मोहनी योग संस्थान के 24 दिवसीय योग शिविर में औषधीय पौधों के साथ लिया धरती को हरा-भरा बनाने का संकल्प
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शहर में स्थित मोहनी योग संस्थान द्वारा आयोजित 24 दिवसीय योग शिविर में गुरुवार को प्रकृति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। योग शिविर में शामिल सभी योगार्थियों ने पूरे उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा धरती को पुनः हरा-भरा बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम का वातावरण सुबह से ही आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकृति प्रेम से सराबोर दिखाई दिया। योग साधकों ने न केवल योगाभ्यास किया बल्कि पर्यावरण के महत्व को समझते हुए पौधारोपण और औषधीय पौधों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी चर्चा की। इस विशेष आयोजन ने उपस्थित सभी लोगों के मन में प्रकृति के प्रति नई चेतना और जिम्मेदारी का भाव जागृत किया।
योग गुरु मुक्ता माथुर ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मोहनी योग संस्थान की योग गुरु मुक्ता माथुर ने जानकारी देते हुए बताया कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मनुष्य धीरे-धीरे प्रकृति से दूर होता जा रहा है। यही दूरी अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन रही है। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक दिव्य प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीना सीख ले, तो कई बीमारियों और मानसिक तनाव से बचा जा सकता है। विश्व पर्यावरण दिवस जैसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि धरती केवल हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य भी है।
औषधीय पौधों का आदान-प्रदान बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम की सबसे विशेष और प्रेरणादायक पहल रही औषधीय पौधों का उपहार स्वरूप आदान-प्रदान। शिविर में शामिल सभी योगार्थियों ने एक-दूसरे को नीम, जामुन, गिलोय, अशोक, तुलसी, एलोवेरा, करी पत्ता, आम और अश्वगंधा जैसे पौधे भेंट किए।
इन पौधों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व को भी रेखांकित किया गया। योग गुरु मुक्ता माथुर ने बताया कि इन औषधीय पौधों का हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। तुलसी जहां वातावरण को शुद्ध करती है, वहीं गिलोय रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है। नीम और अश्वगंधा जैसे पौधे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी करेंगे ताकि आने वाले समय में शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में हरियाली बढ़ सके।
“प्रकृति को भेंट, जीवन का संकल्प” बना आयोजन का मुख्य संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस समारोह का मुख्य संदेश “प्रकृति को भेंट, जीवन का संकल्प” रहा। इस संदेश ने पूरे आयोजन को भावनात्मक और प्रेरणादायक स्वरूप प्रदान किया। योग साधकों ने कहा कि जिस प्रकार पेड़-पौधे हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं, उसी प्रकार उनका संरक्षण करना भी मानव जीवन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
आज बढ़ते प्रदूषण, कटते जंगल और बदलते जलवायु संतुलन ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ऐसे समय में यदि प्रत्येक व्यक्ति केवल एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी ले ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव हो सकता है।
संगीत और योग ने बनाया दिव्य वातावरण
समारोह का सबसे आकर्षक और मनमोहक हिस्सा रहा संगीत के साथ योगाभ्यास। मधुर और सुरीली धुनों के बीच जब योग साधकों ने प्राणायाम और विभिन्न योगासन किए, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
योग और संगीत के इस अनूठे संगम ने उपस्थित लोगों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत अनुभव कराया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रकृति स्वयं इस आयोजन का हिस्सा बन गई हो। वातावरण में बहती ठंडी हवा, पौधों की हरियाली और मधुर संगीत ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
योगार्थियों ने बताया कि संगीत के साथ योग करने से मन अधिक एकाग्र और शांत महसूस करता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। कई प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का यादगार अनुभव बताया।
योग शिविर में दिखा अनुशासन और उत्साह
24 दिवसीय इस योग शिविर में सभी आयु वर्ग के लोग उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा ले रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में योगार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
कार्यक्रम के दौरान योगाभ्यास, ध्यान, प्राणायाम और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में योग और प्रकृति को अपनाने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सहयोगी शिक्षकों की भूमिका रही सराहनीय
शिविर के सफल संचालन में सहयोगी शिक्षक हेमंत और रजनी की भूमिका भी सराहनीय रही। दोनों शिक्षकों ने योगार्थियों को विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास करवाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि स्वस्थ जीवन के लिए शुद्ध वातावरण, संतुलित भोजन और नियमित योगाभ्यास अत्यंत आवश्यक हैं। यदि मनुष्य प्रकृति से जुड़ा रहेगा, तो वह शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रह सकेगा।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर युवाओं में दिखा उत्साह
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली। युवाओं ने पौधारोपण और पर्यावरण बचाने के लिए जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया। कई प्रतिभागियों ने कहा कि सोशल मीडिया और आधुनिक जीवनशैली के कारण लोग प्रकृति से दूर हो रहे हैं, लेकिन ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं।
युवाओं ने यह भी कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या किसी विशेष अवसर पर पौधे लगाए, तो पर्यावरण संरक्षण का बड़ा अभियान खड़ा किया जा सकता है।
योग और प्रकृति का संबंध है अटूट
विशेषज्ञों का मानना है कि योग और प्रकृति का संबंध अत्यंत गहरा है। योग हमें संतुलन, शांति और सकारात्मक सोच सिखाता है, जबकि प्रकृति हमें जीवन देती है। जब दोनों का संगम होता है, तब व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से अधिक मजबूत बनता है।
मोहनी योग संस्थान द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि समाज को प्रकृति संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देने वाला प्रेरणादायक अभियान बन गया।
पर्यावरण बचाने का सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी योगार्थियों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे अपने घरों, मोहल्लों और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे तथा लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह आयोजन लोगों के लिए केवल एक समारोह नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का प्रेरणादायक अनुभव बन गया। मोहनी योग संस्थान की इस पहल की शहरभर में सराहना की जा रही है।




