कवि : डॉ. राजगोपाल करवा, सोलापुर
जिंदगी… अपने ढंग से
दिन शुरू होते ही,
दुनिया का पहिया घूमने लगता है।
दिन भर हम ना उसे अपनी मर्जी से चला पाते हैं,
न अपनी सोच के मुताबिक उसके साथ चल पाते हैं।
वह अपनी मर्जी से चलता है,
अपनी मर्जी से मुड़ता है,
अपनी मर्जी से दौड़ता है,
और अनजाने में हम उसके पीछे-पीछे चल पड़ते हैं।
सोचता हूं…
क्यों इतना बेबस हो गए हम?
न अपनी मर्जी से कुछ कर पाते हैं,
न अपनी सोच से जी पाते हैं,
जान रहते हुए भी बेजान जीते हैं।
आखिर क्यों?
क्या दुनियादारी ने हमें मजबूर कियाॽ
या हमें अपनी राह बनाने की हिम्मत नहीं रहीॽ
या कुछ खोने के डर में –
हमने खुद पर भरोसा करना छोड़ दियाॽ
या किसी ने जीना ही हमें नहीं सिखाया ॽ
घर के माहौल से कुछ सीखा,
फिर दोस्तों के साथ में और कुछ जोड़ लिया,
फिर समाज ने हमें कुछ नियम सिखाए,
और क्या काम की जगह ने भी हमें बदल दिया ॽ
लेकिन सच तो यह है …
न हमें किसी ने जीना सिखाया,
न कभी हमने खुद से यह सवाल पूछा ।
न हमने उसे समझने की कोशिश की,
न हमने मन की जिंदगी जीने की जिद की ।
जिन्होंने अपने सपनों से दोस्ती की,
उन्होंने अपनी जिंदगी खुलकर जी ली।
जो हर पल खुद से और परिस्थितियों से जूझता रहा,
उसकी जिंदगी बस कटती चली गई।
इसलिए
जिंदगी बहुत छोटी है,
और बेहद खूबसूरत भी।
इसे दूसरों की शर्तों पर मत जियो,
अपने रंगों से इसे सजाओ।
अपने ढंग से राह बना लो,
और हर सफर का आनंद उठाओ।
क्योंकि—
ज़िंदगी एक ही बार मिलती है,
इसे बोझ बनाकर नहीं,
एक खूबसूरत एहसास बनाकर जीना चाहिए।
इसलिए…
अपने लिए भी थोड़ा जी लिया करो,
कभी दिल की आवाज़भी सुन लिया करो।
दुनिया का काम तो चलता ही रहेगा,
क्योंकि….
“तुम ज़िंदगी जीने आए हो….सिर्फ़ निभाने नहीं।”
“Life is beautiful. Just live it”
कवि : डॉ. राजगोपाल करवा, सोलापुर
प्रेम… शब्दों से परे
प्रेम तो बस प्रेम होता है,
जैसा तुम्हारा होता है,
वैसा ही मेरा भी होता है,प्रेम तो ब
स प्रेम होता है।
प्रेम की कोई परिभाषा नहीं,
प्रेम की कोई भाषा नहीं,
प्रेम की कोई चौखट नहीं,
प्रेम का कोई माप नहीं,
प्रेम की कोई सीमा नहीं,
प्रेम की कोई मर्यादा नहीं,
प्रेम तो बस प्रेम होता है।
प्रेम जीना होता है,
प्रेम समझना होता है,
प्रेम लेन-देन नहीं होता,
प्रेम तो बाँटना होता है,
प्रेम तो बस प्रेम होता है।
सच्चा प्रेम किसी सीमा में नहीं समाता,
सच्चा प्रेम कभी बिखरता नहीं,
सच्चा प्रेम कभी उलझता नहीं,
सच्चे प्रेम की कोई दिशा नहीं होती,
सच्चा प्रेम एक शांत झील जैसा होता है,
प्रेम तो बस प्रेम होता है।
प्रेम केवल सुंदर होता है,
प्रेम भावनाओं का इंद्रधनुष होता है,
प्रेम सपनों की तस्वीर होता है,
प्रेम मन को तृप्त करने वाला –
एक मधुर गीत होता है,
प्रेम तो बस प्रेम होता है।
प्रेम अंधा होता है,
प्रेम का कोई स्वाद नहीं होता,
प्रेम की कोई आवाज़ नहीं होती,
प्रेम की कोई खुशबू नहीं होती,
प्रेम के मन पर कोई बंधन नहीं होता,
प्रेम में “मैं” नहीं होता,
प्रेम तो बस प्रेम होता है।
प्रेम देने के लिए होता है,
प्रेम बाँटने के लिए होता है,
प्रेम लुटाने के लिए होता है,
प्रेम नदी की तरह बहने के लिए होता है,
प्रेम तो बस प्रेम होता है।
प्रेम में उतार-चढ़ाव होते हैं,
प्रेम में मोड़ आते हैं,
प्रेम में रास्ते ऊबड़-खाबड़ होते हैं,
लेकिन प्रेम एक अनुभवी नाविक होता है,
जो तूफानों से निकालकर
हमें किनारे तक पहुँचा देता है…
प्रेम तो बस प्रेम होता है।
प्रेम एक साँस है,
प्रेम दिल की धड़कन है,
प्रेम मन का मंदिर है,
प्रेम सपनों का आँगन है,
प्रेम जीने का सहारा है,
प्रेम सच्ची मित्रता का दूसरा नाम है,
प्रेम तो बस प्रेम होता है।
कुछ लोग प्रेम को शब्दों से व्यक्त करते हैं,
कुछ लोग उसे अपने कर्मों से दिखाते हैं,
कुछ लोग मन से महसूस कराते हैं,
कुछ लोग वही कहते हैं जो अच्छा लगे,
अक्सर दूसरों के अहं को –
शांत करने के लिए कहते हैं।
इसलिए इस प्रेम में
“आई लव यू”कहना पड़ता है,
यह दिखावटी प्रेम होता है।
कुछ लोगों का प्रेम अनकहा होता है,
उनका प्रेम आँखों से समझ आता है,
हाव-भाव से महसूस होता है,
बातों से झलकता है,
स्पर्श से बहक जाता है,
टेलीपैथी से भी पहुँच जाता है।
यह प्रेम दिखाई नहीं देता,
बस हल्के से छूकर चला जाता है,
मन का कोई कोना खोल देता है,
दिल में हल्की दस्तक देता है,
तन-मन को सिहरन से भर देता है।
इस प्रेम में “आई लव यू”की
कोई जगह नहीं होती,
यह प्रेम सच्चा और निर्मल प्रेम होता है।
प्रेम शब्दों में नहीं समाता,
प्रेम कोई दिखाने की वस्तु नहीं,
वह आँखों में चुपचाप खिलता है,
मन को धीरे से छू जाता है।
जहाँ “मैं” का कोई अंश नहीं होता,
वहीं प्रेम सचमुच खिलता है।




