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Sunday, August 23, 2026, 8:15 am

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Lifestyle

जोधपुर महिला मंडल ने पुष्कर में किया पवित्र स्नान, सनातन संस्कृति का दिया संदेश

राखी पुरोहित. जोधपुर 

जोधपुर से महिला मंडल का एक दल सीमा सांखला और तेज कंवर सांखला के नेतृत्व में धार्मिक यात्रा पर पुष्कर पहुंचा। सनातन संस्कृति का संदेश देते हुए महिलाओं ने जोश और उल्लास के साथ पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान किया।

सभी महिलाओं ने जगत पिता ब्रह्माजी के मंदिर के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी तेज कंवर सांखला एवं बबली के सान्निध्य में महिला मंडल ने पुष्कर के बावन घाट की परिक्रमा पूर्ण की तथा सभी प्रमुख मंदिरों के दर्शन का लाभ लिया। यात्रा के दौरान मीराबाई मंदिर के दर्शन भी किए गए।

तेज कंवर सांखला ने बताया कि इस तरह के धार्मिक आयोजन से आपस में प्रेम, सौहार्द और अपनेपन की भावना विकसित होती है। सनातन संस्कृति में महिला मंडल द्वारा इस प्रकार के धार्मिक आयोजन किया जाना हमारी धार्मिक मान्यताओं को जीवित रखने का एक अद्भुत प्रयास है।

यात्रा में वृद्ध महिलाएं भी शामिल थीं। सभी महिला मंडल की सदस्यों ने वृद्ध महिलाओं का हाथ पकड़कर स्नान करवाया और उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान एक-दूसरे के सहयोग की भावना देखने लायक थी।

अधिक मास की मान्यता को ध्यान में रखते हुए सभी ने साधु-संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया और धार्मिक परंपराओं को निभाया। धार्मिक आस्था से परिपूर्ण यह यात्रा अत्यंत प्रेरणादायी रही। इस आयोजन को सफल बनाने में मोहिनी सांखला, बबली, आशा, मंजू गोस्वामी एवं महिला मंडल की समस्त सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कविता :

पुष्कर के घाट पर नारी शक्ति ने जो दीप जलाया है,
वो सनातन संस्कृति का उजाला हर युग तक जाएगा।

ब्रह्मा जी की नगरी में जब माताएं शीश नवाती हैं,
तब युवा पीढ़ी को धर्म की राहें खुद समझ आती हैं।

मीराबाई के मंदिर से गूंजे भक्ति के जो गान,
वो कान्हा की महिमा का करते सच्चा व्याख्यान।

बावन घाट के जल में डुबकी, सिर्फ स्नान नहीं है,
ये आने वाली पीढ़ी के लिए संस्कारों का दान है।

अधिक मास में जो पुण्य कमाया, वो बंटता सबमें प्यार,
वृद्ध जनों का हाथ थामना, यही है धर्म का सार।

आज की नारी जब आगे बढ़कर धर्म ध्वजा लहराती है,
तो टूटती परंपराएं फिर से जुड़ जाती हैं।

पुष्कर स्नान की महिमा ऐसी, शब्दों में कहां बंध पाए,
जो श्रद्धा से गोता लगाए, वो भवसागर तर जाए।

धर्म बचाने निकलीं माताएं, लेकर संस्कारों की सौगात,
इनके कदमों से ही तो, महकता है भारत का प्रभात।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor