‘योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मोन्नति और ईश्वरप्राप्ति का मार्ग है’ – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले
राइजिंग भास्कर. फरीदाबाद
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सेक्टर-85 स्थित योगा पार्क में आयोजित विशेष योग कार्यक्रम में 250 से अधिक योगसाधकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आयोजक डॉ. मोहन दत्त एवं रवि दुबे ने उनका पुष्पगुच्छ एवं सम्मानचिह्न देकर सत्कार किया।
अपने प्रेरणादायी प्रबोधन में सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगले ने कहा कि योग केवल शरीर और मन को स्वस्थ रखने का साधन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति एवं ईश्वरप्राप्ति का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने बताया कि शरीर का संचालन प्राणों से, प्राणों का नियंत्रण इंद्रियों से तथा इंद्रियों पर नियंत्रण के लिए मन पर विजय आवश्यक है। यहीं से व्यक्ति की वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ होती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि योगाभ्यास के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को सम्मान मिलने पर मन में ईर्ष्या, क्रोध अथवा स्पर्धा का भाव उत्पन्न होता है, तो इसका अर्थ है कि शरीर पर नियंत्रण होने के बावजूद मन अभी पूर्णतः संयमित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अहंकार, ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा जैसे विकार ही मनुष्य के वास्तविक शत्रु हैं।
सद्गुरु पिंगले ने कहा कि जहां पाश्चात्य संस्कृति व्यक्ति को अहंकार और प्रतिस्पर्धा की ओर प्रेरित करती है, वहीं सनातन धर्म दूसरों के सुख में सुख अनुभव करने तथा दूसरों के दुःख में सहभागी बनने की शिक्षा देता है। यही भाव वास्तविक आनंद और आध्यात्मिक उन्नति का आधार है।
प्रबोधन के पश्चात उपस्थित साधकों एवं जिज्ञासुओं ने योग, साधना और अध्यात्म से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका सद्गुरु पिंगले ने सरल एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से समाधान करते हुए साधना के विविध आयामों पर मार्गदर्शन किया।







