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Sunday, September 6, 2026, 11:31 am

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Lifestyle

ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर ठगी से सावधान, एक क्लिक में खाली हो सकता है बैंक खाता

फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन, नकली रिव्यू और कस्टमर केयर के जरिए ठग रहे साइबर अपराधी; जल्दबाजी और भारी छूट का लालच बन रहा ठगी का सबसे बड़ा हथियार

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

ऑनलाइन शॉपिंग ने खरीदारी को बेहद आसान बना दिया है। घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान से लेकर महंगे ब्रांडेड उत्पाद तक खरीदे जा सकते हैं। इसी सुविधा और डिजिटल खरीदारी की बढ़ती लोकप्रियता का फायदा साइबर ठग भी उठा रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर होने वाली ठगी में अपराधी फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट, नकली मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया विज्ञापन, फर्जी रिव्यू, आकर्षक ऑफर और कस्टमर केयर के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।

इस तरह की ठगी में केवल पैसे का नुकसान ही नहीं होता, बल्कि पीड़ित की व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी भी अपराधियों के हाथ लग सकती है। एक बार संवेदनशील जानकारी मिलने के बाद ठग तेजी से अनधिकृत लेन-देन कर खाते से रकम निकाल सकते हैं। इसलिए ऑनलाइन खरीदारी करते समय थोड़ी सी सावधानी बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।

भारी छूट और जल्दबाजी का दबाव

ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम में ठग सबसे पहले ग्राहक की मनोवैज्ञानिक कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। इसके लिए ऐसे संदेश और विज्ञापन तैयार किए जाते हैं, जिनसे ग्राहक बिना सोचे-समझे तुरंत खरीदारी करने के लिए प्रेरित हो जाए।

‘सिर्फ आज ऑफर’, ‘कुछ ही मिनट बाकी’, ‘स्टॉक खत्म होने वाला है’ या ‘लिमिटेड टाइम डील’ जैसे शब्द ग्राहक में जल्दबाजी पैदा करते हैं। दूसरी ओर, किसी महंगे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद या ब्रांडेड सामान पर असामान्य रूप से भारी छूट देखकर ग्राहक लालच में आ सकता है।

कई बार ठग फर्जी ग्राहकों के रिव्यू और रेटिंग भी दिखाते हैं। इससे वेबसाइट या उत्पाद भरोसेमंद प्रतीत होता है। कुछ मामलों में सोशल मीडिया पर प्रभावशाली व्यक्तियों या नकली इन्फ्लुएंसर के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल करके भी फर्जी उत्पादों और वेबसाइटों का प्रचार किया जाता है।

फर्जी वेबसाइट और ऐप से सावधान

साइबर ठग कई बार लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसी दिखने वाली वेबसाइट तैयार कर लेते हैं। वेबसाइट का नाम, लोगो, रंग और डिजाइन वास्तविक कंपनी से मिलता-जुलता रखा जाता है। ग्राहक इसे असली वेबसाइट समझकर लॉगिन या खरीदारी कर सकता है।

ऐसी वेबसाइटों पर खरीदारी करते समय ग्राहक से मोबाइल नंबर, ई-मेल, पता, कार्ड संबंधी जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण मांगे जा सकते हैं। जानकारी दर्ज करते ही वह अपराधियों तक पहुंच सकती है।

इसी तरह फर्जी मोबाइल ऐप भी लोगों को निशाना बना सकते हैं। इसलिए किसी भी नए प्लेटफॉर्म से खरीदारी करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है।

सोशल मीडिया विज्ञापन भी बन सकते हैं जाल

फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाले हर विज्ञापन को भरोसेमंद नहीं माना जा सकता। साइबर ठग आकर्षक तस्वीरों और बेहद कम कीमत वाले ऑफर के जरिए ग्राहकों को फर्जी वेबसाइट पर ले जाते हैं।

उदाहरण के लिए किसी महंगे ब्रांड का उत्पाद बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर दिखाया जा सकता है। ग्राहक जैसे ही विज्ञापन पर क्लिक करता है, वह एक ऐसी वेबसाइट पर पहुंच सकता है जो देखने में वास्तविक लेकिन वास्तव में फर्जी होती है।

इसलिए सोशल मीडिया पर दिखे किसी ऑफर पर तुरंत क्लिक करने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसी उत्पाद और ऑफर की जानकारी जांचना बेहतर है।

एडवांस पेमेंट मांगना भी खतरे की घंटी

कई फर्जी ऑनलाइन विक्रेता ग्राहक से खरीदारी के समय पूरी रकम पहले ही डिजिटल माध्यम से जमा करने को कहते हैं। कई बार कैश ऑन डिलीवरी यानी COD का विकल्प नहीं दिया जाता।

नए या अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदारी करते समय यदि विक्रेता केवल अग्रिम भुगतान पर जोर दे रहा है, तो सावधानी बरतनी चाहिए। विशेष रूप से तब, जब उत्पाद की कीमत असामान्य रूप से कम हो और वेबसाइट या विक्रेता की विश्वसनीयता स्पष्ट न हो।

नई वेबसाइट से खरीदारी करते समय संभव हो तो कैश ऑन डिलीवरी जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प को प्राथमिकता देना चाहिए।

नकली रिव्यू और एआई से बनाए गए प्रचार का इस्तेमाल

किसी उत्पाद के नीचे बड़ी संख्या में सकारात्मक रिव्यू देखकर ग्राहक अक्सर उसे भरोसेमंद मान लेता है। लेकिन साइबर ठग नकली रिव्यू भी तैयार कर सकते हैं। कुछ मामलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की मदद से नकली प्रचार सामग्री, तस्वीरें, वीडियो या ग्राहक जैसी दिखने वाली प्रतिक्रियाएं तैयार की जा सकती हैं।

इसलिए केवल रिव्यू देखकर किसी वेबसाइट या विक्रेता पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अलग-अलग स्रोतों से उत्पाद और विक्रेता की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।

डिलीवरी लेट होने का फर्जी संदेश

ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान ग्राहक को डिलीवरी संबंधी संदेश मिलना सामान्य है। साइबर ठग इसी प्रक्रिया का फायदा उठाते हैं। ग्राहक को संदेश भेजा जा सकता है कि उसका ऑर्डर डिलीवरी में देरी के कारण रोक दिया गया है या पता अपडेट करने की आवश्यकता है।

संदेश में एक लिंक दिया जाता है। ग्राहक जैसे ही लिंक खोलकर जानकारी भरता है, वह फर्जी वेबसाइट पर पहुंच सकता है। वहां दर्ज की गई बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी अपराधियों के हाथ लग सकती है।

इसलिए किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने के बजाय ऑर्डर की वास्तविक स्थिति संबंधित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप में जाकर जांचनी चाहिए।

फर्जी कस्टमर केयर से भी ठगी

कई पीड़ितों को ठगी का पता चलने के बाद कस्टमर केयर की तलाश होती है। साइबर अपराधी इसी स्थिति का फायदा उठाकर खुद को कस्टमर केयर कर्मचारी बताते हैं।

वे समस्या हल करने के नाम पर ग्राहक से बैंक खाते की जानकारी, कार्ड विवरण, OTP, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी मांग सकते हैं। कई बार पीड़ित को कोई ऐप डाउनलोड करने या किसी लिंक पर जाने के लिए भी कहा जाता है।

ध्यान रखें कि किसी भी समस्या के समाधान के नाम पर फोन पर बैंकिंग पासवर्ड, OTP या अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। कस्टमर सपोर्ट का नंबर हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक ऐप से ही प्राप्त करें।

एक बार जानकारी मिलने के बाद तेजी से होती है ठगी

ऑनलाइन शॉपिंग स्कैम का मुख्य उद्देश्य ग्राहक से संवेदनशील व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी हासिल करना होता है। ठग अलग-अलग तरीकों से ग्राहक को जानकारी साझा करने के लिए तैयार करते हैं।

जैसे ही पीड़ित फर्जी वेबसाइट या लिंक पर अपने बैंकिंग विवरण दर्ज करता है, अपराधी उस जानकारी का दुरुपयोग कर सकते हैं। इसके बाद खाते से अनधिकृत लेन-देन किए जाने का खतरा रहता है। यही कारण है कि किसी भी वेबसाइट पर भुगतान या बैंकिंग जानकारी दर्ज करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचना बेहद जरूरी है।

बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

वेबसाइट का पता जांचें: खरीदारी से पहले वेबसाइट का URL और डोमेन नाम ध्यान से देखें। संवेदनशील जानकारी दर्ज करने वाली वेबसाइट पर HTTPS और सुरक्षा संबंधी संकेतों की जांच करें।

असामान्य ऑफर से सावधान रहें: बाजार मूल्य की तुलना में बहुत ज्यादा छूट वाला ऑफर मिले तो तुरंत खरीदारी न करें। पहले विक्रेता और वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचें।

विश्वसनीय विक्रेता चुनें: प्रतिष्ठित और सत्यापित प्लेटफॉर्म तथा विक्रेताओं से ही खरीदारी को प्राथमिकता दें।

नई वेबसाइट पर COD को प्राथमिकता दें: किसी नए या कम परिचित प्लेटफॉर्म से खरीदारी करते समय संभव हो तो कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुनें।

कस्टमर केयर का नंबर खुद खोजें: सोशल मीडिया पोस्ट, SMS या अनजान वेबसाइट से मिले कस्टमर केयर नंबर पर भरोसा न करें। संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से संपर्क विवरण प्राप्त करें।

बैंकिंग जानकारी साझा न करें: फोन, मैसेज, ई-मेल या किसी अन्य माध्यम से किसी भी व्यक्ति के साथ बैंकिंग पासवर्ड, OTP और अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी साझा न करें।

सावधानी ही सबसे मजबूत सुरक्षा

ऑनलाइन खरीदारी सुविधा और समय दोनों बचाती है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। किसी भी ऑफर को देखकर तुरंत निर्णय लेने के बजाय कुछ मिनट उसकी सत्यता जांचने में लगाना आर्थिक नुकसान से बचा सकता है। भारी छूट, जल्दबाजी का दबाव, अनजान लिंक, फर्जी रिव्यू और संदिग्ध कस्टमर केयर—इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करें। डिजिटल खरीदारी में सतर्क रहें और अपनी व्यक्तिगत व वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रखें।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor