एक लाख रुपये की लागत से दो पानी के टांके और एक जल कुंड का निर्माण शुरू, ‘एक शाम पक्षियों के नाम’ कार्यक्रम से जुटे सहयोग को जनसेवा में किया समर्पित
दिलीप कुमार पुरोहित | खाराबेरा पुरोहितान
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प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण की भावना को साकार करते हुए जोगमाया चुग्गा संघ ने एक बार फिर समाज के सामने सेवा, संवेदना और पर्यावरण संरक्षण का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। संघ की ओर से रविवार को खाराबेरा पुरोहितान एवं आसपास के क्षेत्रों में बेजुबान पक्षियों, वन्य जीवों तथा गौमाता के लिए लगभग एक लाख रुपये की लागत से दो पानी के टांकों तथा एक जल कुंड के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया।
इस पहल का उद्देश्य भीषण गर्मी के दिनों में पेयजल की कमी से जूझ रहे पक्षियों और वन्य जीवों को राहत प्रदान करना तथा उनके लिए स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ते तापमान और जल स्रोतों के सूखने से हर वर्ष हजारों पक्षियों और वन्य जीवों को पानी के अभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में जोगमाया चुग्गा संघ द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल जीवों की प्यास बुझाने का माध्यम बनेगा, बल्कि समाज में जीवदया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरण का भी संदेश देगा।
संघ के सदस्य एवं वार्ड पंच किशोर सिंह राठौड़ ने बताया कि जोगमाया चुग्गा संघ पिछले कई वर्षों से निस्वार्थ भाव से बेजुबान जीवों की सेवा में कार्यरत है। संघ का मुख्य उद्देश्य केवल पक्षियों को दाना-पानी उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि समाज में प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना भी है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष “एक शाम पक्षियों के नाम” भजन संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाजसेवी और भामाशाह भाग लेते हैं।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं एवं समाजसेवियों द्वारा स्वेच्छा से दिया गया आर्थिक सहयोग पूरी पारदर्शिता के साथ जनहित के कार्यों में लगाया जाता है। इसी सहयोग राशि से हर वर्ष गांवों और आसपास के क्षेत्रों में पक्षियों, वन्य जीवों और गौवंश के लिए पानी की टंकियां, जल कुंड, चुग्गा पात्र तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाती हैं। इस वर्ष भी प्राप्त सहयोग राशि से लगभग एक लाख रुपये की लागत से दो नए पानी के टांकों तथा एक जल कुंड का निर्माण प्रारंभ किया गया है।
किशोर सिंह राठौड़ ने बताया कि इन जल संरचनाओं के निर्माण से गर्मी के मौसम में हजारों पक्षियों, मोर, कबूतर, गौरैया, तोता, मैना सहित विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा। साथ ही नीलगाय, हिरण, खरगोश तथा अन्य वन्य जीवों के साथ गौवंश को भी इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब प्राकृतिक जल स्रोत सूख जाते हैं, तब ऐसी स्थायी जल व्यवस्थाएं बेजुबान जीवों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरणीय असंतुलन, जल संकट और बढ़ते तापमान के कारण जीव-जंतुओं के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो रहा है। ऐसे में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। यदि प्रत्येक गांव, ढाणी और मोहल्ले में लोग पक्षियों के लिए दाना-पानी तथा पशुओं के लिए जल की व्यवस्था करें, तो हजारों बेजुबान जीवों का जीवन बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों ने जोगमाया चुग्गा संघ के इस सेवा अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि मानवता और जीवदया का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि समाज के सामूहिक सहयोग से किए गए ऐसे कार्य आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा देंगे।
संघ के अध्यक्ष लादूराम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जोगमाया चुग्गा संघ का प्रत्येक सदस्य सेवा भावना से प्रेरित होकर कार्य करता है। संघ का प्रयास रहता है कि समाज से प्राप्त प्रत्येक सहयोग राशि का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ जनहित एवं जीव सेवा के कार्यों में किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान केवल उसके विकास कार्यों से नहीं होती, बल्कि इस बात से भी होती है कि वह अपने से कमजोर और असहाय प्राणियों के प्रति कितना संवेदनशील है।
उन्होंने सभी भामाशाहों, सहयोगकर्ताओं एवं ग्रामीणों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना यह सेवा अभियान संभव नहीं हो पाता। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी समाज का इसी प्रकार सहयोग मिलता रहेगा और संघ जीव-जंतुओं के लिए और अधिक व्यापक स्तर पर सेवा कार्य करता रहेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि गांवों में अधिक से अधिक स्थानों पर जल कुंड, परिंडे और चुग्गा पात्र लगाए जाएं, ताकि गर्मी के दिनों में किसी भी पक्षी या पशु को पानी के लिए भटकना न पड़े। साथ ही युवाओं को भी ऐसे सेवा कार्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इस अवसर पर सोहन दास (अध्यापक), नारायण राम (अध्यापक), धनराज, राजूराम, शैलाराम, शेषाराम, मोहनराम, चेतनराम, पदम सिंह, मिठू सिंह, बिहारीलाल, मेहताब सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने निर्माण कार्य का अवलोकन किया और इस जनहितकारी पहल को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
ग्रामीणों का मानना है कि जोगमाया चुग्गा संघ ने जिस प्रकार समाज को साथ लेकर जीव सेवा का अभियान चलाया है, वह अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। यदि इसी तरह प्रत्येक गांव में स्थानीय स्तर पर समाज के सहयोग से जल संरक्षण और जीव संरक्षण के कार्य किए जाएं, तो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ जीव-जंतुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
गौरतलब है कि राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेश में गर्मियों के दौरान तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसे में जल स्रोतों के सूख जाने से सबसे अधिक परेशानी बेजुबान पक्षियों और वन्य जीवों को होती है। इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में जोगमाया चुग्गा संघ जैसे सामाजिक संगठनों की पहल न केवल जीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, बल्कि समाज में सेवा, संवेदना और पर्यावरण संरक्षण की नई चेतना भी जागृत कर रही है। यही कारण है कि संघ का यह अभियान अब केवल एक गांव तक सीमित न रहकर आसपास के क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है।
Author: Dilip Purohit
Group Editor





