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Thursday, July 9, 2026, 2:36 am

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Lifestyle

आपकी रसोई में मैदा नहीं होना चाहिए!

सफेद दिखने वाला यह पदार्थ धीरे-धीरे सेहत को पहुंचा सकता है नुकसान, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

। आधुनिक जीवनशैली में स्वाद और सुविधा के नाम पर मैदे का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। ब्रेड, बिस्किट, पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, समोसे, कचौरी, केक और कई प्रकार के पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में मैदे का भरपूर इस्तेमाल होता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मैदे का अत्यधिक सेवन शरीर के लिए कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है। यही कारण है कि अब पोषण विशेषज्ञ लोगों को अपनी रसोई से मैदे का उपयोग कम करने अथवा पूरी तरह बंद करने की सलाह दे रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार मैदा गेहूं के अत्यधिक परिष्कृत (रिफाइंड) रूप से तैयार किया जाता है। इसे बनाने की प्रक्रिया में गेहूं का चोकर और पौष्टिक भाग निकाल दिया जाता है, जिससे इसमें मौजूद अधिकांश फाइबर, विटामिन और खनिज तत्व नष्ट हो जाते हैं। परिणामस्वरूप मैदा मुख्य रूप से स्टार्च का स्रोत बनकर रह जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मैदे से बने खाद्य पदार्थ जल्दी पच जाते हैं और रक्त में शर्करा का स्तर तेजी से बढ़ा सकते हैं। नियमित रूप से अधिक मात्रा में मैदे का सेवन मोटापा, मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं और हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकता है। बच्चों और युवाओं में फास्ट फूड की बढ़ती लोकप्रियता के कारण मैदे का सेवन पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है, जो चिंता का विषय माना जा रहा है।

पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मैदे के स्थान पर साबुत गेहूं का आटा, जौ, बाजरा, ज्वार, रागी तथा अन्य मोटे अनाजों का उपयोग किया जाना चाहिए। ये खाद्य पदार्थ फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर होते हैं तथा लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास कराते हैं। इससे वजन नियंत्रण और बेहतर पाचन में भी मदद मिलती है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पूरी तरह मैदा छोड़ना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक नहीं हो सकता, लेकिन इसके नियमित और अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का सेवन स्वस्थ जीवन की आधारशिला है।

मैदा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

• मैदा गेहूं का अत्यधिक परिष्कृत (रिफाइंड) रूप है।
• मैदा बनाते समय अधिकांश फाइबर और पोषक तत्व निकल जाते हैं।
• ब्रेड, बिस्किट, पिज्जा, बर्गर, केक और नूडल्स में मैदे का व्यापक उपयोग होता है।
• अधिक मात्रा में सेवन करने पर वजन बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है।
• यह रक्त शर्करा के स्तर को तेजी से बढ़ा सकता है।
• पाचन संबंधी समस्याओं और कब्ज की शिकायत बढ़ सकती है।
• नियमित रूप से अधिक सेवन स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा सकता है।
• साबुत गेहूं, जौ, बाजरा, ज्वार और रागी बेहतर विकल्प माने जाते हैं।
• संतुलित आहार और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना चाहिए।
• स्वास्थ्य विशेषज्ञ मैदे का सीमित उपयोग करने की सलाह देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग अपनी रसोई में पौष्टिक और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को स्थान दें तथा मैदे से बने उत्पादों का सेवन कम करें, तो वे कई स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं और बेहतर जीवनशैली की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor