सांस्कृतिक संध्या में लोकसंगीत, लोककला और अपनत्व का अद्भुत संगम, बुजुर्गों ने याद किए पुराने दिन
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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अनुबंध वृद्धजन कुटीर में शुक्रवार शाम आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम ने वहां रह रहे वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में खुशियों के रंग भर दिए। लोक संस्कृति और मनोरंजन से भरपूर इस विशेष आयोजन में प्रसिद्ध लंगा कलाकारों ने अपनी संगीतमय प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि उपस्थित दादा-दादी और नाना-नानी भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम के दौरान आयोजित कठपुतली शो ने भी सभी का भरपूर मनोरंजन किया और बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य वृद्धजनों को आनंददायक वातावरण प्रदान करना, उन्हें सामाजिक रूप से सक्रिय रखना तथा उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना था। शाम ढलते ही अनुबंध वृद्धजन कुटीर का परिसर लोकसंगीत की मधुर धुनों और तालियों की गूंज से सराबोर हो गया। बुजुर्गों ने न केवल कार्यक्रम का आनंद लिया बल्कि कई वरिष्ठजन संगीत की लय पर स्वयं को थिरकने से भी नहीं रोक पाए।
लोकसंगीत की मधुर धुनों ने छू लिया दिल
कार्यक्रम की शुरुआत लंगा कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। राजस्थान की समृद्ध लोकसंगीत परंपरा को जीवंत करते हुए कलाकारों ने विभिन्न लोकगीतों और सूफियाना रचनाओं की मनमोहक प्रस्तुति दी। सारंगी, खड़ताल और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की संगत ने माहौल को और अधिक आकर्षक बना दिया।
जैसे-जैसे गीतों की धुनें वातावरण में गूंजती गईं, वैसे-वैसे वृद्धजन भी संगीत के रंग में रंगते चले गए। कई बुजुर्गों ने अपने युवावस्था के दिनों को याद करते हुए गीतों के साथ गुनगुनाया। कुछ वरिष्ठजन तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करते नजर आए तो कुछ संगीत की लय पर झूमते दिखाई दिए।
लंगा कलाकारों की प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि संगीत उम्र की सीमाओं से परे होता है और हर दिल को जोड़ने की शक्ति रखता है।
कठपुतली शो ने जगाई बचपन की यादें
लोकसंगीत के बाद आयोजित कठपुतली शो कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा। रंग-बिरंगी कठपुतलियों और रोचक कथाओं ने उपस्थित लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। कठपुतली कलाकारों ने हास्य, संदेश और लोककथाओं का सुंदर समावेश करते हुए ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देखते रहे।
कई बुजुर्गों ने कहा कि वर्षों बाद उन्होंने इस प्रकार का कठपुतली शो देखा है। प्रस्तुति ने उन्हें उनके बचपन और गांवों में आयोजित होने वाले पारंपरिक मेलों की याद दिला दी। शो के दौरान कई बार ठहाकों की गूंज सुनाई दी और पूरा परिसर उत्साह से भर गया।
खुशियों के पलों में झूम उठे वरिष्ठजन
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि अनुबंध में रह रहे वरिष्ठजन स्वयं इस आयोजन का हिस्सा बन गए। संगीत और मनोरंजन के बीच उन्होंने खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कुछ बुजुर्गों ने कलाकारों के साथ गीत गुनगुनाए तो कुछ ने अपने अनुभव साझा किए।
आमतौर पर शांत वातावरण में रहने वाले कई वरिष्ठजन इस अवसर पर अत्यंत उत्साहित दिखाई दिए। उनके चेहरे पर प्रसन्नता और संतोष स्पष्ट झलक रहा था। कार्यक्रम ने उन्हें न केवल मनोरंजन दिया बल्कि सामूहिकता और अपनत्व का एहसास भी कराया।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं। इससे उनमें सकारात्मक सोच विकसित होती है और अकेलेपन की भावना कम होती है।
अनुबंध वृद्धजन कुटीर बना खुशियों का घर
अनुबंध वृद्धजन कुटीर समय-समय पर अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन करता रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य वृद्धजनों को सक्रिय, प्रसन्न और समाज से जुड़ा हुआ महसूस कराना है।
संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि वृद्धावस्था जीवन का ऐसा चरण है जिसमें सम्मान, प्रेम और मनोरंजन की उतनी ही आवश्यकता होती है जितनी जीवन के अन्य चरणों में होती है। जब समाज और संस्थाएं बुजुर्गों के लिए ऐसे प्रयास करती हैं तो उनके जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
संचालिका अनुराधा अडवानी ने जताया आभार
कार्यक्रम के समापन पर अनुबंध वृद्धजन कुटीर की संचालिका अनुराधा अडवानी ने कलाकारों, सहयोगकर्ताओं और उपस्थित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्था का प्रयास है कि यहां निवास कर रहे प्रत्येक वरिष्ठजन को परिवार जैसा वातावरण मिले और वे स्वयं को कभी अकेला महसूस न करें।
उन्होंने कहा कि संगीत, कला और सांस्कृतिक गतिविधियां जीवन में नई उम्मीद और उत्साह का संचार करती हैं। भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि वरिष्ठ नागरिकों को मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता के अवसर मिलते रहें।
लोककला ने बढ़ाया कार्यक्रम का आकर्षण
- लंगा कलाकारों की संगीतमय प्रस्तुति
- पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर संगत
- राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुति
- कठपुतली शो ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
वरिष्ठजनों ने क्या कहा?
“आज पुराने दिनों की याद ताजा हो गई। ऐसा लगा जैसे फिर से युवावस्था लौट आई हो।”
“कठपुतली शो देखकर बचपन याद आ गया। बहुत वर्षों बाद ऐसा मनोरंजन देखने को मिला।”
“संगीत ने मन को बहुत शांति और खुशी दी। ऐसे कार्यक्रम लगातार होने चाहिए।”
ऐसे कार्यक्रम क्यों हैं जरूरी?
- बुजुर्गों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- अकेलेपन और तनाव की भावना कम होती है।
- सामाजिक जुड़ाव और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
- जीवन के प्रति उत्साह और आशावाद बढ़ता है।
संदेश : बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास
अनुबंध वृद्धजन कुटीर में आयोजित यह रंगारंग सांस्कृतिक संध्या केवल एक मनोरंजन कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान लाने, उन्हें सम्मान और अपनत्व का एहसास कराने तथा उनके जीवन में खुशियों के नए रंग भरने का एक सार्थक प्रयास था। लंगा कलाकारों की सुरमयी प्रस्तुतियों और कठपुतली शो ने यह साबित कर दिया कि संगीत, कला और संस्कृति हर उम्र में जीवन को आनंदमय बनाने की अद्भुत शक्ति रखते हैं।






