शुभ संकल्प समूह द्वारा शिक्षक दिवस पर ‘डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में गुरु-शिष्य संबंध’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन परिचर्चा आयोजित
भारत, यूएई, अमेरिका और नीदरलैंड सहित विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, साहित्यकारों और चिंतकों ने की शिरकत
केबी व्यास.. दुबई
शिक्षक दिवस के सुअवसर पर शुभ संकल्प समूह, इंदौर (एकलव्य समूह) के तत्वावधान में “डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में गुरु-शिष्य संबंध: चुनौतियाँ, संभावनाएँ और भविष्य” विषय पर एक भव्य अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन परिचर्चा का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारत एवं विदेश से जुड़े प्रख्यात शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं चिंतकों ने तकनीकी युग में शिक्षा के बदलते स्वरूप और मानवीय मूल्यों के संतुलन पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संचालक डॉ. नितीन उपाध्ये (प्राध्यापक और साहित्यकार, दुबई) ने सभी सम्मानित वक्ताओं का स्वागत किया और सभी प्रतिभागियों का परिचय प्रस्तुत किया। इसके पश्चात उन्होंने शुभ संकल्प समूह की संस्थापिका डॉ. सुनीता श्रीवास्तव को समूह की गतिविधियों पर प्रकाश डालने के लिए आमंत्रित किया।

डॉ. सुनीता श्रीवास्तव ने बताया कि शुभ संकल्प समूह द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें अमेरिका, नीदरलैंड, यूएई और भारत सहित कई देशों के प्रबुद्धजन सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी वक्ताओं एवं दर्शकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
विद्वान वक्ताओं के मुख्य वक्तव्य एवं विचार इस प्रकार रहे। श्री कुल भूषण व्यास (साहित्यकार, शारजाह) ने तकनीक के विकास पर बात करते हुए कहा कि AI एक सशक्त उपकरण (Tool) है और इसे एक माध्यम के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जिस तरह अतीत में कैलकुलेटर और लैपटॉप के आने से विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया आसान हुई, उसी तरह AI भी अध्ययन को सुगम बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
डॉ. आँचल मिश्रा (प्राध्यापक – कम्युनिकेशन स्किल्स, IMS-गाजियाबाद) ने AI और सोशल मीडिया के सकारात्मक व नकारात्मक दोनों पक्षों को रेखांकित किया। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इंटरनेट पर घातक और असामाजिक जानकारियों की सुलभता समाज के लिए अत्यंत खतरनाक है। दक्षिण कोरिया और एस्टोनिया जैसे विकसित देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कई देश अब पुनः भौतिक (Physical) शिक्षा प्रणाली की ओर लौट रहे हैं, जो मानवीय नियंत्रण और प्रत्यक्ष मार्गदर्शन की आवश्यकता को दर्शाता है।
श्री जय कृष्ण मिश्रा (साहित्यकार, शारजाह) ने भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा पर बल देते हुए कहा— “आज के डिजिटल युग में आवश्यकता गुरु की प्रासंगिकता को खत्म या कम करने की नहीं, बल्कि गुरु के मार्गदर्शन और डिजिटल ज्ञान के बीच एक संतुलित एवं सार्थक संबंध स्थापित करने की है।”
डॉ. बृजेश पारे (प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष – रसायन शास्त्र, माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन) ने कहा कि AI ने जानकारी प्राप्त करने में बहुत मदद की है, इसलिए अब शिक्षकों को विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए खुद को लगातार अपडेट रखना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI केवल एक टूल नहीं बल्कि एक सहायक है, लेकिन एक अच्छा शिक्षक ही अपने विद्यार्थियों की भावनाओं और संवेदनाओं को समझ सकता है। गुरु का अनुभव, स्नेह और आत्मीयता का स्थान कोई भी तकनीक नहीं ले सकती।
परिचर्चा का सार प्रस्तुत करते हुए डॉ. नितीन उपाध्ये ने कहा कि AI एक बेहद स्मार्ट और उपयोगी सहायक (Assistant) है, जिसकी मदद सभी को लेनी चाहिए। हालांकि, चूंकि विद्यार्थी अनुभवहीन और कच्ची मिट्टी के समान होते हैं, इसलिए उन्हें सही-गलत का बोध कराने और उनका चरित्र निर्माण करने की नैतिक जिम्मेदारी सदैव गुरु की ही रहेगी।
इस अंतरराष्ट्रीय परिचर्चा ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं, लेकिन गुरु की मानवीय संवेदना, नैतिक मार्गदर्शन और आत्मीयता का कोई विकल्प नहीं हो सकता ।


