दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले गज शुश्रुषा ट्रस्ट ने एक अनूठी पहल की शुरुआत की है। ट्रस्ट द्वारा संचालित संस्कार केंद्रों पर “घर-घर रक्षा सूत्र से व्यसन मुक्ति” चार दिवसीय अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान के तहत रक्षा सूत्र को केवल धागा नहीं, बल्कि नशे से मुक्ति का संकल्प बनाया गया।
ट्रस्ट कोषाध्यक्ष विवेक ने बताया कि प्रथम दिवस में जैन आचार्य हीराचंद्र जी महाराज के ‘व्यसन मुक्ति हो सारा देश’ के नारे से संकल्पित होकर अभियान का शुभारंभ मुख्य अतिथि सेवा भारती प्रमुख मंगलाराम एवं भामाशाह गौतम सुराणा ने किया। कार्यक्रम के पहले दिन 100 बच्चों को रक्षा सूत्र बांधकर व्यसन मुक्ति का संकल्प दिलाया गया।
मुख्य अतिथियों ने समझाया कि एक रक्षा सूत्र का अर्थ है – अपनों की रक्षा का वचन। अगर हम बीड़ी, सिगरेट, दारू, गुटखा या किसी भी प्रकार का नशा करते हैं, तो हम धीरे-धीरे अपने परिवार, अपने स्वास्थ्य और अपनों को खो देते हैं। इसलिए सच्ची रक्षा तभी है, जब हम खुद को नशे से बचाएं और अपने घर को भी बचाएं।
संस्कार केंद्र के बच्चों और कार्यकर्ताओं की टोली ने घर-घर जाकर लोगों को रक्षा सूत्र बांधा। बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया और उन्हें व्यसन मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।
इस दौरान कई लोगों ने भावुक होकर हाथ में रक्षा सूत्र बंधवाते हुए जीवन में कभी भी किसी प्रकार का नशा न करने का संकल्प लिया। कई युवाओं ने गुटखा और शराब छोड़ने का वादा भी किया। माहौल ऐसा था मानो हर घर में रक्षाबंधन से पहले ही भाई-बहन और परिवार की रक्षा का त्योहार मनाया जा रहा हो।
मुख्य अतिथि ने कहा कि आज के समय में नशा सबसे बड़ा सामाजिक अभिशाप बनता जा रहा है। इसे केवल कानून से नहीं, बल्कि संस्कार और संकल्प से ही रोका जा सकता है। इसी सोच के साथ यह अभियान चलाया गया है।
इस अवसर पर संस्कार केंद्र की प्रमुख टीकम, पूजा, नंदिनी सहित अनेक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। अगले चार दिनों तक यह अभियान जोधपुर के विभिन्न बस्तियों और मोहल्लों में जारी रहेगा।

