शिव वर्मा. जोधपुर
भागवत सेवा परिवार के तत्वावधान में माहेश्वरी जनोपयोगी भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पूर्ण आहुति दिवस की कथा में गोवत्स राधाकृष्ण महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा के अंतर्गत मित्रता के प्रति कृष्ण सुदामा चरित्र, कुरुक्षेत्र में आगमन,
उद्धव जी को ज्ञान उपदेश, जरासंध का उद्धार, कलियुग का प्रारंभ, मार्कंडेय ऋषि का चरित्र का वर्णन किया।
राधाकृष्ण महाराज ने कहा कि 18 महापुराणों में से श्रीमद् भागवत पुराण सबसे श्रेष्ठ महापुराण है। उन्होंने कहा कि सुख बांटने से सुख बढ़ता है। महाराज ने कहा कि चरित्र ही सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की पहचान वस्त्र, वेश से नहीं बल्कि सादगी, सद्भाव और प्रेम से होती है। उन्होंने कहा कि सहनशक्ति के इत्र से दूसरों को महकाएं। जो भगवान से प्रेम करते हैं भगवान उनके हृदय में निवास करते हैं। कथा के मध्य. देना है तो दीजिए जन्म जन्म का साथ ..सांवरिया सेठ मोरी राधा जी है सेठानी…
मीठे रस से भरो री राधा रानी…आदि मधुर भजनों का सभी भक्तों को श्रवण कराया जिस पर भक्ति झूम उठे। कथा के उपरांत सभी भक्तों में प्रसादी का वितरण किया गया। इस दौरान फ्लाइट बाबा का आशीर्वचन भी साधकों को मिला।





