दहशत के दो महीने : तेंदुआ बना तोप जो किसी के हाथ नहीं आया
डीके पुरोहित. जोधपुर
दो महीने से ज्यादा हो गए एक तेंदुए ने शहर को दहशत में डाल दिया है। मीडिया में यह तेंदुआ चर्चा का केंद्र बना हुआ है तो शहर में अनजान भय भी फैला हुआ है। खासकर पहाड़ी और वनीय इलाकों के साथ संभावित इलाकों में रहने वालों लोगों को अब चिंता सताने लगी है। अब बुधवार को खबर आई है कि रेस्क्यू टीम जागनाथ क्षेत्र में सर्च कर रही है। बताया जा रहा है कि मंगलवार रात 1 बजे के करीब कुत्तों के भौंकने के साथ ही गुर्राने की आवाज सुनाई दी थी। इसके बाद सर्च ऑपरेशन किया जा रहा है। कुछ लोगों ने आशंका जताई कि लेपर्ड गोवर्धन तालाब के आसपास हो सकता है इसलिए सतर्क रहने की आवश्यकता है।
एक तेंदुए ने पूरी विभागीय मशीनरी को हिला कर रख दिया है। माचिया जिसके लिए बंद रहा। सैलानी जिसके लिए दहशत में रहे। जिसे पकड़ने के लिए बीएसएफ और तमाम मशीनरी लगी रही। ड्रोन से जिसे तलाश किया गया। पिंजरे लगाए गए। शिकार लालच के लिए रखा गया। तमाम जतन किए गए मगर तेंदुआ है कि हाथ नहीं आया। अब सवाल है कि तेंदुए जैसे प्राणी को पकड़ना इतना मुश्किल है? वो भी तब जब आज जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और तथ्य यह भी है माचिया में पिंजरे तक तेंदुआ आ गया, बस पिंजरे में ही नहीं आ पाया। आखिर विभाग और अफसर इतने लाचार कैसे हो सकते हैं? सवाल आम आदमी पर मंडरा रहे खतरे का है। एक जंगली जानवर कभी भी हादसा कर सकता है। मगर कोई इसको लेकर पूरी तरह गंभीरता नहीं दिखा रहा। चार-पांच दिन दस दिन अभियान चलाकर बंद कर दिया जाता है। आखिर दो महीने तक विभागीय मशीनरी इतनी लापरवाह कैसे बनी रही? वो भी तब जब माचिया में हिरणों की मौत भी हो गई? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हिरणों को तेंदुए ने मारा। हालांकि रिपोर्ट यह भी आई कि गर्मी से भी हिरणाों की मौत हो सकती है? फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से मीडिया रिपोर्ट आई कि नहीं तेंदुए ने ही हिरणों का शिकार किया है। फिर तो यह सवाल और भी महत्वपूर्ण है कि इस तेंदुए को पकड़ने के लिए अभी तक माचिया, वन विभाग, प्रशासन और तमाम विभाग इतने लापरवाह कैसे बने रहे? आज तो इतने संसाधन है। सुविधाएं हैं। टेक्नोलॉजी है। फिर एक तेंदुए ने इतना छकाया है कि उसके दो महीने से पकड़ा नहीं जा सका।
क्या गोवर्धन तालाब के आसपास है तेंदुआ ?
एक पाठक ने आशंका जताई है कि तेंदुआ गोवर्धन तालाब के आसपास हो सकता है। अगर ऐसा है तो सर्च टीम को सतर्कता से इस क्षेत्र में पूरा फोकस रखना चाहिए। आसपास के लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है और सर्च टीम के साथ एक बार फिर बीएसएफ और विभागीय टीम को ड्रोन और टेक्नोलाॅजी के साथ सर्च अभियान चलाकर किसी भी तरह तेंदुए को पकड़ना चाहिए। क्योंकि दो महीने तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आना लोगों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है। गनीमत है कि अभी तक बड़ा शिकार तेंदुए ने नहीं किया है, शिवाय हिरणों को छोड़कर। इसके समय-समय पर कई इलाकों में पगमार्क नजर आए हैं। कई जगह कैमरे में भी जाता हुआ नजर आया है। हालांकि माचिया में तो पिंजरे तक आने का दावा भी किया गया है। मगर बस तथ्य यही है कि पकड़ा नहीं गया। सवाल है कि जोधपुर जैसे शहर में जहां लोग आधी रात को भी जागते रहते हैं और थोड़ी सी हलचल होते ही प्रतिक्रिया व्यक्त कर देते हैं फिर भला प्रशासनिक लापरवाही इतनी कैसे हो सकती है कि दो माह से तेंदुआ पकड़ा नहीं जा सका। कलेक्टर जो जिले का मालिक होता है। उन्होंने भी इस गंभीर मुद्दे पर रुचि नहीं दिखाई। इस तेंदुए को पकड़ने के लिए बाहर से भी एक्सपर्ट बुलाए गए। पर तेंदुआ हाथ नहीं आया। अब मामला काफी गंभीर हो गया है। इतने दिन से घूम रहा तेंदुआ अगर जल्द नहीं पकड़ा गया तो शहर के लोगों की चिंता वाजिब है। विभागीय टीम और कार्मिकों को अब गोवर्धन तालाब के आसपास सर्च करके भी देख लेना चाहिए।
इंतहा हो गई इंतजार की
तेंदुए को पकड़ने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। तमाम कोशिशें के बावजूद भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। दो महीने से विभाग लाचार बना हुआ है। आखिर क्यों? क्या विभाग ने हार मान ली है? क्यों छह सात दिन अभियान चलाकर रोक दिया जाता है? क्यों पहले दिन से ही विभाग ने गंभीरता दिखाई? पहले दिन से ही लगातार सर्च ऑपरेशन जारी क्यों नहीं रखा गया? सवाल सबसे बड़ा यह है कि माचिया में कई हिरणों का तेंदुआ शिकार कर लेता है और माचिया का प्रबंधन भी इसे स्वीकार कर रहा है फिर भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। क्या हमारी मशीनरी इतनी निष्किय और फेल है कि एक वन्य प्राणी को पकड़ने में विफल रही। अगर ऐसा है तो चिंता की बात है। आखिर इंतजार लंबा हो गया है।






