Explore

Search

Thursday, July 9, 2026, 12:08 am

Thursday, July 9, 2026, 12:08 am

LATEST NEWS

The specified slider does not exist.

Lifestyle

ब्रेकिंग न्यूज… सावधान! आपके पुराने ऑनलाइन शॉपिंग अकाउंट बन सकते हैं साइबर ठगों का निशाना

डोरमेंट ई-कॉमर्स अकाउंट स्कैम से बढ़ रहा खतरा, बैंक और साइबर विशेषज्ञों ने जारी की चेतावनी

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

डिजिटल युग में ऑनलाइन शॉपिंग हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। कपड़े, मोबाइल, दवाइयां, किराना और घरेलू सामान तक अब कुछ क्लिक में घर पहुंच जाते हैं। लेकिन सुविधा के इस दौर में साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके खोज रहे हैं।

हाल ही में बैंकों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसे “डोरमेंट ई-कॉमर्स अकाउंट स्कैम” कहा जा रहा है। यह स्कैम उन ऑनलाइन शॉपिंग अकाउंट्स को निशाना बनाता है, जिन्हें लोग कभी इस्तेमाल करते थे लेकिन अब लंबे समय से उपयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसे अकाउंट्स में अक्सर डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या अन्य भुगतान संबंधी जानकारी सेव रहती है।

साइबर ठग इन्हीं अकाउंट्स तक पहुंच बनाकर लोगों के बैंक खातों को चूना लगा रहे हैं।

क्या है डोरमेंट ई-कॉमर्स अकाउंट स्कैम?

डोरमेंट (Dormant) का अर्थ होता है निष्क्रिय या लंबे समय से उपयोग में नहीं लिया गया। जब कोई व्यक्ति किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अकाउंट बनाता है और उसमें अपने कार्ड या भुगतान संबंधी जानकारी सेव कर देता है, लेकिन बाद में उस अकाउंट का उपयोग बंद कर देता है, तो वह अकाउंट डोरमेंट अकाउंट कहलाता है। साइबर अपराधी ऐसे अकाउंट्स को निशाना बनाते हैं क्योंकि उपयोगकर्ता लंबे समय तक उनमें लॉगिन नहीं करते और उनकी गतिविधियों पर नजर भी नहीं रखते। यदि ठग किसी तरह उस अकाउंट का पासवर्ड प्राप्त कर लेते हैं, तो वे उसमें सेव भुगतान जानकारी का दुरुपयोग कर सकते हैं।

कैसे काम करता है यह साइबर फ्रॉड?

साइबर अपराधी कई तरीकों से लोगों के निष्क्रिय ऑनलाइन अकाउंट्स तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं।

1. डेटा ब्रीच और लीक हुए पासवर्ड का इस्तेमाल

कई बार विभिन्न वेबसाइटों के डेटाबेस हैक हो जाते हैं और लाखों लोगों के यूजरनेम तथा पासवर्ड इंटरनेट पर लीक हो जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति ने एक ही पासवर्ड कई जगह उपयोग किया है, तो अपराधी उसी पासवर्ड से ई-कॉमर्स अकाउंट में लॉगिन करने का प्रयास करते हैं।

2. फिशिंग लिंक और फर्जी संदेश

ठग ईमेल, एसएमएस या सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी लिंक भेजते हैं। उपयोगकर्ता जैसे ही उस लिंक पर क्लिक करता है, उसे नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है जहां उससे लॉगिन जानकारी मांगी जाती है। अनजाने में लोग अपना यूजरनेम और पासवर्ड दर्ज कर देते हैं।

3. मालवेयर और फर्जी एप्लिकेशन

कुछ अपराधी व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या अन्य माध्यमों से फर्जी APK फाइलें भेजते हैं। यदि उपयोगकर्ता इन्हें इंस्टॉल कर लेता है, तो मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी चोरी हो सकती है।

4. सिम स्वैपिंग का खतरा

कुछ मामलों में साइबर अपराधी मोबाइल नंबर पर नियंत्रण हासिल करने के लिए सिम स्वैपिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद वे OTP प्राप्त कर अकाउंट तक पहुंच बना लेते हैं।

5. ऑटोमेटेड साइबर हमले

आधुनिक साइबर अपराधी हजारों अकाउंट्स पर एक साथ हमला करने के लिए स्वचालित सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं। ये सिस्टम सामान्य उपयोगकर्ता जैसी गतिविधि दिखाते हैं ताकि सुरक्षा प्रणालियां उन्हें आसानी से पकड़ न सकें।

एक छोटी लापरवाही कैसे बन सकती है बड़ी समस्या?

अधिकांश लोग ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर सुविधा के लिए अपने कार्ड की जानकारी सेव कर देते हैं। कई बार महीनों या वर्षों तक उस अकाउंट का उपयोग नहीं किया जाता।

यदि कोई ठग ऐसे अकाउंट तक पहुंच बना लेता है तो वह:
  1. अनधिकृत खरीदारी कर सकता है।
  2. सेव किए गए कार्ड का दुरुपयोग कर सकता है।
  3. रिवार्ड पॉइंट्स और वाउचर का इस्तेमाल कर सकता है।
  4. खाते से जुड़े व्यक्तिगत डेटा की चोरी कर सकता है।
  5. अन्य ऑनलाइन सेवाओं तक भी पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है।

चूंकि उपयोगकर्ता अकाउंट को नियमित रूप से चेक नहीं करता, इसलिए धोखाधड़ी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आती।

भारत में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध

भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में शामिल है। ऑनलाइन भुगतान और ई-कॉमर्स के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों में भी वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की सबसे बड़ी गलती एक ही पासवर्ड का कई प्लेटफॉर्म पर उपयोग करना है। यदि एक जगह से जानकारी लीक हो जाए तो अपराधी कई अन्य खातों तक पहुंच बनाने में सफल हो जाते हैं।

बैंकों की बढ़ी चिंता

बैंक और वित्तीय संस्थान लगातार ग्राहकों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे हैं। कई बैंक अब संदिग्ध लेनदेन की स्थिति में ग्राहकों को फोन कॉल और अलर्ट भेजते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी ग्राहक को बैंक की ओर से संदिग्ध ट्रांजैक्शन के संबंध में कॉल आए, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर प्रतिक्रिया देने से बड़े वित्तीय नुकसान को रोका जा सकता है।

कैसे पहचानें कि आपका अकाउंट खतरे में है?

यदि आपके साथ निम्न घटनाएं हो रही हैं तो सतर्क हो जाइए:
  1. बिना कारण OTP आना।
  2. पासवर्ड रीसेट से जुड़े ईमेल प्राप्त होना।
  3. अनजान लॉगिन अलर्ट मिलना।
  4. बैंक खाते से छोटी-छोटी राशि कटना।
  5. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदारी की सूचना आना जबकि आपने कोई ऑर्डर नहीं किया हो।

ऐसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
  1. मजबूत पासवर्ड बनाएं
  2. पासवर्ड कम से कम 12 से 16 अक्षरों का होना चाहिए जिसमें बड़े और
  3. छोटे अक्षर, अंक और विशेष चिन्ह शामिल हों।
  4. हर अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखें
  5. यदि एक पासवर्ड चोरी हो जाए तो अन्य अकाउंट सुरक्षित रहेंगे।
  6. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू करें
  7. यह अतिरिक्त सुरक्षा परत प्रदान करता है और केवल पासवर्ड के आधार पर अकाउंट एक्सेस करना मुश्किल बना देता है।
  8. पुराने अकाउंट्स की समीक्षा करें
  9. जो ई-कॉमर्स अकाउंट अब उपयोग में नहीं हैं, उन्हें बंद कर दें या उनमें
  10. सेव कार्ड डिटेल्स हटा दें।
  11. संदिग्ध लिंक से बचें
  12. किसी भी अनजान लिंक, ईमेल या संदेश पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें।
  13. केवल आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें
  14. हमेशा Google Play Store या Apple App Store जैसे विश्वसनीय स्रोतों से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें।
  15. OTP और CVV किसी को न बताएं
  16. बैंक, RBI या कोई भी वैध संस्था कभी फोन पर OTP, PIN, CVV या पासवर्ड नहीं मांगती।

यदि आपके साथ धोखाधड़ी हो जाए तो क्या करें?

यदि आपको संदेह हो कि आपके खाते का दुरुपयोग हुआ है:
  1. तुरंत पासवर्ड बदलें।
  2. बैंक को सूचित करें।
  3. संबंधित कार्ड ब्लॉक करवाएं।
  4. सभी लॉगिन सत्र समाप्त करें।
  5. साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
  6. राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत करें।
  7. ई-कॉमर्स कंपनी के ग्राहक सहायता केंद्र से संपर्क करें।
  8. जितनी जल्दी कार्रवाई की जाएगी, नुकसान को उतना ही कम किया जा सकेगा।
डिजिटल सुविधा के साथ डिजिटल जिम्मेदारी भी जरूरी

ऑनलाइन शॉपिंग ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ सतर्कता भी उतनी ही आवश्यक है। निष्क्रिय पड़े ई-कॉमर्स अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं। थोड़ी सी सावधानी, मजबूत पासवर्ड, नियमित निगरानी और समय-समय पर अकाउंट की समीक्षा आपको बड़े वित्तीय नुकसान से बचा सकती है।

डोरमेंट ई-कॉमर्स अकाउंट स्कैम नया गंभीर खतरा, इसे अनदेखी ना करें

डोरमेंट ई-कॉमर्स अकाउंट स्कैम आज के डिजिटल दौर का एक नया और गंभीर खतरा है। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके खोज रहे हैं, इसलिए केवल तकनीक पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। जागरूकता, सतर्कता और सुरक्षा नियमों का पालन ही सबसे बड़ा बचाव है।

याद रखें — आपका पुराना और भूला हुआ ऑनलाइन शॉपिंग अकाउंट भी साइबर ठगों के लिए सोने की खान साबित हो सकता है। इसलिए आज ही अपने सभी ई-कॉमर्स अकाउंट्स की समीक्षा करें और उन्हें सुरक्षित बनाएं।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor