नैनो उर्वरक की विस्तार से जानकारी दी
सोहनलाल वैष्णव. बोरुंदा (जोधपुर)
कस्बे में सोमवार को इफको जयपुर द्वारा इफको नैनो मॉडल विलेज बोरुंदा में नैनो उर्वरक उपयोग संवर्धन हेतु महा अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इफ़को प्रबंधन के जितेंद्र कुमार भाकर द्वारा किसानों को नैनों यूरिया एवं नैनों डीएपी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए नैनो मॉडल विलेज स्कीम कि बारे में बताया कि इफको द्वारा नैनो मॉडल विलेज में नैनो यूरिया तरल, नैनो डीएपी, सागरिका तरल व ड्रोन द्वारा स्प्रे में 25% का किसानों को अनुदान दिया जाएगा व नैनो मॉडल विलेज में किसानों को पारंपरिक रसायनिक उर्वरकों का उपयोग 50% करके बाकी 50% की पूर्ति नैनो उर्वरकों व सागरिका के माध्यम से करनी है। जिससे की मृदा व वातावरण को प्रदूषित किए बिना हम बेहतर व गुणवतापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते है व इफको नैनो मॉडल विलेज के ग्राम समन्वयक, बिक्री केंद्र प्रभारी व ड्रोन उद्यमी के कार्यप्रणाली के बारे में बताया। इस दौरान पूर्व सरपंच हनुमान सिंह राठौड़, ग्राम सेवा सहकारी समिति व्यवस्थापक विक्रमसिंह राठौड़, समिति उपाध्यक्ष प्रकाश भंवरिया, संचालक हंसराज सोनी, कृषि अधिकारी प्रेमसिंह, अभिषेक वैष्णव, रामसिंह, अशोक बडियार, भीखसिंह मेड़तिया, यशपाल सिंह, गोविंदराम मेघवाल, राजेंद्र इनानिया, अशोक कुमार डोसी, यशराज दाधीच, कल्याण सिंह, महेश शर्मा, पुखराज मेघवाल, भगवान माली, चिमनाराम सहित कई ग्रामीण किसान उपस्थित रहे। इफको के सहायक क्षेत्र प्रबंधक जितेंद्र कुमार भाकर ने बताया कि बोरुंदा को नैनो मॉडल गांव बनाया जाएगा। इस नैनो मॉडल गांव के तहत इस गांव को गोद लिया जाएगा जिसमें इफको द्वारा ड्रोन जो बोरुंदा ग्राम सेवा सहकारी समिति को दिया गया है उसके द्वारा कृषि कार्यों में छिड़काव करने पर अनुदान भी दिया जाएगा। नैनो खाद पर भी अनुदान दिया जाएगा।
1. यूरिया की बिक्री दर – 266.50₹, सब्सिडी भारत सरकार द्वारा देय प्रति बैग – 2200 रुपए
2. नैनो यूरिया प्रति बॉटल दर – 225 ₹, सब्सिडी भारत सरकार द्वारा देय प्रति बॉटल – शून्य (0)
3. अ) नैनो यूरिया पूर्णतः स्वदेशी है, जबकि यूरिया 1/3 आयातित होता है तथा जो देश में बनता है उसका भी 70% कच्चा माल बाहर से आता है।
ब) नैनो यूरिया की बनाने की तकनीक यूरिया बनाने की तकनीक से बिल्कुल अलग है।
स) नैनो यूरिया, नैनो तकनीक पर आधारित है, जबकि यूरिया केमिलकल तकनीक पर आधारित है।
द) नैनो यूरिया की कार्य दक्षता, यूरिया की तुलना में लगभग 3 गुना ज्यादा है। इसलिये कम मात्रा में काम चल जाता है।
4. अ) बिजाई के 25 दिनों तक जो भी यूरिया उपयोग किया जाता है, उसको पूरा देना है तथा उसके बाद नैनो यूरिया का उपयोग करना चाहिये।
ब) नैनो यूरिया का उपयोग खड़ी फसल में स्प्रे के द्वारा करना चाहिए।
स) जब फसल जमीन को अच्छी तरह से ढक लें, यानी बिजाई के 35-40 दिनों बाद ही स्प्रे करें।
द) अनाज वाली फसलों ( जैसे गेंहू, बाजरा, जौ, मक्का, धान) व कपास में 4 मिलीलीटर प्रति लीटर तथा दलहनी, तिलहन, मसाला, सब्जी, फल व फूल वाली फसलों में 2 मिलीलीटर प्रति लीटर के घोल का स्प्रे करना चाहिये।
य) फसल के अनुसार 1 से 3 स्प्रे करने से उत्पादन में 8-15% की वृद्धि होती है।
5. अ) नैनो यूरिया का उपयोग खड़ी फसल में कभी भी कर सकते हैं। यह मिट्टी की दशा तथा मौसम पर निर्भर नही होता।
ब) दानेदार यूरिया के उपयोग के लिए खेत में नमी होना आवश्यक है, जबकि नैनो यूरिया के लिए जमीन में नमी होना आवश्यक नही है। अर्थात बारानी क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने में नैनो यूरिया बहुत कारगर है।
स) अधिक ठंड पड़ने पर दानेदार यूरिया बहुत कम कार्य करती जबकि अधिक ठंड में भी नैनो यूरिया अधिक कारगर है।
द) नैनो यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है। इसलिए इसको खरीदने के लिए न तो लाइन में लगना है, न ही पास मशीन पर अंगूठा लगाना है।
य) जमीन तथा पर्यावरण के लिए पूर्णतः सुरक्षित। साधारण यूरिया का एक कट्टा पर्यावरण में लगभग 14 किलोग्राम नाइट्रोजन छोड़ता है, वही नैनो यूरिया मात्र 2 ग्राम नाइट्रोजन छोड़ता है।
06. अ) भारत सरकार द्वारा साधारण यूरिया की तरह नैनो यूरिया का मुन्वमेंट प्लान बनाया जा रहा है।
ब) राजस्थान सरकार द्वारा ड्रोन से नैनो यूरिया का स्प्रे पर सभी जिलों में प्रदर्शन लगाए जा रहे हैं।
(स) कृषि विभाग विभिन्न प्रचार प्रसार के माध्यम से नैनो यूरिया के प्रयोग का सही विधि, समय, लाभ इत्यादि के बारे में किसानों को अवगत करा रही है।



