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Thursday, July 9, 2026, 3:25 am

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डॉ. हुकमसिंह भाटी द्वारा लिखित पुस्तक ‘महाराणा प्रतापः नवीन ज्ञातव्य’ का हुआ विमोचन

“महाराणा प्रताप – नवीन ज्ञातव्य “पुस्तक से शोध के नये आयाम खुलेंगे – डॉ भगवानसिंह शेखावत

सुनील वर्मा. जोधपुर

चौपासनी शिक्षा समिति व मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा संचालित राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर के तत्वावधान में पुस्तक विमोचन एवं समीक्षा गोष्ठी आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. हुकमसिंह भाटी द्वारा लिखित पुस्तक “महाराणा प्रतापः नवीन ज्ञातव्य ” शीर्षक पुस्तक का विमोचन चौपासनी शिक्षा समिति के सभागार में हुआ।

समारोह में डॉ हुकम सिंह भाटी द्वारा लिखित पुस्तक “महाराणा प्रताप – नवीन ज्ञातव्य का चौपासनी शिक्षा समिति के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल,जेएनवीयू इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ भगवान सिंह शेखावत,चौपासनी शिक्षा समिति के सचिव राघवेंद्र प्रताप सिंह झालामंड,राजस्थानी शोध संस्थान उप समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह लीलियाँ व शोध संस्थान के सहायक निदेशक जितेंद्र सिंह भाटी ने किया ।

इस अवसर पर जेएनवीयू इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. भगवानसिंह शेखावत ने ‘महाराणा प्रतापः नवीन ज्ञातव्य’ पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा की महाराणा प्रताप एक महान् स्वतंत्रता सेनानी थे। यों देखा जाय तो भारत में स्वतंत्रता आंदोलन आठवीं शताब्दी से शुरू हो गया था। यहां के शासकों ने जहां साका किया वहीं महिलाओ ने जौहर की ज्वालाओं में कूदकर धर्म एवं संस्कृति की रक्षा की। डॉ. हुकमसिंह भाटी द्वारा लिखित पुस्तक से शोध के नये आयाम खुलेंगे। इस पुस्तक में अपने संकट काल में महाराणा प्रताप द्वारा मारवाड़, जैसलमेर एवं सिंध जाना एक नवीन तथ्य है। आज समय की मांग है कि देशज स्रोतों का अध्ययन कर इतिहास का पुनर्लेखन किया जाना चाहिए।

समारोह के अध्यक्ष चौपासनी शिक्षा समिति के अध्यक्ष रावल किशनसिंह जसोल ने कहा कि यहां के क्षत्रियों ने आजादी की लड़ाई के लिए एक लम्बा संघर्ष किया। यहां के योद्धाओं में सामाजिक समरसता की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। महाराणा प्रताप हमारे लिए प्रेरणा पुंज है। डॉ. भाटी ने इस पुस्तक में जो नये तथ्य उद्घाटित किए है वे शोध की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है।

लेखक डॉ. हुकमसिंह भाटी ने पुस्तक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यहां के देशज स्रोत नव इतिहास लेखन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। महाराणा प्रताप का अपने संकट काल में मारवाड़, जैसलमेर एवं सिंध की ओर जाना ऐतिहासिक दृष्टि से एक नवीन तथ्य है। उन्होंने अपनी पुस्तक में हल्दी घाटी के युद्ध का भी विस्तार से वर्णन किया है। इसमें कई नवीन बातें उजागर हुई है। महाराणा प्रताप के संघर्ष से हमें प्रेरणा मिलेगी। महाराणा प्रताप ने आत्म सम्मान के लिए घोर संघर्ष किया जो भारतीय इतिहास का उज्ज्वल पक्ष है।

प्रारम्भ में राजस्थानी शोध संस्थान के सहायक निदेशक डॉ. जितेन्द्र सिंह भाटी ने अपने स्वागत उ‌द्बोधन में कहा कि यह संस्थान उत्तरोत्तर प्रगति की ओर अग्रसर है। यही कारण है कि यहां से शोधपरक पुस्तकों का प्रकाशन हो रहा है। इसी कड़ी में डॉ. हुकमसिंह भाटी द्वारा लिखित पुस्तक ‘महाराणा प्रतापः नवीन ज्ञातव्य’ शोध दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है।
राजस्थानी शोध संस्थान चौपासनी उप समिति अध्यक्ष राजेन्द्रसिंह लीलियाँ ने कहा कि डॉ हुकुम सिंह भाटी द्वारा लिखित पुस्तक “महाराणा प्रताप -नवीन ज्ञातव्य एक शोध परक पुस्तक है,विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होगी । उन्होंने आगन्तुक महानुभावों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस समारोह में चौपासनी शिक्षा समिति के मानद् सचिव ठा. राघवेंद्र प्रतापसिंह झालामण्ड, प्रो. एस.पी. व्यास,जेएनवीयू इतिहास विभाग की विभाग अध्यक्ष प्रो सुशीला शक्तावत,जेएनवीयू हिंदी विभाग के विभाग अध्यक्ष प्रो. महिपालसिंह राठौड़, डॉ एसपी व्यास, ,कर्नल शम्भुसिंह देवड़ा, डॉ रिछपाल सिंह राठौड़, डॉ. प्रेमसिंह राजपुरोहित, डॉ. दिनेश राठी, डॉ. दलपतसिंह राजपुरोहित,चौपासनी विद्यालय के प्राचार्य दुर्गादाससिंह राजवी, पूर्व पार्षद रामसिंह जोधा,गजेंद्र सिंह सोढा, शंकरसिंह लीलियां, दुर्गा सिंह राखी,पार्षद गिरधारी सिंह, रतन सिंह चाम्पावत,चेतनसिंह बड़गुजर आदि उपस्थित थे। समारोह का संचालन संस्थान के शोध अधिकारी डॉ. सद्दीक मोहम्मद ने किया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor