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मानवता करे पुकार, रक्तदान करें बारब-बार… स्व. हरिशंकर सिंघानिया की 93वीं जयंती पर रक्तदान कर दी श्रद्धांजलि

93वीं जयंती पर जे.के. लक्ष्मी सीमेंट का विशाल रक्तदान शिविर, मानव सेवा के संदेश के साथ सैकड़ों लोगों ने किया रक्तदान

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

मानव सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और जनकल्याण के मूल्यों को आगे बढ़ाते हुए जे.के. ऑर्गेनाइजेशन एवं जे.के. लक्ष्मी सीमेंट ने उद्योगपति एवं प्रख्यात समाजसेवी स्वर्गीय श्री हरिशंकर सिंघानिया की 93वीं जयंती पर शुक्रवार को रक्तशाला, तीसरी चौपासनी रोड स्थित परिसर में विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर रक्तदान किया तथा मानव सेवा के इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी निभाई।

यह शिविर केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं था, बल्कि स्वर्गीय हरिशंकर सिंघानिया के जीवन मूल्यों और उनकी सेवा भावना को समाज तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास भी था। रक्तदान के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आयोजकों ने यह संदेश दिया कि किसी भी महान व्यक्तित्व को सच्ची श्रद्धांजलि उनके आदर्शों को अपनाकर ही दी जा सकती है।

मानव सेवा को समर्पित था हरिशंकर सिंघानिया का जीवन

आयोजकों ने बताया कि स्वर्गीय हरिशंकर सिंघानिया केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं थे, बल्कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गहराई से समझने वाले संवेदनशील व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने उद्योगों के विकास के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण के अनेक कार्यों को प्रोत्साहित किया।

उनका मानना था कि उद्योग केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के उत्थान और मानवीय मूल्यों के संवर्धन का भी साधन होना चाहिए। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उनकी जयंती पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, ताकि जरूरतमंद मरीजों को जीवनदायिनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

युवाओं में दिखा विशेष उत्साह

शिविर में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। बड़ी संख्या में युवा रक्तदान के लिए पहुंचे और उन्होंने न केवल स्वयं रक्तदान किया बल्कि अपने मित्रों और परिचितों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया। रक्तदान करने आए कई युवाओं ने कहा कि रक्तदान किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला सबसे बड़ा मानवीय योगदान है। उनका मानना था कि कुछ मिनट का समय देकर किसी अनजान व्यक्ति को जीवनदान देना समाज के प्रति सबसे बड़ी सेवा है। शिविर में पहली बार रक्तदान करने वाले युवाओं की संख्या भी काफी रही। चिकित्सा टीम ने उन्हें रक्तदान प्रक्रिया की जानकारी दी तथा उनकी शंकाओं का समाधान किया। इसके बाद उन्होंने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया।

स्वैच्छिक रक्तदान से बचाई जा सकती हैं हजारों जिंदगियां

महात्मा गांधी अस्पताल की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी तेज कंवर सांखला ने कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है। किसी भी मरीज को रक्त की आवश्यकता होने पर उसे केवल मानव रक्त से ही सहायता मिल सकती है। दुर्घटनाओं, गंभीर ऑपरेशनों, प्रसूति के दौरान होने वाले रक्तस्राव, थैलेसीमिया और कैंसर जैसे रोगों से जूझ रहे मरीजों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता पड़ती है।

ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है। रक्तदान शिविरों के माध्यम से रक्त बैंकों में पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध हो पाता है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

महात्मा गांधी अस्पताल की टीम ने दिया सहयोग

शिविर के सफल आयोजन में महात्मा गांधी अस्पताल की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकों, तकनीशियनों और स्वास्थ्यकर्मियों ने रक्त संग्रहण की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया। शिविर के दौरान रक्तदाताओं की स्वास्थ्य जांच की गई तथा सभी आवश्यक चिकित्सा मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया। अस्पताल की टीम ने रक्तदाताओं को रक्तदान से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी भी दी।

एक यूनिट रक्त से तीन लोगों का जीवन बच सकता है

इस अवसर पर महात्मा गांधी अस्पताल की तेज कंवर सांखला ने उपस्थित रक्तदाताओं को संबोधित करते हुए रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक यूनिट रक्त को विभिन्न घटकों—रेड ब्लड सेल्स, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स—में विभाजित किया जा सकता है। इस प्रकार एक व्यक्ति द्वारा दिया गया रक्त तीन अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और स्वस्थ व्यक्ति नियमित अंतराल पर रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती, बल्कि इससे शरीर में नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण की प्रक्रिया भी सक्रिय होती है।

उन्होंने सभी नागरिकों से वर्ष में कम से कम एक या दो बार रक्तदान करने का आह्वान किया और कहा कि यदि समाज का प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति नियमित रूप से रक्तदान करे तो रक्त की कमी से किसी मरीज की जान नहीं जाएगी।

रक्तदाताओं का किया गया सम्मान

शिविर में रक्तदान करने वाले सभी लोगों का सम्मान किया गया। आयोजकों ने कहा कि रक्तदाता समाज के वास्तविक नायक हैं क्योंकि वे निस्वार्थ भाव से किसी अनजान व्यक्ति के जीवन की रक्षा के लिए आगे आते हैं। रक्तदान करने वालों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। कई रक्तदाताओं ने भविष्य में भी नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प लिया।

कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी का उत्कृष्ट उदाहरण

जे.के. लक्ष्मी सीमेंट द्वारा आयोजित यह शिविर कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी माना जा रहा है। उद्योग जगत केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर सामाजिक सरोकारों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, इसका संदेश इस आयोजन के माध्यम से दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्योग समूह इसी प्रकार सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते रहें तो स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन संभव है।

रक्तदान: समाज को जोड़ने वाला अभियान

रक्तदान एक ऐसा अभियान है जो जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता को जोड़ता है। रक्त की आवश्यकता पड़ने पर मरीज की पहचान केवल एक जरूरतमंद इंसान के रूप में होती है। यही कारण है कि रक्तदान को महादान कहा जाता है। इस शिविर में भी यही भावना देखने को मिली। विभिन्न वर्गों और आयु समूहों के लोग एक ही उद्देश्य से एकत्रित हुए—किसी जरूरतमंद को जीवन देने के लिए।

मानव सेवा का संदेश देकर हुआ समापन

शिविर के समापन पर आयोजकों ने रक्तदाताओं, चिकित्सा टीम, सहयोगी संस्थाओं तथा उपस्थित नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी समाजहित और मानव सेवा से जुड़े ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

स्वर्गीय हरिशंकर सिंघानिया की 93वीं जयंती पर आयोजित यह रक्तदान शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक संदेश बनकर उभरा। रक्तदान करने वाले प्रत्येक व्यक्ति ने यह सिद्ध किया कि किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में आशा का संचार करने से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता। “रक्तदान – महादान, जीवनदान” के प्रेरक संदेश के साथ शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor