही खुशी का आधार हैं। लेकिन प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर और लाइफ कोच स्नेह देसाई का मानना है कि जीवन की वास्तविक खुशी न तो बैंक बैलेंस में मिलती है और न ही आलीशान संपत्तियों में, बल्कि यह हमारे परिवार, मित्रों और मजबूत रिश्तों में छिपी होती है।
हाल ही में एक पॉडकास्ट में स्नेह देसाई ने अपने जीवन के अनुभवों और विभिन्न शोधों का हवाला देते हुए कहा कि इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसका परिवार और उसके वास्तविक संबंध होते हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग सफलता को धन और उपलब्धियों से जोड़ते हैं, जबकि वास्तविक संतुष्टि और खुशी अच्छे रिश्तों से मिलती है।
हार्वर्ड की 85 साल पुरानी रिसर्च का हवाला
स्नेह देसाई ने बातचीत के दौरान दुनिया की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हुए लंबे शोध का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 85 वर्षों तक चले अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया कि मनुष्य को स्थायी खुशी पुरस्कारों, उपलब्धियों या भौतिक वस्तुओं से नहीं मिलती।
रिसर्च के अनुसार व्यक्ति को वास्तविक खुशी उन लोगों से मिलती है जिनसे उसका भावनात्मक जुड़ाव होता है। परिवार, मित्र और करीबी रिश्ते ही मानसिक संतोष और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हैं।
उनका कहना था कि आधुनिक जीवन में लोग पैसा कमाने की दौड़ में रिश्तों को पीछे छोड़ रहे हैं, जबकि खुशी का वास्तविक स्रोत वही रिश्ते हैं।
हार्वर्ड रिसर्च का संदेश
खुशी केवल धन से नहीं मिलती
मजबूत रिश्ते मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं
परिवार और मित्र जीवन की सबसे बड़ी ताकत हैं
भावनात्मक जुड़ाव जीवन की गुणवत्ता बढ़ाता है
हैप्पीनेस इंडेक्स में क्या कहती है दुनिया?
स्नेह देसाई ने विश्व हैप्पीनेस इंडेक्स का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दुनिया के सबसे खुशहाल देशों की सूची में लगातार शीर्ष स्थानों पर रहने वाले देशों में फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं।
उनके अनुसार इन देशों में एक खास समानता देखने को मिलती है। वहां के लोग प्रतिदिन 60 से 90 मिनट अपने परिवार या प्रियजनों के साथ बिताते हैं। यही आदत उनके जीवन में संतुलन और खुशी का महत्वपूर्ण कारण बनती है।
उन्होंने कहा कि तकनीक और व्यस्तता के इस दौर में लोग अपने ही परिवार के साथ बैठकर बातचीत करने का समय नहीं निकाल पा रहे हैं, जिससे तनाव और अकेलापन बढ़ रहा है।
60 हजार वर्गफीट का घर भी खुशी नहीं दे सकता
पॉडकास्ट में स्नेह देसाई ने अपने जीवन का एक रोचक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके पास बेहद विशाल और आधुनिक सुविधाओं से युक्त घर है, जिसमें क्रिकेट ग्राउंड, पैडल कोर्ट, निजी जिम, होम थिएटर और अत्याधुनिक स्टूडियो जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।
इसके बावजूद उन्होंने स्वीकार किया कि इतना बड़ा घर भी अकेले व्यक्ति को खुशी नहीं दे सकता।
उन्होंने कहा, “जब शाम को आप अकेले होते हैं, तब बड़ा घर भी खाली-खाली लगता है। असली आनंद तब आता है जब परिवार, दोस्त और रिश्तेदार साथ हों।”
स्नेह देसाई की सीख
“जीवन की गुणवत्ता पैसे से नहीं, रिश्तों से तय होती है।”
“बड़ा घर खुशी नहीं देता, अच्छे लोग खुशी देते हैं।”
“सच्चा नेटवर्क आपके वे मित्र हैं जो जरूरत पड़ने पर आपके साथ खड़े रहें।”
दोस्ती और रिश्तों को देते हैं प्राथमिकता
स्नेह देसाई ने बताया कि वे केवल आर्थिक लाभ को देखकर किसी व्यक्ति के साथ व्यवसाय नहीं करते। उनके लिए व्यक्ति के मूल्य, सोच और आपसी संबंध अधिक महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ बैठकर समय बिताने में आनंद नहीं आता और जीवन मूल्यों में समानता नहीं है, तो केवल पैसा कमाने के लिए साझेदारी का कोई अर्थ नहीं है।
उनका मानना है कि व्यवसाय में भी विश्वास, मित्रता और अच्छे संबंध लंबे समय तक सफलता दिलाते हैं।
अकेलेपन की बढ़ती चुनौती
स्नेह देसाई के अनुसार आज दुनिया भर में अकेलापन एक बड़ी सामाजिक और मानसिक समस्या बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स होने के बावजूद लोगों के पास वास्तविक बातचीत और भावनात्मक सहयोग देने वाले मित्र कम होते जा रहे हैं।
स्नेह देसाई का संदेश इसी दिशा में लोगों को जागरूक करता है कि जीवन में सफलता के साथ-साथ रिश्तों को भी समय देना जरूरी है।
खुशहाल जीवन के लिए 5 सुझाव
- प्रतिदिन परिवार के साथ समय बिताएं।
- मित्रों और रिश्तेदारों से नियमित संपर्क बनाए रखें।
- भोजन के समय मोबाइल से दूरी रखें।
- केवल करियर नहीं, संबंधों में भी निवेश करें।
- जरूरत पड़ने पर अपने प्रियजनों की मदद करें।
परिवार ही जीवन की असली नींव
स्नेह देसाई का मानना है कि जीवन की शुरुआत परिवार से होती है और वही हमारी सबसे बड़ी भावनात्मक सुरक्षा है। परिवार से मिलने वाला प्रेम, विश्वास और सहयोग व्यक्ति को हर कठिन परिस्थिति में मजबूत बनाए रखता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास अच्छे रिश्ते हैं, तो वह जीवन की अधिकांश चुनौतियों का सामना आसानी से कर सकता है। वहीं केवल धन होने पर भी यदि व्यक्ति अकेला है, तो वह वास्तविक खुशी का अनुभव नहीं कर सकता।
सच्ची खुशी परिवार, मित्रों और भावनात्मक संबंधों से मिलती है
स्नेह देसाई का संदेश आधुनिक समाज के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है। ऐसे समय में जब सफलता को अक्सर धन, पद और भौतिक उपलब्धियों से मापा जाता है, वे हमें याद दिलाते हैं कि जीवन की सबसे मूल्यवान संपत्ति हमारे रिश्ते हैं। हार्वर्ड रिसर्च से लेकर विश्व हैप्पीनेस इंडेक्स तक कई अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि सच्ची खुशी परिवार, मित्रों और भावनात्मक संबंधों से मिलती है। इसलिए यदि जीवन को वास्तव में खुशहाल बनाना है तो धन कमाने के साथ-साथ रिश्तों को भी समय और महत्व देना होगा। क्योंकि अंततः जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि वे लोग होते हैं जो हर परिस्थिति में हमारे साथ खड़े रहते हैं।




