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Thursday, July 9, 2026, 2:16 am

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एसबीआई फाउंडेशन एवं उरमूल ट्रस्ट की अनूठी पहल

एसबीआई सम्मान के माध्यम से युद्ध नायक लांस नायक भैरों सिंह राठौड़ की जीवंत विरासत कार्यक्रम आयोजित
लोंगेवाला युद्ध के वीर सपूत के गांव का हो रहा है विकास

राइजिंग भास्कर. शेरगढ़. जोधपुर

राजस्थान वीरों और शूरवीरों की भूमि रही है। इन्हीं वीरों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लांस नायक भैरों सिंह राठौड़ का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है, जिन्होंने वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के ऐतिहासिक लोंगेवाला युद्ध में अद्वितीय साहस, वीरता और राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया।

देश के प्रति उनके उत्कृष्ट योगदान और वीरता के लिए उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया। उनकी वीरगाथा को वर्ष 1997 में प्रदर्शित हुई प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म ‘बॉर्डर’ के माध्यम से अमर कर दिया गया, जिसमें अभिनेता सुनील शेट्टी ने उनके किरदार को निभाकर उनकी बहादुरी और बलिदान की कहानी को देशभर के करोड़ों लोगों तक पहुँचाया। 19 दिसंबर 2022 को उनका निधन हो गया। राष्ट्र के प्रति उनकी असाधारण सेवाओं के सम्मान में उन्हें उनके पैतृक गांव में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

उनकी वीरता, देशभक्ति और निःस्वार्थ सेवा की विरासत आज भी युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती है। इसी अमूल्य विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से एसबीआई फाउंडेशन ने अपने विशेष सीएसआर कार्यक्रम ‘एसबीआई सम्मान –राष्ट्रीय नायकों को श्रद्धांजलि’ के अंतर्गत उनके पैतृक गांव सूर्योदय नगर (सोलंकिया तला) में विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों की शुरुआत की। इस पहल का क्रियान्वयन उरमूल ट्रस्ट द्वारा बापूनगर ग्राम पंचायत के सक्रिय सहयोग से किया जा रहा है।

इस परियोजना के अंतर्गत युवाओं को सेना, अग्निवीर, पुलिस एवं अन्य सेवाओं में भर्ती के लिए तैयार करने हेतु ‘लांस नायक भैरों सिंह राठौड़ यूथ ट्रेनिंग अकादमी’ की स्थापना की गई है। अकादमी में शारीरिक प्रशिक्षण, शैक्षणिक कोचिंग तथा दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रशिक्षुओं के लिए आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

अब तक 200 से अधिक युवा इस अकादमी से लाभान्वित हो चुके हैं, जिनमें से कई युवा अग्निवीर एवं अन्य सेवाओं में चयनित होकर राष्ट्रसेवा की राह पर अग्रसर हुए हैं। परियोजना के माध्यम से गांव में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अंतर्गत विद्यालयों एवं आंगनवाड़ियों का उन्नयन, महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना तथा ग्रामीणों के लिए डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइटें, ओपन जिम और पेयजल सुविधाओं जैसी पहल ने ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस पहल के बारे में जानकारी देते हुए स्वप्न धर, प्रबंध निदेशक, एसबीआई फाउंडेशन ने कहा, “ऐसे महान युद्ध नायक को सार्थक विकास कार्यों के माध्यम से श्रद्धांजलि देना हमारे लिए गर्व और जिम्मेदारी दोनों का विषय है। हमें विश्वास है कि यह पहल क्षेत्र के युवाओं को प्रेरित करती रहेगी और साहस, देशभक्ति तथा राष्ट्रसेवा की भावना को जीवित रखेगी।”

परियोजना के शुभारंभ अवसर पर एम. एल. गर्ग, महानिरीक्षक, बीएसएफ राजस्थान फ्रंटियर मुख्यालय ने कहा था, “एसबीआई फाउंडेशन की यह एक अभिनव पहल है, जो बैंकिंग सेवाओं से आगे बढ़कर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की दिशा में कार्य कर रही है। लांस नायक भैरों सिंह हमारे फ्रंटियर का गौरव हैं और उनकी स्मृति में किए जा रहे प्रयासों में हम भी सहयोग करेंगे। मैं अन्य कॉर्पोरेट संस्थानों और संगठनों से भी आग्रह करता हूं कि वे एसबीआई फाउंडेशन द्वारा शुरू किए गए इस अभियान से जुड़कर ऐसे अनसुने नायकों के गांवों के विकास में योगदान दें।”
रमेश सारण, सचिव, उरमूल ट्रस्ट ने कहा, “लांस नायक भैरों सिंह राठौड़ जैसे युद्ध नायक को समर्पित इस पहल का हिस्सा बनना हमारे लिए सम्मान की बात है। समुदाय से मिल रहे सकारात्मक सहयोग और युवाओं तथा महिलाओं के लिए उत्पन्न हो रहे नए अवसर यह दर्शाते हैं कि यह प्रयास उनकी प्रेरणादायक विरासत को आगे बढ़ाने में सफल हो रहे हैं।”
सवाई सिंह राठौड़, लांस नायक भैरों सिंह राठौड़ के पुत्र ने कहा,
“हमारा परिवार इस बात से अत्यंत भावुक और गौरवान्वित है कि मेरे पिता की राष्ट्रसेवा और बलिदान को इस प्रकार सम्मानित किया जा रहा है। हमें प्रसन्नता है कि इन पहलों से गांव के लोगों को लाभ मिलेगा और उनके आदर्श सदैव जीवित रहेंगे।”

एसबीआई सम्मान यह दर्शाता है कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलें किस प्रकार राष्ट्रीय नायकों की विरासत को सम्मान देते हुए समाज में सार्थक और स्थायी विकास ला सकती हैं। अधिक से अधिक संस्थानों और संगठनों को ऐसे प्रभावशाली प्रयासों से जुड़कर राष्ट्र के गौरवशाली नायकों की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने में योगदान देना चाहिए।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor