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Thursday, July 9, 2026, 12:12 am

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कृत्रिम बुद्धिमता के साथ इंसान की बुद्धि का साथ जुड़ जाए तो एआई की सार्थकता : पूर्व मुख्य न्यायाधीश विनीत कोठारी

मरुधरा टैक्स बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन होटल श्रीराम इंटरनेशनल में जारी है, न्यायपालिका, कर प्रशासन और एआई विशेषज्ञ एक मंच पर भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। 
सम्मेलन में पूर्व मुख्य न्यायाधीश विनीत कोठारी ने कहा कि आज एआई हर क्षेत्र में हावी हो रहा है। एआई को अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है और वह निरंतर अपने को अपडेट करता रहता है। लेकिन एआई के खतरों से भी सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ को जिस प्रकार की जरूरत होती है, उसी तरह एआई का उपयोग कर काम को आसान किया जा सकता है। उन्होंने एआई और न्यायपालिका और एआई और टैक्सेसन विषय पर अपने सारगर्भित विचार रखे। 
सम्मेलन के चेयरमैन सीए अनिल जैन ने आरंभ में अतिथियों का परिचय करवाया। एडवोकेट पी.एम. चोपड़ा (अध्यक्ष, मरुधरा टैक्स बार एसोसिएशन) और एडवोकेट रणजीत जोशी (अध्यक्ष, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन) ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। सीए अनिल जैन और पीएम चौपड़ा ने टैक्सेसन को लेकर सार्थक विचार व्यक्त किए और जैन ने कहा कि आयकर को लेकर जो हौव्वा बनाया गया है, उस हौव्वे को कम करने के लिए सरकार को प्रयास करना चाहिए। 

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

पूर्व मुख्य न्यायाधीश विनीत कोठारी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता और इंसान की बुद्धि का जब साथ मिलेगा तो इस संगम से काम में आसानी होगी। आज हर क्षेत्र में एआई हावी होता जा रहा है। लेकिन कृत्रिमता के साथ नेचुरल बुद्धि का साथ जरूरी है। तभी कोई मशीन सफल हो सकती है। वे रविवार को होटल श्रीराम इंटरनेशनल में बदलते डिजिटल दौर में कर व्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के बढ़ते प्रभाव को लेकर राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। सम्मेलन मरुधरा टैक्स बार एसोसिएशन, वेस्टर्न राजस्थान, जोधपुर के तत्वावधान में आयोजित किया गया। पंक्तियां लिखे जाने तक होटल श्रीराम इंटरनेशनल में कार्यक्रम जारी था।

जोधपुर में “Taxation & Artificial Intelligence” विषय पर कॉन्फ्रेंस में देश भर से विशेष होटल श्रीराम इंटरनेशनल में जुटे हैं। सुबह 9:00 बजे कार्यक्रम आरंभ हो गया जो शाम 5:00 बजे तक चलेगा। इस सम्मेलन में देशभर के प्रतिष्ठित न्यायविद, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कर विशेषज्ञ, जीएसटी विशेषज्ञ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मंथन कर रहे हैं।

यह सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब एआई कर प्रशासन, ऑडिट, अनुपालन, टैक्स प्लानिंग और कानूनी शोध के तरीकों को तेजी से बदल रहा है। ऐसे में कर पेशे से जुड़े लोगों के लिए यह कार्यक्रम नई तकनीकों को समझने और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर साबित हो रहा है।

टैक्सेशन और एआई के संगम पर हो रही गहन चर्चा

सम्मेलन का मुख्य विषय “Navigating the Future of Taxation, Law and Technology” था जिस पर वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इसका उद्देश्य यह समझना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में टैक्स कानूनों, जीएसटी, प्रत्यक्ष कर, श्रम कानून तथा न्यायिक प्रक्रियाओं को किस प्रकार प्रभावित करेगा।
विशेषज्ञ इस बात पर भी चर्चा कर रहे हैं कि एआई की सहायता से कर सलाह, दस्तावेज़ विश्लेषण, मुकदमों की तैयारी, डेटा एनालिटिक्स और कर अनुपालन को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी कैसे बनाया जा सकता है। साथ ही एआई के उपयोग से जुड़े कानूनी, नैतिक और गोपनीयता संबंधी मुद्दों पर भी विचार-विमर्श चल रहा है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश विनीत कोठारी ने की सार्थक चर्चा
सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विनीत कोठारी (पूर्व मुख्य न्यायाधीश) ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि एआई वो हथियार है जिसका सदुपयोग किया जाए तो हमारे लिए काम का है। आज हर विशेषज्ञ एआई का उपयोग कर रहे हैं। मैं भी एआई का उपयोग करता हूं। लेकिन एक न्यायाधीश को यह नहीं भूलना चाहिए कि केस वाकई केस होता है। जजमेंट करते समय एआई का उपयोग सोच समझकर करना चाहिए। क्योंकि यह किसी के भविष्य का सवाल है और न्याय की रक्षा का सवाल है। न्याय जरूरी है, इसलिए एआई की सीमाओं का ध्यान रखना चाहिए।
विशिष्ट अतिथियों में ओ.एस. आशीया (पूर्व सदस्य, राजस्थान टैक्स बोर्ड), तथा सीस्टेट ट्रिब्यूनल के सदस्य विशेष आमंत्रित सदस्यों ने भी विचार व्यक्त किए। विशेषज्ञों की उपस्थिति ने प्रतिभागियों को नीति निर्माण, कर प्रशासन और न्यायिक दृष्टिकोण को समझने का अवसर दिया।

देशभर के विशेषज्ञ दे रहे व्याख्यान

सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। प्रत्यक्ष कर विशेषज्ञ एडवोकेट एस.एल. जैन (जयपुर) ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रत्यक्ष कर व्यवस्था पर सार्थक चर्चा हुई। जीएसटी और मुकदमेबाजी पर एडवोकेट प्रेरणा चोपड़ा (दिल्ली) ने विचार व्यक्त् किए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर बताया गया कि एआई कैसे कर सलाहकारों और अधिवक्ताओं के कार्य करने के तरीके को बदल रहा है।

इसके अतिरिक्त श्रम कानून एवं प्रत्यक्ष कर पर तथा सामाजिक संगठनों एवं गैर-सरकारी संस्थाओं से जुड़े कर प्रावधानों पर प्रकाश डाला गया।  कार्यक्रम में अनुभवी विधि विशेषज्ञों और कर सलाहकारों ने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन के चेयरमैन सीए अनिल जैन ने आरंभ में अतिथियों का परिचय करवाया और कहा कि एआई को आगे बढ़ाने का काम यंगस्टर कर रहे हैँ। उन्होंने कहा कि वे इस बात से सहमत नहीं है कि यंगस्टर एआई का मिस्यूज कर रहे हैँ। एडवोकेट पी.एम. चोपड़ा (अध्यक्ष, मरुधरा टैक्स बार एसोसिएशन), एडवोकेट रणजीत जोशी (अध्यक्ष, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन) ने भी सभी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।

प्रतिष्ठित संस्थाएं सहयोग कर रही : 

सम्मेलन को कई प्रतिष्ठित संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है। एसबीसी लीगल एलएलपी (SBC Legal LLP) नॉलेज पार्टनर तथा विदुर एआई (Vidur AI) टेक्नोलॉजी पार्टनर हैं। इसके अलावा राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, आईटीएटी बार एसोसिएशन तथा लघु उद्योग भारती भी इस आयोजन से जुड़े हुए हैं। इससे सम्मेलन का राष्ट्रीय महत्व और अधिक बढ़ गया है।

कर पेशे के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?

आज कर कानूनों में लगातार बदलाव हो रहे हैं और डिजिटल तकनीक तेजी से पेशेवर कार्यशैली को बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दस्तावेजों का विश्लेषण, केस रिसर्च, टैक्स प्लानिंग, जोखिम मूल्यांकन और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे में अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कर सलाहकारों और विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार का सम्मेलन अत्यंत उपयोगी साबित हो रहा है। यहां उन्हें विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने, नवीनतम तकनीकों को समझने और बदलते कानूनी परिवेश के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर मिल रहा है।

जोधपुर बना राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र

मरुधरा टैक्स बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह सम्मेलन केवल एक पेशेवर कार्यक्रम नहीं, बल्कि कर कानून और आधुनिक तकनीक के भविष्य पर राष्ट्रीय स्तर का विचार मंच बना।

देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले विशेषज्ञों की भागीदारी से जोधपुर एक दिन के लिए कर, कानून और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के राष्ट्रीय विमर्श का केंद्र बन गया है। डिजिटल युग में कर व्यवस्था तेजी से तकनीक आधारित हो रही है। ऐसे समय में “Taxation & Artificial Intelligence” विषय पर आयोजित यह सम्मेलन कर पेशे से जुड़े लोगों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई कर प्रशासन और विधिक सेवाओं का अभिन्न हिस्सा बनेगा, इसलिए इस परिवर्तन को समझना और अपनाना समय की आवश्यकता है। जोधपुर में आयोजित यह सम्मेलन इसी दिशा में एक प्रभावी और दूरदर्शी कदम साबित हो रहा है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor