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Thursday, July 9, 2026, 1:53 am

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कविता में है समाज को बदलने और आतंकवाद को समाप्त करने की शक्ति: डॉ. दशरथ कुमार सोलंकी

खुशदिलान-ए-जोधपुर संस्थान की काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने कविता, गीत और विचारों से बांधा समां, पूर्व जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने अफसरशाही पर जताई चिंता, डॉ. पद्मजा शर्मा ने बिटिया की विदाई गीत से भावुक किया श्रोताओं को

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला सशक्त माध्यम है। जब संवेदनशील रचनाकार एक मंच पर एकत्र होते हैं तो विचारों का ऐसा प्रवाह उत्पन्न होता है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन सकता है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए खुशदिलान-ए-जोधपुर संस्थान की ओर से रविवार को इंडिगो पब्लिक स्कूल में भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में शहर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों, गीतकारों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कविता, गीत, गजल और विचारोत्तेजक वक्तव्यों से सजा यह आयोजन साहित्यिक गरिमा और सामाजिक सरोकारों का सुंदर संगम बन गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पद्मजा शर्मा थीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दशरथ कुमार सोलंकी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने की। आयोजन के मेजबान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट एन.डी. निंबावत ने सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

पारंपरिक स्वागत से हुआ आयोजन का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संस्कृति की गरिमा के अनुरूप हुआ। इंडिगो पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर सुदर्शन अरोड़ा ने मुख्य अतिथि, अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि सहित मंचासीन सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर एवं तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया। तुलसी का पौधा भेंट कर आयोजकों ने पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का संदेश भी दिया।

 

मंच पर संस्थान के अध्यक्ष संदीप भांडावत, संरक्षक किशनलाल गर्ग तथा के.एन. भंडारी की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

सरस्वती वंदना से बना आध्यात्मिक वातावरण

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन कपिल रांकावत और नीना रांकावत ने अत्यंत आत्मीय और साहित्यिक शैली में किया। उन्होंने सबसे पहले राखी पुरोहित को सरस्वती वंदना के लिए आमंत्रित किया। उनकी मधुर प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। इसके बाद उन्होंने “दुनिया ज़हर पिलाही रही, हम अमृत लुटाते रहे” गीत प्रस्तुत कर मानवता, प्रेम और सकारात्मक सोच का संदेश दिया। गीत को श्रोताओं ने खूब सराहा और तालियों की गूंज से सभागार देर तक गूंजता रहा।

कविता आतंकवाद के विरुद्ध सबसे बड़ी शक्ति है: डॉ. दशरथ कुमार सोलंकी

विशिष्ट अतिथि डॉ. दशरथ कुमार सोलंकी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि आतंकवाद जैसी गंभीर समस्या का समाधान केवल हथियारों और सैन्य शक्ति से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, संवेदना, संवाद और मानवीय मूल्यों का विस्तार ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

उन्होंने कहा कि “कविता में वह ताकत है जो मनुष्य के हृदय को बदल सकती है। जब विचार बदलते हैं तो समाज बदलता है और जब समाज बदलता है तो हिंसा स्वतः समाप्त होने लगती है।”

उन्होंने इतिहास और साहित्य से अनेक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि महान कवियों और साहित्यकारों ने अपने लेखन के माध्यम से समाज में क्रांति, जागृति और मानवीय चेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि मनुष्य को बेहतर इंसान बनाना भी है।

अपने उद्बोधन के बाद डॉ. सोलंकी ने ग्रामीण जीवन की आत्मीयता, पारिवारिक रिश्तों और गांव की सहज संस्कृति पर आधारित अपनी भावपूर्ण कविता सुनाई। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

अफसरशाही पर पूर्व जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास की बेबाक टिप्पणी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने अपने संबोधन में देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर खुलकर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश की नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में नौकरशाही की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आज भी प्रशासनिक व्यवस्था पर उसका व्यापक प्रभाव है।

उन्होंने कहा कि देश की अनेक समस्याओं के लिए प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को लेकर भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाए जाते हैं, उनसे वे सहमत नहीं हैं। उनका कहना था कि न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और उस पर जनता का विश्वास बना रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक प्रेरणादायक गीत प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

डॉ. पद्मजा शर्मा ने भावुक कर दिया सभागार

मुख्य अतिथि डॉ. पद्मजा शर्मा ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ में बिटिया की विदाई पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। गीत में बेटी के स्नेह, परिवार से उसके भावनात्मक जुड़ाव और विदाई के मार्मिक क्षणों का अत्यंत संवेदनशील चित्रण था। उनकी प्रस्तुति ने सभागार में उपस्थित अनेक श्रोताओं की आंखें नम कर दीं। गीत समाप्त होने पर पूरा सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा।

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं को जीवित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। कविता मनुष्य को भीतर से समृद्ध बनाती है और उसे समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देती है।

कवियों ने विविध विषयों पर सुनाई रचनाएं

काव्य गोष्ठी में अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच से हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, वीर रस, देशभक्ति, सामाजिक विसंगतियों, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक मूल्यों, नारी सम्मान और मानवीय संवेदनाओं जैसे विविध विषयों पर कविताओं एवं गीतों का पाठ किया गया।

इस अवसर पर प्रमोद वैष्णव, कमल शर्मा, छगनराज राव, राजेश भार्गव, आर.एस. राठौड़, मर्यादा कुमार कोठारी, श्रीमती चांदकौर जोशी, ओ.पी. वर्मा, राजेंद्र खिंवसरा, महेश पंवार, जिनेंद्र कोठारी, शिवप्रकाश अरोड़ा, जुगलकिशोर सारस्वत, अशफाक अहमद फौजदार, हबीब कैफी, रजा मोहम्मद खान, पूजा अग्रवाल, यशोदा माहेश्वरी, दीपा परिहार, सीमा जोशी मूथा, रजनी अग्रवाल, बसंती पंवार, डॉ. तृप्ति गोस्वामी तथा एडवोकेट एन.डी. निंबावत सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया।

हर प्रस्तुति के बाद श्रोताओं की तालियों ने कवियों का उत्साह बढ़ाया। साहित्यकारों ने अपने लेखन के माध्यम से सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।

साहित्य समाज को जोड़ने का माध्यम

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में साहित्य की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। डिजिटल युग में जहां संवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, वहीं कविता और साहित्य मनुष्य की संवेदनाओं को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं। साहित्य समाज में प्रेम, सहिष्णुता, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करता है।

आयोजकों और विद्यालय परिवार की सराहना

कार्यक्रम के सफल आयोजन में इंडिगो पब्लिक स्कूल के समस्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों का उल्लेखनीय योगदान रहा। पूरे आयोजन के दौरान विद्यालय परिवार ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों की उत्कृष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की। आयोजन के अंत में स्कूल के डायरेक्टर सुदर्शन अरोड़ा ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, प्रतिभागियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक चेतना का विस्तार करते हैं।

इस अवसर पर कार्यक्रम का सफल संचालन करने वाले कपिल रांकावत और नीना रांकावत का भी सम्मान किया गया। आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न एवं शुभकामनाएं देकर सम्मानित किया।

साहित्यिक चेतना का प्रेरक आयोजन

करीब कई घंटों तक चले इस साहित्यिक आयोजन ने यह संदेश दिया कि कविता केवल मंचीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने और सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देने वाली शक्ति है। कार्यक्रम ने साहित्य प्रेमियों को न केवल उत्कृष्ट रचनाओं का रसास्वादन कराया, बल्कि समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के प्रति नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच भी प्रदान की। अंत में सभी ने ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया, ताकि साहित्य की यह ज्योति निरंतर समाज को आलोकित करती रहे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor