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Wednesday, August 26, 2026, 11:43 pm

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Lifestyle

सिर्फ स्टेशनरी नहीं, मुस्कानें बाँटने पहुँचा HUG Foundation

एक छोटी-सी पहल ने बनाया ऐसा दिन, जो मुस्कानों, खुशियों और खूबसूरत यादों से भर गया।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

किसी की ज़िंदगी में बदलाव लाने के लिए हमेशा कुछ बड़ा करने की ज़रूरत नहीं होती। कभी-कभी एक कॉपी, एक पैन और किसी की मदद करने की छोटी-सी कोशिश भी किसी के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकती है।

इसी सोच के साथ HUG Foundation के सदस्यों ने 26 अगस्त 2026 को सारथी फाउंडेशन (Saarthy Foundation) का दौरा किया और वहाँ जरूरतमंद एवं वंचित बच्चों के लिए एक विशेष डोनेशन ड्राइव आयोजित की। इस दौरान बच्चों को आवश्यक स्टेशनरी सामग्री वितरित की गई, ताकि उनकी पढ़ाई में थोड़ी मदद मिल सके और वे पूरे उत्साह के साथ अपनी शिक्षा जारी रख सकें।

लेकिन यह मुलाकात केवल स्टेशनरी बाँटने तक सीमित नहीं रही। बच्चों के साथ बातचीत, उनकी मुस्कान और उनके उत्साह ने इस पूरे अनुभव को और भी खास बना दिया। HUG Foundation के सदस्यों ने महसूस किया कि देने की खुशी किसी चीज़ की कीमत से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाली खुशी और उम्मीद से मापी जाती है।

इस पहल में आर्णा हिरण, जिया जैन, सलोनी लोढ़ा, जान्हवी भेरवानी, प्रांजल जैन, अश्मी सिंघवी, शिविका कोठारी और दृष्टि मेहता ने हिस्सा लिया। सभी सदस्य समाज के लिए कुछ अच्छा करने की भावना से वहाँ पहुँचे थे, लेकिन वापस लौटते समय वे अपने साथ एक और अनमोल चीज़ लेकर आए—कृतज्ञता, संवेदनशीलता और दूसरों के चेहरे पर खुशी लाने की सीख।

इस पूरे अनुभव को सदस्यों ने एक आशीर्वाद (Blessing) के रूप में महसूस किया। इस मुलाकात ने उन्हें याद दिलाया कि शिक्षा किसी के लिए नए अवसरों के दरवाज़े खोल सकती है, लेकिन प्रोत्साहन और सहयोग उस व्यक्ति को उन दरवाज़ों तक पहुँचने का आत्मविश्वास देते हैं।

एक कॉपी या पेन भले ही छोटी चीज़ लगे, लेकिन किसी बच्चे के लिए वह सीखने, आगे बढ़ने और बेहतर भविष्य का सपना देखने का माध्यम बन सकता है।

HUG Foundation का मानना है कि समाज में सकारात्मक बदलाव छोटी-छोटी कोशिशों से ही शुरू होता है। यह पहल दूसरों को भी प्रेरित करती है कि वे अपने आसपास के लोगों के लिए कुछ करने की कोशिश करें और खुद से एक सवाल पूछें—
“मैं किसी और के दिन को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकता/सकती हूँ?”

सारथी फाउंडेशन में बिताया गया यह दिन मुस्कानों, आभार और खूबसूरत यादों के साथ समाप्त हुआ। स्टेशनरी तो एक उपहार थी, लेकिन बदले में मिले प्यार, खुशी और आशीर्वाद उससे कहीं अधिक मूल्यवान थे।

क्योंकि कभी-कभी किसी की ज़िंदगी में खुशी लाने के लिए बहुत कुछ नहीं, बस एक छोटी-सी पहल और एक बड़ा दिल चाहिए।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor