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Wednesday, July 8, 2026, 11:23 pm

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हास्य, संवेदना और अपनत्व का अनूठा संगम: अनुबंध वृद्धजन कुटीर पहुंचे देश के प्रतिष्ठित कवि

सुरेन्द्र शर्मा, चिराग जैन और सर्वेश अस्थाना ने वृद्धजनों से की आत्मीय मुलाकात, कविता, संवाद और स्नेह से भर दिया पूरा वातावरण

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं होता, बल्कि वह संवेदनाओं को जोड़ने और मानवता को सशक्त बनाने का सशक्त माध्यम भी है। इसी भावना को साकार करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा, वरिष्ठ कवि चिराग जैन तथा प्रतिष्ठित कवि सर्वेश अस्थाना रविवार को जोधपुर के निम्बा-निंबड़ी स्थित अनुबंध वृद्धजन कुटीर पहुंचे। यहां उन्होंने अनुबंध परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से आत्मीय मुलाकात कर उनके साथ यादगार पल बिताए। कवियों की सहजता, अपनत्व और आत्मीय व्यवहार ने वृद्धजनों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी।

कार्यक्रम की शुरुआत अनुबंध वृद्धजन कुटीर की संचालिका श्रीमती अनुराधा अडवानी एवं श्री नरेन्द्र अडवानी द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। उन्होंने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सभी साहित्यकारों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने अनुबंध की स्थापना, उद्देश्य और यहां संचालित विभिन्न सेवा गतिविधियों की जानकारी भी साझा की।

इसके बाद तीनों कवियों ने अनुबंध में निवास कर रहे दादा-दादी एवं नाना-नानी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने प्रत्येक वरिष्ठजन के पास बैठकर उनका हालचाल जाना, उनके जीवन के अनुभव सुने और आत्मीय बातचीत की। इस संवाद ने पूरे वातावरण को पारिवारिक आत्मीयता से भर दिया। वृद्धजनों ने भी अपने जीवन के संस्मरण, संघर्ष, उपलब्धियां और यादें साझा कीं, जिन्हें कवियों ने पूरे सम्मान और धैर्य के साथ सुना।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा ने अपनी सहज और विनोदी शैली से उपस्थित सभी लोगों को खूब गुदगुदाया। उनके हल्के-फुल्के हास्य और जीवन के सकारात्मक दृष्टिकोण से जुड़े विचारों ने वृद्धजनों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी रिश्ते, अपनापन और सकारात्मक सोच है। उम्र चाहे कितनी भी हो जाए, यदि मन प्रसन्न है तो जीवन हमेशा उत्सव की तरह लगता है।

वरिष्ठ कवि चिराग जैन ने कहा कि समाज की वास्तविक समृद्धि इस बात से तय होती है कि वह अपने वरिष्ठ नागरिकों को कितना सम्मान और स्नेह देता है। उन्होंने अनुबंध जैसी संस्थाओं को सामाजिक संवेदनाओं का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि यहां केवल रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि परिवार जैसा वातावरण और आत्मीयता भी उपलब्ध है। उन्होंने संस्था के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणा हैं।

प्रख्यात कवि सर्वेश अस्थाना ने भी वरिष्ठजनों से संवाद करते हुए उनके अनुभवों को समाज की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का जीवन अनुभव नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है। परिवार और समाज को चाहिए कि वे अपने वरिष्ठजनों के अनुभवों और भावनाओं का सम्मान करें तथा उन्हें कभी अकेलापन महसूस न होने दें।

कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठजनों ने कवियों के साथ अपनी पसंदीदा कविताएं और गीत भी साझा किए। कुछ ने अपने जीवन के संस्मरण सुनाए तो कुछ ने साहित्य और संस्कृति पर चर्चा की। कवियों ने भी पूरे मनोयोग से उनकी बातें सुनीं और उनका उत्साह बढ़ाया। इस आत्मीय संवाद ने सभी के मन को भावुक भी किया और आनंदित भी।

अनुबंध की संचालिका श्रीमती अनुराधा अडवानी ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल वृद्धजनों को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान, अपनापन और पारिवारिक वातावरण प्रदान करना है। समय-समय पर साहित्यकारों, कलाकारों, चिकित्सकों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को यहां आमंत्रित किया जाता है, ताकि वरिष्ठजनों का सामाजिक जुड़ाव बना रहे और वे स्वयं को समाज का सक्रिय हिस्सा महसूस करें।

श्री नरेन्द्र अडवानी ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों का अनुबंध परिवार के बीच आना संस्था के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मुलाकातें वृद्धजनों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती हैं तथा उन्हें यह एहसास कराती हैं कि समाज उनके साथ खड़ा है।

पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुबंध वृद्धजन कुटीर में आत्मीयता, सम्मान और संवेदनाओं का अनूठा वातावरण बना रहा। साहित्य, हास्य और मानवीय रिश्तों की गरमाहट ने इस मुलाकात को यादगार बना दिया। वृद्धजनों ने अतिथियों को पुनः आने का आग्रह किया, वहीं कवियों ने भी समय-समय पर अनुबंध परिवार से मिलने का भरोसा दिलाया।

यह आयोजन इस बात का सुंदर उदाहरण बना कि साहित्य केवल मंचों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज के हर वर्ग तक पहुंचकर जीवन में आशा, खुशी और संवेदना का संचार कर सकता है। अनुबंध वृद्धजन कुटीर में बिताए गए ये कुछ घंटे वहां रहने वाले वरिष्ठजनों के लिए लंबे समय तक सुखद स्मृतियों के रूप में संजोए रहेंगे। वहीं, उपस्थित सभी लोगों ने यह महसूस किया कि बुजुर्गों के साथ बिताया गया समय केवल सेवा नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों को समझने और मानवीय रिश्तों को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor