डिजिटल युग में मोबाइल नंबर केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि आपकी डिजिटल पहचान बन चुका है। इसकी सुरक्षा में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
नेहल लड्ढा, विशेष संवाददाता
जोधपुर। देश में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच अब एक ऐसा डिजिटल फ्रॉड सामने आया है, जो आम लोगों की वर्षों की जमा-पूंजी को कुछ ही मिनटों में खतरे में डाल सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अपराधी अब मोबाइल नंबर को ही निशाना बना रहे हैं। इस नए तरीके में ठग मोबाइल उपभोक्ता के नंबर पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं और उसके बाद बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट तथा ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच बना लेते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश लोग अपने मोबाइल नंबर को केवल बातचीत का माध्यम समझते हैं, जबकि आज के डिजिटल युग में यही नंबर बैंकिंग, यूपीआई, सोशल मीडिया, ई-मेल और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़ा हुआ है। यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर गलत हाथों में चला जाए तो उसकी वित्तीय और व्यक्तिगत सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती है।
जानकारों के अनुसार साइबर अपराधी विभिन्न तकनीकी और सामाजिक तरीकों का उपयोग कर मोबाइल नंबर को अपने नियंत्रण में लेने का प्रयास करते हैं। इसके बाद बैंक से आने वाले ओटीपी, सुरक्षा संदेश और सत्यापन कोड अपराधियों के पास पहुंचने लगते हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक इसकी जानकारी नहीं होती जब तक उसके खाते से रकम निकल नहीं जाती।
साइबर विशेषज्ञों ने नागरिकों को सावधान करते हुए कहा है कि यदि अचानक मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाए, फोन पर “नो सर्विस” या “नो नेटवर्क” दिखाई देने लगे, कॉल और संदेश आने बंद हो जाएं अथवा बैंकिंग सेवाओं से संबंधित कोई असामान्य गतिविधि दिखाई दे तो इसे सामान्य तकनीकी समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत अपने मोबाइल सेवा प्रदाता और बैंक से संपर्क करना आवश्यक है।
देशभर में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि लोग अपने मोबाइल नंबर को भी उतनी ही गंभीरता से सुरक्षित रखें जितनी अपने बैंक खाते और एटीएम कार्ड को रखते हैं।
■ क्या है सिम स्वैप फ्रॉड?
सिम स्वैप फ्रॉड में साइबर अपराधी मोबाइल कंपनी को गुमराह कर पीड़ित के मोबाइल नंबर को नई सिम पर सक्रिय करा लेते हैं। इसके बाद बैंक ओटीपी, यूपीआई सत्यापन और अन्य महत्वपूर्ण संदेश अपराधियों तक पहुंचने लगते हैं।
■ ये संकेत मिलें तो तुरंत हो जाएं सतर्क
- • अचानक मोबाइल नेटवर्क गायब हो जाना
- • कॉल और मैसेज का बंद हो जाना
- • बैंक से अनजान लेनदेन संबंधी संदेश
- • यूपीआई या नेट बैंकिंग लॉगिन में परेशानी
- • मोबाइल पर बार-बार ओटीपी आना
■ खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
- • मोबाइल नंबर पर अतिरिक्त सुरक्षा लॉक सक्रिय करें
- • बैंकिंग के लिए अलग मोबाइल नंबर रखें
- • किसी को भी ओटीपी साझा न करें
- • संदिग्ध कॉल और लिंक से बचें
- • बैंक खाते की नियमित निगरानी करें
■ जरूरी नंबर
राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन : 1930
ऑनलाइन शिकायत पोर्टल :
https://cybercrime.gov.in
संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत बैंक, मोबाइल सेवा प्रदाता और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
राइजिंग भास्कर की अपील
डिजिटल युग में मोबाइल नंबर केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि आपकी डिजिटल पहचान बन चुका है। इसकी सुरक्षा में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। जागरूक रहें, सुरक्षित रहें और अपने परिवार को भी साइबर अपराधियों के नए तरीकों से अवगत कराएं।




