( प्रख्यात जैन संत पंकज प्रभु महाराज का पहली बार जारी फोटो।)
अद्भुत संत की अनसुलझी गुत्थी, पर विश्वास तो करना ही पड़ेगा, क्योंकि संतों के पास ही सिद्धियां होती हैं
डीके पुरोहित. जोधपुर
प्रख्यात जैन संत परम पूज्य पंकज प्रभु महाराज का चातुर्मास 17 जुलाई से अपने आश्रम में शुरू होगा। वे हमें मानसिक तरंगों के जरिए चार माह तक प्रवचन देंगे।
गौरतलब है कि हमने साल भर पहले विख्यात जैन संत परम पूज्य स्वामी पंकज प्रभु महाराज के प्रवचनों की शृंखला शुरू की थी। दो प्रवचनों की कड़ी हमने उदित भास्कर डॉट कॉम पर प्रकाशित की थी। बाद में हमारा पोर्टल किसी ने हैक कर दिया था। हमारा स्वामीजी से कॉन्टैक्ट भी टूट गया था। स्वामीजी का जन्म कहां हुआ किसी को नहीं पता। उनके गुरु कौन है? उनका आश्रम कहां है? ये सब बातें किसी को नहीं पता है। वे सिर्फ मानसिक संदेशों के जरिए अपनी बात लोगों तक पहुंचाते हैं। स्वामीजी से पिछली बार हमारा संपर्क 19 मई को हुआ था। अब स्वामीजी ने एक बार फिर हमसे संपर्क किया है और बताया है कि वे 17 जुलाई से अपने आश्रम में चातुर्मास शुरू करने जा रहे हैं। उनका आश्रम कहां है, इसकी किसी को जानकारी नहीं है। स्वामीजी के बारे में हमें अधिक जानकारी भी नहीं है। उनका वास्तविक स्वरूप किसी ने नहीं देखा है। उन्होंने पहली बार हमसे संपर्क किया तब एक तस्वीर सामने आई थी उसी का हम बार-बार उपयोग कर रहे हैं। इस तस्वीर में स्वामीजी के तिलक लगा हुआ है और स्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं। बैकग्रांउड में किसी तीर्थ स्थल सा नजारा है। लेकिन हम इस फोटो पर विश्वास करते हुए पाठकों के लिए जारी कर रहे हैं। चूंकि स्वामीजी के वास्तविक स्वरूप को किसी ने नहीं देखा है इसलिए इस तस्वीर में उनकी झलक देखी जा रही है। हालांकि जैन संत तिलक वगैरह नहीं लगाते हैं मगर इस फोटो में उनके तिलक लगा हुआ है। भविष्य में स्वामीजी किस रूप में सामने आते हैं या आते भी नहीं है, कह नहीं सकते। पर स्वामीजी के मानसिक रूप से संपर्क करने और उनकी बातों पर हम भरोसा करते हैं। क्योंकि संतों के पास अद्भुत सिद्धियां होती है। इन अद्भुत संत की अनसुलझी गुत्थी भविष्य में कैसे सुलझेगी फिलहाल इस पर बहस नहीं कर रहे। हां, स्वामीजी राइजिंग भास्कर के पाठकों के लिए चार माह तक प्रतिदिन प्रवचन देंगे। ये प्रवचन हमें मानसिक संदेश के जरिए भेजे जाएंगे जिसे हम पाठकों के सम्मुख रखेंगे। स्वामीजी ने कहा है कि वे प्रतिदिन किसी शब्द पर अपने प्रवचन केंद्रित रखेंगे और पहले दिन ‘ईश्वर’ शब्द पर प्रवचन देंगे।




