डॉ. पुरोहित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व निदेशक (प्रसार शिक्षा) हैं। राजस्थान के प्रथम पंजीकृत बैच फ्लावर रेमेडी परामर्शदाता बनने का गौरव हासिल किया । वर्तमान में वे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन अपने निवास स्थान पर अपनी क्लिनिक के माध्यम से मरीजो को परामर्श सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। अपनी शिक्षा , अनुभवों और ज्ञान को मानव समाज के सेवार्थ पहुँचाने के लिए उन्होंने “संबल एंटरप्राइज” की स्थापना की।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
जोधपुर के जालप मोहल्ला, बनावतों की गली के मूल निवासी डॉ. अरविन्द कुमार पुरोहित उन व्यक्तित्वों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने जीवन को केवल राजकीय सेवा एवं सरकारी सम्मान तथा उपलब्धियों तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी ज्ञान, सेवा और आत्मविकास की नई ऊँचाइयों को छुआ। 77 वर्ष की आयु में भी उनकी सक्रियता, अध्ययनशीलता और समाजसेवा का जज़्बा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
डॉ. पुरोहित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व निदेशक (प्रसार शिक्षा) हैं। उदयपुर विश्वविद्यालय से वर्ष 1968 में बॉटनी सहित बीएससी तथा वर्ष 1971 में जयनारायण व्यास ,जोधपुर से एम.एससी. तथा प्लांट फिजियोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ पीएच.डी.(1982 ) उपाधि प्राप्त की। उन्हें विश्वविद्यालय स्तर पर 35 वर्षों से अधिक के शैक्षणिक तथा 10 वर्षों से अधिक के प्रशासनिक अनुभव का गौरव प्राप्त है। वर्ष 2009 में निदेशक, प्रसार शिक्षा के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने स्वयं को निरंतर ज्ञानार्जन और समाजोपयोगी कार्यों में समर्पित रखा।
राजस्थान के प्रथम पंजीकृत बैच फ्लावर रेमेडी चिकित्सक
राजकीय सेवा से सेवानिवृत्ति के पश्चात कुछ समय तक आपने गौ सेवा केंद्र ,गौ विज्ञान केंद्र तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में सेवाए प्रदान की लेकिन कुछ करने की चाह तथा मन में मानव मात्र कि सेवा के भावो ने चलते वर्ष 2019 में डॉ. पुरोहित ने बैच फ्लावर रेमेडीज़ चिकित्सक बनने का निश्चय किया जिसके तहत आपने परीक्षा के तीन स्तर दिल्ली,चेन्नई तथा तीसरा लेवल इंग्लैंड के बैच फाउंडेशन सेंटर से पूर्ण कर BFRP का प्रमाण पत्र हासिल कर राजस्थान के प्रथम पंजीकृत बैच फ्लावर रेमेडी परामर्शदाता बनने का गौरव हासिल किया । वर्तमान में वे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन अपने निवास स्थान पर अपनी क्लिनिक के माध्यम से मरीजो को परामर्श सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं, अब तक सैकड़ों मरीजो का उपचार करते हुए उन्हें भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन भी दे चुके हैं। बैच फ्लावर रेमेडी एक ऐसी प्राकृतिक उपचार पद्धति है, जो व्यक्ति की मानसिक और भावनात्मक अवस्थाओं को संतुलित करने पर आधारित है । जीवन को अधिक सरल, संतुलित और सुखमय बनाने की खोज में डॉ. पुरोहित ने सद्गुरु से दीक्षा प्राप्त की और heartfulness के भी दीक्षित अभ्यासी हैं। आपने अनेक वैकल्पिक और स्व-उपचार प्रणालियों का अध्ययन किया। इनमें क्रिस्टल थेरेपी, एंजेल एवं ड्रैगन हीलिंग, स्वर-विज्ञान, पेंडुलम डाउज़िंग, होम्योपैथी, बायोकैमिक चिकित्सा, सुजोक, जिन शिन ज्यूत्सु, ईएफटी (टैपिंग) तथा एक्यूप्रेशर जैसी विधियाँ शामिल हैं। उनका उद्देश्य सदैव यह रहा कि आम व्यक्ति जीवन की जटिल समस्याओं के सरल और व्यावहारिक समाधान समझ सके। वर्तमान में श्रीं बीज मन्त्र उपचार प्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं।
“ संबल एंटरप्राइज” की स्थापना
अपनी शिक्षा , अनुभवों और ज्ञान को मानव समाज के सेवार्थ पहुँचाने के लिए उन्होंने “संबल एंटरप्राइज” की स्थापना की। इस मंच के माध्यम से उन्होंने अंग्रेजी, संस्कृत, बॉटनी, प्लांट फिजियोलॉजी, श्रीमद्भगवद्गीता, बैच फ्लावर रेमेडी, लॉ ऑफ अट्रैक्शन, मेनिफेस्टेशन और जीवन कौशल जैसे विषयों पर हिंदी, अंग्रेजी तथा मिश्रित भाषा में 16 से अधिक ई-पुस्तकों का लेखन एवं प्रकाशन किया है। इन पुस्तकों के मुद्रित संस्करण भी शीघ्र पाठकों के लिए उपलब्ध होने वाले हैं। संबल प्रतिष्ठान का शुभारंभ पद्मश्री शीन काफ निज़ाम एवं डॉ. एल. एन. हर्ष के करकमलों से हुआ। उनकी विभिन्न ई-पुस्तकों का लोकार्पण एवं विमोचन कृषि एवं शिक्षा जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों द्वारा किया गया। उनकी पुस्तकों के नमूने संबल की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। वर्तमान में डॉ. अरविन्द कुमार पुरोहित स्वास्थ्य क्षेत्र में बैच फ्लावर एवं होमियो परामर्शदाता, नीट अभ्यर्थियों के लिए बॉटनी विषय के मार्गदर्शक तथा विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए अंग्रेजी एवं संस्कृत व्याकरण के शिक्षक के रूप में सक्रिय हैं। वे डिजिटल समाचार पत्र “राइजिंग भास्कर” के ब्रांड एम्बेसडर भी हैं तथा उन्हें लाइफ अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
डॉ. पुरोहित का जीवन इस सत्य का सशक्त उदाहरण है कि सीखने की कोई आयु नहीं होती। जिस आयु में अधिकांश लोग विश्राम को प्राथमिकता देते हैं, उस आयु में वे अध्ययन, लेखन, शिक्षण और जनसेवा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने में जुटे हैं। उनका व्यक्तित्व यह संदेश देता है कि यदि मन में जिज्ञासा, सेवा का भाव और निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प हो, तो जीवन का प्रत्येक चरण नई संभावनाओं का द्वार बन सकता है।
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