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Sunday, October 18, 2026, 9:01 am

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मां और दो मामा खोकर भी अस्पताल में डटी रहीं: सेवा, समर्पण और संवेदना की मिसाल तेज कंवर”

राज्यस्तरीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड 2026 से सम्मानित। कोविड काल में मरीज-रिश्तेदार-स्टाफ के खाने-पीने की व्यवस्था में कोई कमी नहीं आने दी

दिलीप कुमार पुरोहित  जोधपुर 

“सेवा ही धर्म” को जीने वाली महात्मा गांधी चिकित्सालय जोधपुर की *तेज कंवर वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी किचन विभाग प्रभारी* ने अट्ठाईस साल की तपस्या से पूरे राजस्थान का गौरव बढ़ाया है। नर्सिंग क्षेत्र के सर्वोच्च सम्मान *फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड – राज्य स्तरीय* से 12 मई 2026 को राज्य सरकार द्वारा नवाजा गया।

कोविड काल: शोक के बीच समर्पण

कोविड-19 महामारी के सबसे कठिन दौर में तेज कंवर जी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पूज्य माता जी के निधन के 15 दिन के भीतर दो मामा जी भी चल बसे। घर में मातम, मन में गहरा दर्द… फिर भी तेज कंवर जी अस्पताल में डटी रहीं। व्यक्तिगत शोक को दिल में दबाकर किचन विभाग प्रभारी के पद की गरिमा को बनाए रखा। मरीजों, उनके रिश्तेदारों और स्टाफ के खाने-पीने की व्यवस्था में कोविड काल में कोई कमी नहीं आने दी। माँ के बिना माँ बनकर पूरे अस्पताल को संभाला। इस अद्वितीय समर्पण से प्रभावित होकर जिला कलेक्टर, अस्पताल प्रशासन एवं प्रिंसिपल महोदय ने विशेष रूप से सम्मानित किया।

सेवा की संपूर्ण गाथा:

1. *थैलेसीमिया बच्चों की ‘माँ’*: राज्य सरकार की थैलेसीमिया कुटुंब योजना के तहत भर्ती नन्हें बच्चों की माँ की तरह सेवा। रोजाना फल और बिस्किट की व्यवस्था। समय-समय पर ब्लड डोनेशन शिविर लगाकर थैलेसीमिया मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध करवाया, ताकि उनके स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव न पड़े।

2. *CPR की पाठशाला*: अस्पताल के साथ गांव-ढाणी तक महिलाओं-गृहणियों को CPR का प्रशिक्षण दिलाकर तैयार किया। ताकि आपात परिस्थिति में महिला अपना परिवार की रक्षा कर सके। इस तरह सैकड़ों लोगों को जीवन रक्षक बनाया।

3. *मरीजों के लिए पौष्टिक भोजन*: किचन विभाग प्रभारी के रूप में सुनिश्चित किया कि हर मरीज तक समय पर गर्म, पौष्टिक और उपचार में सहायक भोजन पहुंचे। किचन गार्डन में परिंडे लगाकर पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था प्रतिदिन की जाती है। किचन विभाग परिसर में बहुत सारे हरे-भरे पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

4. *आपदा में बनीं ढाल*: भूंगरा अग्निकांड, माता का थान हादसा व जैसलमेर बस दुर्घटना में ड्यूटी के साथ अतिरिक्त समय दिया। घायल मरीजों के परिजनों के साथ खड़ी रहीं, उन्हें ढांढस बंधाया। परिजनों के लिए भी भोजन व पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया ताकि वे अपने मरीजों की सेवा निश्चिंत होकर कर सकें। गंभीर झुलसे/बर्न मरीजों को समय पर विशेष प्रोटीन डाइट उपलब्ध करवाई जाती है।

5. *वृद्धजनों की सेवा*: अस्पताल में भर्ती असहाय वृद्ध मरीजों की विशेष देखभाल। वृद्धाश्रम जाकर वृद्धजनों की सेवा की। समय-समय पर उनके लिए पौष्टिक आहार की व्यवस्था करवाई और अपनों जैसा अपनापन दिया।

6. *दिव्यांगों की संबल*: दिव्यांग जनसंस्थान जाकर दिव्यांगजनों की सेवा की। दिव्यांग मरीजों की तकलीफ समझकर अस्पताल में विशेष व्यवस्था की। दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाने व रिन्यूअल करवाने में स्वयं साथ रहकर पूरी मदद की। जरूरतमंद दिव्यांगों को ट्राईसाइकिल दिलाने में मदद की और हर संभव सहायता कर तकलीफों से बचाया।

7. *अंतिम संस्कार का दायित्व*: जिन गरीब-बेसहारा मरीजों का कोई वारिस नहीं होता, उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था स्वयं करवाती हैं। जिन गरीब परिवारों के पास दाह संस्कार के रुपए-पैसे नहीं होते, उनका भी दाह संस्कार करवाकर अंतिम विदाई का दायित्व निभाती हैं। यह पुण्य कार्य आज भी निरंतर जारी है।

8. *गौ सेवा व पर्यावरण*: लम्पी बीमारी के दौरान गौशालाओं में चारा व पानी की व्यवस्था करवाई। आज भी समय-समय पर गौशालाओं में गौ माता के लिए पौष्टिक आहार, खाने व पानी की व्यवस्था करवाती हैं। प्रति वर्ष स्कूल, अस्पताल व गौशालाओं में हजारों पौधे लगाकर पर्यावरण बचाने का पुण्य कार्य अनवरत जारी है।

9. *महिला सशक्तिकरण व शिक्षा*: कई सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़कर महिलाओं को रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा के क्षेत्र में जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ने व शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध करवाने का कार्य निरंतर कर रही हैं।

10. *स्वास्थ्य जागरूकता व अंगदान प्रेरणा*: समय-समय पर चिकित्सा शिविर आयोजित कर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती हैं। अंगदान, देहदान व नेत्रदान के प्रति लोगों में फैली भ्रांतियों को दूर कर, उन्हें समझाकर व प्रेरित कर इस महादान के लिए आगे लाने का पुण्य कार्य निरंतर कर रही हैं।

11. *सामाजिक सरोकार*: स्लम एरिया में जाकर नशा मुक्ति अभियान चलाकर लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करती हैं। वहां के बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित कर अच्छी आदतें, संस्कार व गुड हैबिट्स सिखाने का कार्य कर रही हैं।

12. *कुरीति उन्मूलन*: मृत्युभोज प्रथा का खुलकर विरोध करती हैं। मृत्यु के बाद होने वाले मृत्युभोज को बंद करने के लिए जन-जन तक पहुंचकर, विशेषकर महिलाओं को समझाकर व प्रेरित कर इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करने का कार्य कर रही हैं। सामूहिक संस्थाओं के साथ मिलकर कम खर्च में परंपरा निभाने के लिए भी प्रेरित कर रही हैं।

13. *रामाश्रय वार्ड की जिम्मेदारी*: 25 मई 2026 को महात्मा गांधी चिकित्सालय, जोधपुर में रामाश्रय वार्ड का उद्घाटन हुआ। इस वार्ड के मरीजों के खाने-पीने की समस्त जिम्मेदारी एवं विशेष पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी ट्रस्ट द्वारा करवाई गई, जिसका निर्वहन तेज कंवर जी द्वारा किया जा रहा है।

14. *राष्ट्रीय सम्मान*: निस्वार्थ सेवा के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने प्रशंसा पत्र भेजा। वर्ष 2025 में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के साथ राष्ट्रीय स्तर पर मेडल व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित।

_”माँ और दो मामा खोकर भी अस्पताल में डटी रहीं तेज कंवर। मरीज-रिश्तेदार-स्टाफ के लिए माँ बनकर जीने वाली जोधपुर की बेटी ने साबित किया – सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।”_
_”राज्यस्तरीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड पाकर तेज कंवर ने साबित कर दिया कि निस्वार्थ सेवा ही सच्चा सम्मान है। उनका हर दिन, हर पल मरीजों के नाम है।”_

सेवा और समर्पण की मिसाल तेज कंवर

सेवा का दिया जलाया, दर्द में दीप बनीं
माँ खोकर भी माँ बनकर, हर मरीज की अपनी बनीं
अट्ठाईस साल तपस्या, निस्वार्थ भाव से की
जोधपुर की बेटी ने, इंसानियत की मिसाल लिख दी

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor