राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के समक्ष
संविधान के अनुच्छेद 226 एवं 227 के अंतर्गत प्रार्थना-पत्र/रिट याचिका
माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय एवं माननीय न्यायाधीशगण,
राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर के समक्ष
प्रार्थी
दिलीप कुमार पुरोहित,
ग्रुप एडिटर, Rising Bhaskar,
न्यूज पोर्टल – RisingBhaskar.com
जोधपुर, राजस्थान।
बनाम
1. Meta Platforms, Inc. / Facebook,
अपने सक्षम अधिकारी/प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से।
2. Meta Platforms India Private Limited,
अपने सक्षम अधिकारी/प्राधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से।
3. संबंधित Grievance Officer/Authorized Officer, Facebook/Meta,
भारत में कार्यरत एवं प्रार्थी की शिकायतों/कंटेंट मॉडरेशन से संबंधित अधिकारी।
विषय : प्रार्थी द्वारा तथ्यपरक एवं पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप प्रकाशित समाचार सामग्री को Facebook द्वारा बिना समुचित कारण एवं पारदर्शी तथ्य-जांच के “संदिग्ध” अथवा संभावित रूप से अविश्वसनीय बताकर पाठकों को “वापस जाएं अथवा आगे जाएं” जैसे चेतावनी विकल्प प्रदर्शित किए जाने के विरुद्ध प्रार्थना-पत्र तथा प्रार्थी की प्रतिष्ठा, पत्रकारिता की स्वतंत्रता एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा हेतु उचित आदेश पारित किए जाने बाबत।
माननीय न्यायालय के समक्ष प्रार्थी का निवेदन
- यह कि प्रार्थी दिलीप कुमार पुरोहित वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा वर्तमान में Rising Bhaskar के ग्रुप एडिटर के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं। प्रार्थी द्वारा RisingBhaskar.com पर समाचारों का प्रकाशन किया जाता है तथा उन्हीं प्रकाशित समाचारों को प्रार्थी अपने Facebook अकाउंट के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाता है।
- यह कि प्रार्थी पत्रकारिता के अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर प्रकाशित समाचारों में तथ्यों की जांच, उपलब्ध दस्तावेजों, संबंधित पक्षों के बयानों तथा विश्वसनीय स्रोतों का परीक्षण करने के बाद समाचार प्रकाशित करने का प्रयास करता है। प्रार्थी का स्पष्ट उद्देश्य समाज को तथ्यपरक एवं जनहितकारी समाचार उपलब्ध कराना है।
- यह कि प्रार्थी द्वारा दिनांक 12 अगस्त 2026 को अपने Facebook अकाउंट “Dilip Purohit” से एक समाचार पोस्ट प्रकाशित की गई, जिसका शीर्षक है—
“40 साल बाद न्याय… क्या इसे न्याय कहेंगे? बोफोर्स ने फिर खड़ा किया सबसे बड़ा सवाल, सुप्रीम कोर्ट महत्वपूर्ण मामलों में समय सीमा तय करे”
- यह कि प्रार्थी द्वारा उक्त समाचार को पत्रकारिता के सामान्य मानकों के अनुरूप प्रकाशित किया गया था। इसके बावजूद Facebook द्वारा उक्त पोस्ट को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया कि पाठक के सामने यह धारणा उत्पन्न होती है कि पोस्ट संदिग्ध अथवा अविश्वसनीय हो सकती है तथा पाठक को पोस्ट से पीछे हटने अथवा आगे जाने का विकल्प दिया जाता है।
- यह कि ऐसी चेतावनी सामान्य पाठक के मन में किसी समाचार के संबंध में गंभीर संदेह उत्पन्न करती है। विशेष रूप से जब समाचार किसी सार्वजनिक महत्व के न्यायिक अथवा संवैधानिक विषय से संबंधित हो, तब किसी निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा बिना स्पष्ट कारण, पारदर्शी प्रक्रिया और समुचित तथ्य-जांच के उसे “संदिग्ध” श्रेणी में प्रस्तुत करना पत्रकार और उसके संस्थान की प्रतिष्ठा को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।
- यह कि प्रार्थी की जानकारी के अनुसार इसी प्रकार की समस्या प्रार्थी द्वारा प्रकाशित अन्य समाचारों के साथ भी सामने आई है। विशेष रूप से लगभग तीन दिन पूर्व प्रकाशित समाचार—
“DB Corp में बड़ा बदलाव! MD सुधीर अग्रवाल ने इस्तीफे की पेशकश की”
को भी Facebook के स्तर से पाठकों के समक्ष संदिग्धता उत्पन्न करने वाले तरीके से प्रस्तुत किया गया।
-
यह कि प्रार्थी का गंभीर प्रश्न यह है कि यदि Facebook/Meta किसी समाचार को संदिग्ध मानता है तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि—
(क) समाचार में कौन-सा तथ्य गलत है;
(ख) किस तथ्य की जांच की गई;
(ग) किस स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोत से उसका खंडन किया गया;
(घ) किस नीति के तहत पोस्ट को संदिग्ध घोषित किया गया;
(ङ) किस अधिकारी/तथ्य-जांच प्रणाली ने ऐसा निर्णय लिया; तथा
(च) संबंधित प्रकाशक या पत्रकार को अपना पक्ष रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। - यह कि किसी समाचार को केवल एक स्वचालित एल्गोरिदम, अपारदर्शी moderation system अथवा अज्ञात third-party assessment के आधार पर इस प्रकार प्रदर्शित करना कि पाठक उसके सत्य होने पर संदेह करे, पत्रकारिता की स्वतंत्रता एवं डिजिटल माध्यम पर समाचार प्रसार के अधिकार से संबंधित गंभीर प्रश्न उत्पन्न करता है।
- यह कि प्रार्थी का उद्देश्य Facebook अथवा Meta को किसी तथ्य की सत्यता स्वीकार करने के लिए बाध्य करना नहीं है। प्रार्थी केवल इतना चाहता है कि यदि किसी समाचार को “संदिग्ध” कहा जाता है तो उसके पीछे का ठोस, सत्यापन योग्य और पारदर्शी आधार प्रार्थी को उपलब्ध कराया जाए तथा बिना पर्याप्त आधार के उसकी पत्रकारिता को सार्वजनिक रूप से संदिग्ध बताने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
- यह कि प्रार्थी भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत अभिव्यक्ति एवं पत्रकारिता की स्वतंत्रता को अत्यंत महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार मानता है। डिजिटल युग में समाचारों का प्रकाशन और उनका सोशल मीडिया के माध्यम से पाठकों तक पहुंचना पत्रकारिता की वास्तविक कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
- यह कि यदि किसी निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म को बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के किसी पत्रकार या समाचार संस्थान की सामग्री को “संदिग्ध” बताकर पाठकों को उससे दूर करने का अधिकार प्राप्त हो जाता है, तो इसका सीधा प्रभाव समाचार की पहुंच, पत्रकार की प्रतिष्ठा तथा पाठकों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार पर पड़ सकता है।
- यह कि Facebook/Meta की उक्त कार्रवाई से प्रार्थी को आर्थिक एवं व्यावसायिक नुकसान होने के साथ-साथ उसकी पेशेवर प्रतिष्ठा प्रभावित होने की वास्तविक आशंका है।
- यह कि प्रार्थी का यह भी निवेदन है कि Facebook/Meta द्वारा की गई ऐसी कार्रवाई का पूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड, moderation log, algorithmic decision record, internal review record, fact-checking reference तथा संबंधित शिकायत/रिपोर्ट का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है, जिससे बाद में यह स्पष्ट हो सके कि उक्त चेतावनी किस आधार पर लगाई गई।
- यह कि यदि प्रतिवादीगण किसी समाचार को गलत अथवा संदिग्ध मानते हैं तो उन्हें उस समाचार के विशिष्ट तथ्य का खंडन प्रस्तुत करना चाहिए। मात्र “संदिग्ध” शब्द का प्रयोग कर पाठकों को मानसिक रूप से समाचार से दूर करना निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया नहीं मानी जानी चाहिए।
- यह कि प्रार्थी इस माननीय न्यायालय के समक्ष यह भी स्पष्ट करना चाहता है कि वह Facebook/Meta की स्वतंत्र व्यावसायिक नीतियों में अनुचित हस्तक्षेप की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि ऐसी moderation कार्रवाई के संबंध में न्यायसंगत, पारदर्शी, कारणयुक्त और सत्यापन योग्य प्रक्रिया की मांग कर रहा है।
- यह कि प्रार्थी ने अभी तक प्रतिवादीगण से व्यक्तिगत रूप से कोई सार्वजनिक क्षमायाचना प्राप्त नहीं की है और न ही उसे यह स्पष्ट किया गया है कि उसकी उक्त समाचार पोस्ट को किस आधार पर संदिग्ध माना गया।
- अतः प्रार्थी का विनम्र निवेदन है कि माननीय न्यायालय प्रतिवादीगण को निर्देशित करे कि वे उक्त कार्रवाई का स्पष्ट एवं कारणयुक्त उत्तर प्रस्तुत करें तथा संबंधित रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष पेश करें।
विशेष निवेदन
- प्रार्थी यह भी चाहता है कि Facebook/Meta के भारत में उत्तरदायी सक्षम अधिकारी/अधिकृत प्रतिनिधि को इस माननीय न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से अथवा न्यायालय द्वारा उचित समझे गए माध्यम से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया जाए कि प्रार्थी की समाचार सामग्री को संदिग्ध बताने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।
- यदि माननीय न्यायालय उचित समझे तो संबंधित अधिकारी को यह भी निर्देश दिया जाए कि वह शपथपत्र के माध्यम से यह बताए कि उक्त समाचारों के संबंध में कौन-कौन से तथ्य गलत पाए गए तथा किस स्वतंत्र स्रोत से उनकी पुष्टि/खंडन किया गया।
- प्रार्थी यह भी निवेदन करता है कि प्रतिवादीगण को निर्देश दिया जाए कि यदि उक्त पोस्टों को संदिग्ध बताने के लिए कोई तथ्यात्मक आधार उपलब्ध नहीं है, तो ऐसी चेतावनी/लेबल को हटाया जाए और प्रार्थी को लिखित रूप से इसकी सूचना दी जाए।
- प्रार्थी यह स्पष्ट करता है कि वह प्रतिवादीगण को 15 दिवस का उचित अवसर देने को तैयार है। यदि 15 दिवस के भीतर प्रतिवादीगण—
- उक्त कार्रवाई का स्पष्ट कारण नहीं बताते,
- संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराते,
- बिना आधार लगाए गए संदिग्धता संबंधी लेबल/चेतावनी को वापस नहीं लेते,
- तथा प्रार्थी को हुई प्रतिष्ठात्मक क्षति के लिए उचित लिखित खेद/क्षमायाचना व्यक्त नहीं करते,
तो प्रार्थी को कानून के अनुसार उपलब्ध अन्य सभी न्यायिक एवं वैधानिक उपाय अपनाने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए।
- प्रार्थी का यह भी निवेदन है कि यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि प्रतिवादीगण की कार्रवाई जानबूझकर, दुर्भावनापूर्ण अथवा किसी पत्रकार की प्रतिष्ठा एवं स्वतंत्र पत्रकारिता को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी, तो माननीय न्यायालय कानून के अनुसार उपयुक्त कार्रवाई के लिए सक्षम प्राधिकारी को निर्देश जारी करने की कृपा करे।
प्रार्थना
अतः माननीय न्यायालय से प्रार्थी की विनम्र प्रार्थना है कि—
क. प्रतिवादी Facebook/Meta को निर्देशित किया जाए कि प्रार्थी की उक्त समाचार पोस्टों को “संदिग्ध” अथवा इसी प्रकार की चेतावनी के साथ प्रदर्शित करने के कारणों का स्पष्ट, लिखित एवं कारणयुक्त विवरण प्रस्तुत करे।
ख. प्रतिवादीगण को निर्देशित किया जाए कि संबंधित moderation records, fact-checking material, internal review record, decision log एवं अन्य संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और आवश्यकता होने पर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।
ग. प्रतिवादी के सक्षम अधिकारी/अधिकृत प्रतिनिधि को व्यक्तिगत रूप से अथवा माननीय न्यायालय द्वारा निर्धारित माध्यम से उपस्थित होकर उक्त कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया जाए।
घ. यदि समाचारों को संदिग्ध बताने के लिए कोई विश्वसनीय एवं सत्यापन योग्य तथ्यात्मक आधार उपलब्ध नहीं हो तो संबंधित warning/label तत्काल हटाने का निर्देश दिया जाए।
ङ. प्रतिवादीगण को प्रार्थी के समक्ष लिखित रूप से खेद/क्षमायाचना प्रस्तुत करने तथा प्रार्थी की पत्रकारिता एवं प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाली उक्त कार्रवाई को सुधारने का निर्देश दिया जाए।
च. प्रतिवादीगण को निर्देशित किया जाए कि भविष्य में प्रार्थी की प्रकाशित समाचार सामग्री के संबंध में कोई प्रतिकूल moderation कार्रवाई करने से पूर्व पारदर्शी एवं कारणयुक्त प्रक्रिया अपनाई जाए और जहां संभव हो, प्रार्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
छ. माननीय न्यायालय प्रतिवादीगण को 15 दिवस के भीतर उचित उत्तर/स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित करे।
ज. यदि प्रतिवादीगण निर्धारित अवधि में उचित स्पष्टीकरण, सुधार एवं लिखित क्षमायाचना प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो प्रार्थी को उनके विरुद्ध उपलब्ध सभी वैधानिक एवं न्यायिक उपाय अपनाने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए तथा कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई हेतु सक्षम प्राधिकारी को निर्देशित किया जाए।
झ. माननीय न्यायालय न्यायहित एवं जनहित में ऐसा कोई अन्य आदेश अथवा निर्देश पारित करे जिसे वह परिस्थितियों के अनुसार उचित एवं न्यायसंगत समझे।
अंतरिम प्रार्थना
मामले के अंतिम निस्तारण तक प्रतिवादीगण को निर्देशित किया जाए कि वे प्रार्थी की संबंधित समाचार पोस्टों पर लगाए गए “संदिग्ध” संबंधी warning/label की समीक्षा करें तथा यदि उसके समर्थन में कोई स्पष्ट एवं सत्यापन योग्य तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो उक्त चेतावनी को हटाने पर तत्काल विचार करें।
संलग्न किए जाने वाले दस्तावेज
- Facebook पर प्रकाशित समाचार की मूल पोस्ट का स्क्रीनशॉट।
- “यह पोस्ट संदिग्ध हो सकती है—वापस जाएं/आगे जाएं” वाली Facebook स्क्रीन का स्क्रीनशॉट।
- पोस्ट का URL/लिंक।
- RisingBhaskar.com पर प्रकाशित मूल समाचार का स्क्रीनशॉट/प्रिंटआउट।
- समाचार में उपयोग किए गए मूल स्रोत/दस्तावेज।
- तीन दिन पूर्व प्रकाशित “DB Corp में बड़ा बदलाव! MD सुधीर अग्रवाल ने इस्तीफे की पेशकश की” समाचार की प्रति।
- उक्त पोस्ट पर Facebook द्वारा प्रदर्शित warning का स्क्रीनशॉट।
- प्रार्थी के पत्रकारिता संबंधी परिचय/पहचान का दस्तावेज।
- Facebook/Meta को भेजी गई शिकायत एवं प्राप्त उत्तर, यदि कोई हो।
- अन्य संबंधित डिजिटल साक्ष्य।
स्थान : जोधपुर, राजस्थान
दिनांक : 12 अगस्त 2026
प्रार्थी
दिलीप कुमार पुरोहित
ग्रुप एडिटर – Rising Bhaskar
RisingBhaskar.com


