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Wednesday, August 19, 2026, 3:25 pm

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सकारात्मक खबर : पेंशनर्स की नियमित पेंशन के लिए JNVU में बने ‘स्थायी समाधान मॉडल’, राइजिंग भास्कर ने सुझाया रोडमैप

संपत्तियां बेचने या बार-बार ऋण लेने के बजाय आय के स्थायी स्रोत विकसित हों, ‘पेंशन मित्र भामाशाह’ से लेकर एलुमिनाई फंड तक कई विकल्प; आठ दिन से धरने पर बैठे पेंशनर्स के सम्मानजनक समाधान की पहल का समय

दिलीप कुमार पुरोहित | विशेष रिपोर्ट | जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

जोधपुर की पहचान केवल सूर्यनगरी के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा और बौद्धिक चेतना के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में भी है। इसी पहचान को मजबूत करने वाली संस्थाओं में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU) का विशेष स्थान है। इस विश्वविद्यालय को अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी आज नियमित पेंशन के स्थायी और सम्मानजनक समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं। पेंशनर्स के अनुसार पिछले करीब पांच माह से पेंशन का भुगतान नियमित नहीं हो पाया है और वे बीते आठ दिनों से अपनी मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं।

राइजिंग भास्कर इस पूरे विषय को किसी पक्ष-विपक्ष या आरोप-प्रत्यारोप के रूप में नहीं देखता। राइजिंग भास्कर ने दो वर्ष तक केवल सकारात्मक पत्रकारिता करने की भीष्म प्रतिज्ञा की है। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि समाज की समस्याओं से मुंह मोड़ लिया जाए। इसका अर्थ है—समस्या दिखाई दे तो उसके साथ समाधान भी सामने रखा जाए।

इसी सकारात्मक सोच के साथ राइजिंग भास्कर JNVU के पेंशनर्स के लिए एक ऐसा रोडमैप प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें विश्वविद्यालय की संपत्तियां बेचने की जरूरत न पड़े, बार-बार ऋण लेने की आवश्यकता कम हो और पेंशन भुगतान के लिए स्थायी आय का मॉडल तैयार किया जा सके। विश्वविद्यालय के आधिकारिक दस्तावेजों में भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पेंशन सहित कर्मचारी कल्याण योजनाओं का उल्लेख है। JNVU के सेल्फ स्टडी रिपोर्ट में GPF-cum-Gratuity-cum-Pension Scheme/National Pension Scheme तथा सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का उल्लेख मिलता है।

यानी पेंशन केवल एक मासिक भुगतान नहीं है। यह उन लोगों के प्रति संस्थागत जिम्मेदारी का हिस्सा है, जिन्होंने विश्वविद्यालय के निर्माण, शिक्षण, शोध, प्रशासन और विद्यार्थियों के भविष्य को आकार देने में अपना जीवन लगाया।

राइजिंग भास्कर की पहल : धरने से समाधान की मेज तक

राइजिंग भास्कर का मानना है कि पेंशनर्स की आवाज को समाधान की दिशा में ले जाने के लिए विश्वविद्यालय, राज्य सरकार, जनप्रतिनिधियों, पूर्व छात्रों, उद्योग जगत और समाज के सक्षम लोगों को एक साझा मंच पर आना चाहिए। आठ दिन से चल रहे धरने को केवल एक आंदोलन के रूप में देखने की बजाय इसे ‘JNVU Pension Solution Mission’ की शुरुआत का अवसर बनाया जा सकता है। इस मिशन का लक्ष्य स्पष्ट हो—‘हर पात्र पेंशनर को समय पर पेंशन और विश्वविद्यालय के लिए स्थायी पेंशन फंड।’ इसके लिए एक वर्ष, तीन वर्ष और पांच वर्ष की अलग-अलग कार्ययोजना बनाई जा सकती है।

सबसे पहले : वर्तमान पेंशन भुगतान के लिए विशेष समाधान पैकेज

राइजिंग भास्कर का पहला सुझाव है कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय मिलकर पेंशनर्स के वर्तमान बकाये को व्यवस्थित करने के लिए विशेष पेंशन समाधान पैकेज तैयार करें।

इसमें तीन बातें एक साथ हो सकती हैं—

पहला— वर्तमान बकाया पेंशन का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।

दूसरा— भविष्य की मासिक पेंशन के लिए अलग और सुरक्षित वित्तीय व्यवस्था बनाई जाए।

तीसरा— पेंशन भुगतान के लिए ऐसी व्यवस्था हो जिसमें हर माह की निर्धारित तारीख से पहले आवश्यक राशि की उपलब्धता सुनिश्चित हो। यह व्यवस्था एक बार बन जाने के बाद हर वर्ष नए सिरे से संकट पैदा होने की संभावना कम करेगी।

1. ‘पेंशन मित्र भामाशाह योजना’ : राजस्थान की परंपरा से निकले समाधान का रास्ता

राजस्थान की धरती पर भामाशाहों की परंपरा सदियों पुरानी है। समाज, शिक्षा, धर्म, चिकित्सा और जनकल्याण के लिए आर्थिक सहयोग देने वाले लोगों ने राजस्थान की सामाजिक व्यवस्था को मजबूत किया है। इसी भावना को JNVU के पेंशन समाधान से जोड़ा जा सकता है। विश्वविद्यालय ‘पेंशन मित्र भामाशाह योजना’ शुरू कर सकता है। इस योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी, उद्योगपति, व्यापारिक संगठन, सामाजिक संस्थाएं, प्रवासी भारतीय और सक्षम नागरिक स्वैच्छिक योगदान कर सकेंगे। यह योगदान सीधे किसी व्यक्ति को देने की बजाय एक JNVU Pension Support Fund में रखा जा सकता है। इस फंड की पारदर्शी व्यवस्था हो और इसकी आय का उपयोग केवल पेंशन सहायता के लिए किया जाए। भामाशाहों को राशि के आधार पर नहीं, बल्कि उनके योगदान की भावना के आधार पर सम्मान दिया जाए। हर वर्ष विश्वविद्यालय में ‘पेंशन मित्र सम्मान समारोह’ आयोजित किया जा सकता है। इससे पेंशन भुगतान केवल सरकारी अथवा विश्वविद्यालयीय विषय न रहकर समाज की भागीदारी का विषय बनेगा।

2. JNVU Alumni Pension Fund : पूर्व छात्रों से जुड़े विश्वविद्यालय के भविष्य के साथी

JNVU की सबसे बड़ी ताकत उसकी जमीन या इमारतें ही नहीं हैं। उसकी सबसे बड़ी संपत्ति उसके पूर्व विद्यार्थी हैं। विश्वविद्यालय से पढ़कर देश और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचे हजारों पूर्व छात्र आज उद्योग, प्रशासन, चिकित्सा, शिक्षा, न्याय, मीडिया, तकनीक और व्यवसाय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन पूर्व छात्रों को एक संगठित JNVU Global Alumni Network से जोड़ा जा सकता है। इसके साथ JNVU Alumni Pension Fund बनाया जाए। यदि हजारों पूर्व विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुसार छोटी-छोटी वार्षिक राशि भी स्वेच्छा से इस फंड में दें तो समय के साथ यह एक मजबूत कोष बन सकता है। इसके लिए मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल बनाया जा सकता है। पूर्व छात्रों के लिए तीन श्रेणियां बनाई जा सकती हैं—

  • Pension Friend
  • Pension Patron
  • Pension Guardian

इसमें किसी पर कोई बाध्यता नहीं हो। पूरी व्यवस्था स्वैच्छिक और पारदर्शी हो।

3. विश्वविद्यालय की जमीन बेचे नहीं, उससे स्थायी आय पैदा करे

कुछ वर्ष पहले एक विधायक की ओर से यह सुझाव सामने आया था कि विश्वविद्यालय अपनी संपत्तियां बेचकर पेंशन का भुगतान करे। राइजिंग भास्कर का सुझाव इससे अलग है। विश्वविद्यालय की संपत्ति को बेचना नहीं, उसे आय का स्रोत बनाना अधिक दूरदर्शी विकल्प हो सकता है। जमीन एक बार बेचने पर उससे एकमुश्त राशि प्राप्त होगी। लेकिन उसी जमीन को नियोजित तरीके से विकसित कर किराये, लीज, पार्किंग, कॉन्फ्रेंस, प्रशिक्षण केंद्र, छात्र सुविधाओं अथवा अन्य वैध गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाए तो उससे वर्षों तक आय प्राप्त की जा सकती है। इसलिए विश्वविद्यालय की प्रत्येक संपत्ति का Asset Monetisation Plan बनाया जाना चाहिए।

हर संपत्ति का सर्वे हो—

  • जमीन कितनी है?
  • वर्तमान उपयोग क्या है?
  • भविष्य में शैक्षणिक उपयोग कितना आवश्यक है?
  • खाली अथवा कम उपयोग वाली जगह कितनी है?
  • उससे नियमित आय कैसे पैदा की जा सकती है?

इसका वैज्ञानिक अध्ययन कर निर्णय लिया जा सकता है।

4. ‘JNVU Rental Revenue Model’ : खाली जगह बने नियमित आय का माध्यम

विश्वविद्यालय परिसर में जहां शैक्षणिक गतिविधियों पर कोई प्रभाव न पड़े, वहां निर्धारित नियमों के अनुसार कुछ सुविधाओं को लीज या किराये के मॉडल पर विकसित किया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर—कांफ्रेंस हॉल, सेमिनार हॉल, खेल मैदान, पार्किंग क्षेत्र, गेस्ट हाउस, प्रशिक्षण सुविधाएं और अन्य उपयुक्त परिसंपत्तियां।इन्हें सरकारी नियमों और विश्वविद्यालय की नीतियों के अनुरूप निर्धारित शुल्क पर उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे प्राप्त राशि का एक निर्धारित हिस्सा Pension Sustainability Fund में जमा किया जा सकता है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि विश्वविद्यालय अपनी संपत्ति को बचाए रखते हुए उससे नियमित आय प्राप्त कर सकेगा।

5. ‘पेंशन कॉर्पस फंड’ : हर साल एक निश्चित राशि जमा हो

राइजिंग भास्कर का एक महत्वपूर्ण सुझाव है कि JNVU में एक दीर्घकालीन Pension Corpus Fund बनाया जाए। इस फंड में विश्वविद्यालय की विभिन्न आय के स्रोतों से निर्धारित प्रतिशत राशि नियमित रूप से जमा की जा सकती है। मसलन—

  • किराये से आय का निर्धारित हिस्सा
  • एलुमिनाई योगदान
  • भामाशाह सहयोग
  • कॉन्फ्रेंस एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की आय
  • CSR सहयोग
  • वैध संस्थागत आय के अन्य स्रोत

इस राशि को सुरक्षित और नियमानुसार निवेश किया जाए। लक्ष्य यह हो कि कुछ वर्षों में ऐसा कोष तैयार हो जाए जिसकी आय पेंशन भुगतान की नियमित व्यवस्था में योगदान दे सके।

6. CSR को JNVU की पेंशन व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है

आज देश की अनेक कंपनियां शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामाजिक क्षेत्र में CSR के माध्यम से योगदान करती हैं। JNVU को एक CSR Partnership Cell बनाना चाहिए। इस सेल की जिम्मेदारी हो कि वह जोधपुर और राजस्थान के उद्योग समूहों के साथ संवाद करे और विश्वविद्यालय की शिक्षा, शोध, कौशल विकास तथा सामाजिक परियोजनाओं के लिए CSR सहयोग प्राप्त करे। जहां नियम अनुमति दें, वहां संस्थागत आय के ऐसे स्रोत विकसित किए जा सकते हैं जिनसे विश्वविद्यालय की समग्र वित्तीय क्षमता मजबूत हो और पेंशन के लिए भी स्थायी योगदान सुनिश्चित किया जा सके।

7. विश्वविद्यालय के नाम से ‘Pension Endowment’ अभियान

JNVU अपने स्थापना वर्ष, स्वर्ण जयंती और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों से जुड़े पूर्व विद्यार्थियों तथा समाज के लोगों को जोड़कर JNVU Pension Endowment Campaign शुरू कर सकता है। इस अभियान का संदेश बहुत सरल हो—‘जिस विश्वविद्यालय ने हमें शिक्षा दी, उसके वरिष्ठ शिक्षकों और कर्मचारियों के सम्मान में हमारा योगदान।’ यह अभियान भावनात्मक होने के साथ-साथ संस्थागत भी हो सकता है। छोटी राशि से लेकर बड़ी राशि तक हर योगदान को स्वीकार किया जाए। पूरी जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध हो।

8. पेंशन भुगतान की डिजिटल निगरानी व्यवस्था

राजस्थान सरकार का Pension and Pensioners Welfare Department पहले से e-Pension, e-PPO, Life Certificate और Pensioner Self Service जैसी डिजिटल सुविधाएं संचालित करता है। आधिकारिक पोर्टल पर पेंशनरों के लिए भुगतान संबंधी सेवाएं और स्थिति देखने की व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसी तरह JNVU के लिए एक Digital Pension Dashboard विकसित किया जा सकता है। इसमें हर माह दिखाई दे—कुल पेंशन देयता | उपलब्ध राशि | आवश्यक राशि | भुगतान की स्थिति | अगले माह की आवश्यकता

इससे वित्तीय योजना पहले से बनाई जा सकेगी। पेंशन भुगतान की प्रक्रिया को भी डिजिटल ट्रैकिंग से जोड़ा जा सकता है ताकि संबंधित अधिकारियों को आगामी भुगतान की आवश्यकता पहले से पता हो।

9. ‘पेंशन रिजर्व’ : एक माह की पेंशन हमेशा सुरक्षित

राइजिंग भास्कर का एक और सुझाव है कि विश्वविद्यालय धीरे-धीरे कम से कम एक माह की पेंशन के बराबर रिजर्व फंड तैयार करे। इसके बाद लक्ष्य दो माह और फिर तीन माह की पेंशन के बराबर सुरक्षित रिजर्व बनाने का हो सकता है। यह राशि नियमित पेंशन के साथ नहीं खर्च की जाए, बल्कि केवल असाधारण वित्तीय अंतर की स्थिति में नियमानुसार उपयोग हो और उपयोग होने पर पुनः भर दी जाए। इससे विश्वविद्यालय की पेंशन व्यवस्था को वित्तीय सुरक्षा कवच मिलेगा।

10. पेंशनर्स को ‘विश्वविद्यालय परिवार’ की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का मॉडल

पेंशनर्स विश्वविद्यालय के लिए केवल पूर्व कर्मचारी नहीं हैं। वे विश्वविद्यालय के अनुभव, ज्ञान और संस्थागत स्मृति के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। विश्वविद्यालय चाहे तो इच्छुक पेंशनर्स के लिए Academic Mentorship Programme शुरू कर सकता है। सेवानिवृत्त शिक्षक विद्यार्थियों को—

  • करियर मार्गदर्शन
  • शोध मार्गदर्शन
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
  • भाषा एवं लेखन
  • विषय विशेषज्ञता
  • व्याख्यान
  • मेंटरशिप

जैसी गतिविधियों से जोड़ सकते हैं। यह पेंशन का विकल्प नहीं होगा और न ही पेंशन के बदले कोई कार्य होगा। बल्कि यह पेंशनर्स के अनुभव को सम्मानपूर्वक विश्वविद्यालय से जोड़ने की एक अतिरिक्त पहल होगी। जहां नियमानुसार मानदेय का प्रावधान संभव हो, वहां पारदर्शी तरीके से व्यवस्था बनाई जा सकती है।

11. ‘एक विभाग—एक आय परियोजना’

विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग अपनी विशेषज्ञता के अनुसार ऐसी परियोजनाएं तैयार कर सकते हैं जिनसे वैध संस्थागत आय उत्पन्न हो।

उदाहरण के लिए—इंजीनियरिंग और तकनीकी विभागों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रबंधन विभाग के कॉर्पोरेट प्रशिक्षण, भाषा विभाग के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, कंप्यूटर विभाग के कौशल कार्यक्रम, विधि विभाग के अकादमिक प्रशिक्षण और अन्य विभागों की विशेषज्ञ सेवाओं को नियमानुसार विकसित किया जा सकता है। इसका एक निर्धारित हिस्सा विश्वविद्यालय के Sustainable Pension Fund में जा सकता है। इससे विश्वविद्यालय की अकादमिक शक्ति ही उसकी वित्तीय मजबूती का माध्यम बनेगी।

12. ऋण संस्कृति नहीं, ‘आय संस्कृति’ विकसित हो

राइजिंग भास्कर का स्पष्ट मत है कि किसी भी संस्था को अस्थायी वित्तीय आवश्यकता पूरी करने के लिए सीमित और नियमानुसार वित्तीय साधनों की आवश्यकता पड़ सकती है, लेकिन पेंशन जैसी नियमित और दीर्घकालीन देनदारी के लिए लगातार ऋण पर निर्भरता स्थायी मॉडल नहीं हो सकती। यदि हर वर्ष पेंशन के लिए नया ऋण लिया जाए तो मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। इसलिए लक्ष्य यह होना चाहिए कि—‘ऋण से पेंशन नहीं, आय से पेंशन।’ विश्वविद्यालय को अगले पांच वर्षों के लिए इसी सिद्धांत पर वित्तीय रोडमैप बनाना चाहिए।

13. सरकार के साथ ‘पेंशन फंडिंग फार्मूला’

राज्य सरकार और JNVU के बीच एक दीर्घकालीन वित्तीय फार्मूला तैयार किया जा सकता है। इसमें विश्वविद्यालय की अपनी आय, सरकारी सहायता, पेंशन देयता और भविष्य की अनुमानित पेंशन देनदारी का वैज्ञानिक आकलन हो। हर वर्ष बजट बनने से पहले अगले 12 महीनों की पेंशन आवश्यकता का अनुमान तैयार हो और उसी के आधार पर राशि की व्यवस्था की जाए। इससे पेंशन को वर्ष के अंत की वित्तीय चुनौती बनने की बजाय वार्षिक वित्तीय नियोजन का पहला हिस्सा बनाया जा सकेगा।

14. पेंशनर्स के लिए ‘सिंगल विंडो हेल्प डेस्क’

पेंशन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और सुविधा के लिए JNVU में Pensioners Single Window Cell बनाया जा सकता है। यहां पेंशनर्स को एक ही स्थान पर—

  • पेंशन भुगतान की जानकारी
  • PPO संबंधी जानकारी
  • दस्तावेजों की स्थिति
  • जीवन प्रमाण पत्र
  • परिवार पेंशन संबंधी जानकारी
  • लंबित मामलों की स्थिति

उपलब्ध हो सके।इसके साथ एक हेल्पलाइन नंबर और व्हाट्सऐप सूचना प्रणाली भी विकसित की जा सकती है। इससे पेंशनर्स को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों में जाने की आवश्यकता कम होगी।

राइजिंग भास्कर का 5 सूत्रीय पेंशन रोडमैप

1. तत्काल

पिछले बकाये के भुगतान के लिए विशेष समाधान पैकेज।

2. छह माह

Pension Sustainability Fund और Digital Pension Dashboard।

3. एक वर्ष

‘पेंशन मित्र भामाशाह’, Alumni Fund और CSR Partnership अभियान।

4. तीन वर्ष

विश्वविद्यालय की गैर-शैक्षणिक परिसंपत्तियों से नियमित आय का मॉडल।

5. पांच वर्ष

ऐसा Pension Corpus तैयार करना जिसकी आय नियमित पेंशन व्यवस्था को मजबूत करे।

संपत्ति बचाने का मॉडल

बेचना नहीं—संरक्षित करना।
खाली नहीं—उपयोग करना।
एकमुश्त आय नहीं—नियमित आय बनाना।

JNVU की संपत्तियों के लिए यही तीन सिद्धांत अपनाए जा सकते हैं। हर संपत्ति का Asset Management Plan बने। शैक्षणिक उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता हो। जहां संभव हो, वहां वैध लीज/रेंटल मॉडल विकसित हो। आय का निर्धारित हिस्सा Pension Corpus में जाए।

पेंशनर्स के सम्मान का रोडमैप

पेंशन उनका अधिकार है और सम्मान उनकी गरिमा। इसलिए समाधान के साथ विश्वविद्यालय को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि पेंशनर्स को नियमित सूचना मिलती रहे। हर माह Pension Status Bulletin जारी हो। इसमें बताया जाए—इस माह की पेंशन देयता कितनी है? कितनी राशि उपलब्ध है? भुगतान की संभावित तारीख क्या है? अगले माह की वित्तीय आवश्यकता कितनी है? पारदर्शिता से विश्वास मजबूत होगा और विश्वविद्यालय-पेंशनर्स संबंध और बेहतर होंगे।

धरना समाप्त कराने से अधिक जरूरी है भविष्य का रास्ता बनाना

आज सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धरने पर बैठे पेंशनर्स और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद का एक सकारात्मक रास्ता खुले। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पेंशनर्स प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठक हो। राज्य सरकार का प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हो। वित्तीय विशेषज्ञ, पूर्व विद्यार्थी और समाज के प्रतिनिधि भी आवश्यकता के अनुसार जोड़े जाएं। बैठक का उद्देश्य केवल वर्तमान भुगतान पर चर्चा करना नहीं हो, बल्कि अगले पांच वर्ष का Pension Sustainability Plan तैयार करना हो।यदि इस दिशा में पहला कदम उठता है तो वर्तमान परिस्थिति एक बड़ी संस्थागत पहल का कारण बन सकती है।

पेंशन समस्या को अवसर में बदल सकता है JNVU

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय राजस्थान के लिए केवल एक विश्वविद्यालय नहीं है। यहां से निकले विद्यार्थी देश-दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं। ऐसे संस्थान के लिए वित्तीय आत्मनिर्भरता का मॉडल तैयार करना असंभव नहीं है। जरूरत है विश्वविद्यालय की संपत्ति, मानव संसाधन, पूर्व छात्रों, सामाजिक सहयोग, CSR, डिजिटल तकनीक और सरकारी सहायता—इन सभी को एक सूत्र में जोड़ने की। यदि ऐसा मॉडल तैयार होता है तो JNVU केवल अपने वर्तमान पेंशनर्स की समस्या का समाधान नहीं करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत व्यवस्था खड़ी करेगा।

राइजिंग भास्कर का आग्रह : समाधान की ओर पहला कदम आज ही

राइजिंग भास्कर का यह मानना है कि धरने पर बैठे पेंशनर्स की आवाज को सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए और उनके साथ समाधान की मेज पर बैठकर आगे की राह तय की जानी चाहिए। यह किसी की जीत और हार का विषय नहीं है। यह उस विश्वविद्यालय के सम्मान का विषय है, जिसे हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों ने अपने जीवन से सींचा है। इसलिए राइजिंग भास्कर राज्य सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, पेंशनर्स प्रतिनिधियों, पूर्व छात्रों और समाज के सक्षम लोगों से आग्रह करता है कि वे मिलकर एक ऐसा मॉडल बनाएं, जिसमें पेंशन हर महीने समय पर मिले और इसके लिए विश्वविद्यालय को बार-बार किसी अस्थायी वित्तीय सहारे की आवश्यकता न पड़े। कुछ वर्ष पहले जमीन बेचकर पेंशन भुगतान का सुझाव सामने आया था। राइजिंग भास्कर का सुझाव है कि JNVU अपनी संपत्तियां बेचे नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य की आय का माध्यम बनाए। सरकार से ऋण लेकर हर वर्ष पेंशन देने की संस्कृति के बजाय स्थायी आय, Pension Corpus और सामाजिक भागीदारी का मॉडल विकसित किया जाए।

यह संकट नहीं, एक नए JNVU मॉडल की शुरुआत बन सकती है

राइजिंग भास्कर की दो वर्ष की सकारात्मक पत्रकारिता की भीष्म प्रतिज्ञा का मूल भाव यही है कि समस्या को छिपाना नहीं, समाधान के साथ सामने लाना है। JNVU के पेंशनर्स का वर्तमान विषय भी इसी दृष्टि से देखा जाना चाहिए। पिछले पांच माह की पेंशन के भुगतान और बीते आठ दिनों से चल रहे धरने की स्थिति पेंशनर्स के अनुसार वर्तमान चुनौती है, लेकिन इसके साथ ही यह समय एक ऐसे स्थायी मॉडल की शुरुआत का भी हो सकता है, जो भविष्य में JNVU को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाए। यदि आज एक Pension Sustainability Mission शुरू होता है, यदि Alumni Fund बनता है, यदि ‘पेंशन मित्र भामाशाह’ अभियान शुरू होता है, यदि संपत्तियों को बेचने की बजाय आय का माध्यम बनाया जाता है, यदि CSR और संस्थागत आय को योजनाबद्ध तरीके से जोड़ा जाता है और यदि सरकार-विश्वविद्यालय मिलकर दीर्घकालीन वित्तीय फार्मूला बनाते हैं तो आने वाले वर्षों में JNVU देश के सामने एक उदाहरण रख सकता है। एक ऐसा उदाहरण जिसमें विश्वविद्यालय अपने वरिष्ठों का सम्मान भी करता है, अपनी संपत्तियों को सुरक्षित भी रखता है और अपनी वित्तीय व्यवस्था को आत्मनिर्भर भी बनाता है। यही राइजिंग भास्कर का सकारात्मक समाधान है।

पेंशन समय पर मिले।
पेंशनर्स सम्मान के साथ रहें।
विश्वविद्यालय की संपत्ति सुरक्षित रहे।
ऋण पर निर्भरता घटे।
और JNVU की अपनी आय लगातार बढ़े।
यही समाधान का रोडमैप है। यही सकारात्मक पत्रकारिता का उद्देश्य है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor