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Sunday, September 6, 2026, 11:36 am

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शिव खेड़ा का बड़ा संदेश: आस्था इंसान को मजबूत बनाती है, अंधविश्वास पहुंचाता है अंधी राह पर

धार्मिक उपदेशकों के नाम पर चल रहे कथित रैकेट पर उठाए सवाल, कहा—भगवान के नाम पर खुद को एजेंट बताने वालों से रहें सावधान

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

9783414079 diliprakhai@gmail.com

मोटिवेशनल स्पीकर और लेखक शिव खेड़ा ने धर्म, आस्था और अंधविश्वास को लेकर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। एक वीडियो बातचीत में उन्होंने कहा कि भगवान में विश्वास रखने वाले लोग मानसिक रूप से मजबूत होते हैं, लेकिन जब यही आस्था बिना सोचे-समझे किसी व्यक्ति या दावे पर भरोसे में बदल जाती है तो वह अंधविश्वास का रूप ले सकती है।

शिव खेड़ा ने धार्मिक उपदेशकों और खुद को भगवान का प्रतिनिधि या एजेंट बताने वाले लोगों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाज के कई हिस्सों में धार्मिक व्यक्तियों के पैर छूना सम्मान का प्रतीक माना जाता है। उनके अनुसार, इसी सामाजिक धारणा का कुछ लोग कथित तौर पर फायदा उठा सकते हैं और धर्म के नाम पर एक बड़ा कारोबारी तंत्र खड़ा हो सकता है।

‘भगवान में विश्वास रखने वाले मजबूत बनते हैं’

शिव खेड़ा ने अपने संदेश में आस्था और अंधविश्वास के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भगवान में विश्वास व्यक्ति को कमजोर बनाने के बजाय मजबूत करता है। उनका जोर इस बात पर रहा कि व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों से भागने के बजाय स्वयं निर्णय लेने और अपनी जिंदगी की जिम्मेदारी स्वीकार करने की जरूरत है।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि आस्था ऐसी होनी चाहिए जो व्यक्ति को शक्ति दे, न कि ऐसी निर्भरता पैदा करे जिसमें वह हर समस्या का समाधान किसी कथित धार्मिक व्यक्ति के माध्यम से खोजने लगे।

पार्क और स्वर्ग की राह वाला उदाहरण

अपने विचार को समझाने के लिए शिव खेड़ा ने एक प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि एक कथित धार्मिक व्यक्ति भगवा वस्त्रों में कहीं जा रहा था। रास्ते में उसने एक महिला से पार्क का रास्ता पूछा। महिला ने उसे रास्ता समझा दिया।

इसके बाद उस धार्मिक व्यक्ति ने महिला से पार्क चलने का आग्रह करते हुए कहा कि वहां स्वर्ग तक पहुंचने के रास्ते पर चर्चा की जा रही है। इस पर महिला ने व्यंग्यात्मक अंदाज में जवाब दिया कि जिसे पार्क तक पहुंचने का रास्ता मालूम नहीं है, वह स्वर्ग का रास्ता कैसे बताएगा।

शिव खेड़ा ने इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि केवल धार्मिक वेशभूषा या किसी व्यक्ति के दावे के आधार पर उसकी बात को सच नहीं मान लेना चाहिए। किसी भी दावे को समझने के लिए विवेक और तार्किक सोच जरूरी है।

‘अंधी आस्था से बचें’

शिव खेड़ा के अनुसार, धार्मिक विश्वास और अंधविश्वास में स्पष्ट अंतर है। उनका संदेश है कि भगवान में आस्था रखने के साथ व्यक्ति को अपने विवेक का इस्तेमाल भी करना चाहिए। किसी व्यक्ति के धार्मिक होने का दावा अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि उसके सभी दावे सही हैं।

उन्होंने लोगों को सजग रहने, अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने और अपनी जिंदगी के फैसलों में स्वयं सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया।

विवेक के साथ आस्था जरूरी

शिव खेड़ा का यह संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है, जब धर्म और आस्था समाज में गहराई से जुड़े विषय हैं। धार्मिक विश्वास व्यक्तिगत आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन किसी भी व्यक्ति या संस्था के दावों को बिना जांचे स्वीकार करने से पहले सवाल पूछना और तथ्य समझना जरूरी है।

वीडियो में अपने संदेश का सार बताते हुए शिव खेड़ा ने कहा कि आस्था व्यक्ति को शक्ति देनी चाहिए, जबकि अंधी आस्था अंधविश्वास की ओर ले जा सकती है। उन्होंने लोगों से मजबूत बनने, जिम्मेदारी स्वीकार करने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की अपील की।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor